मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार (तस्वीर क्रेडिट@arysaurab)

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों का ऐलान: दो चरणों में 6 और 11 नवंबर को होंगे मतदान, 14 नवंबर को आएँगे नतीजे

पटना,7 अक्टूबर (युआईटीवी)- बिहार की सियासी सरगर्मी अब अपने चरम पर पहुँचने वाली है,क्योंकि सोमवार को चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस बार बिहार विधानसभा की सभी 243 सीटों पर दो चरणों में मतदान कराया जाएगा। पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को और दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को होगा। वहीं,मतगणना 14 नवंबर को की जाएगी और उसी दिन परिणाम घोषित किए जाएँगे।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि आयोग ने निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक तैयारियाँ पूरी कर ली हैं। उन्होंने कहा कि इस बार बिहार में मतदान को लेकर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए जाएँगे,ताकि कहीं भी हिंसा की कोई घटना न हो। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की हिंसा या भय का माहौल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके अलावा,सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों और फेक न्यूज पर सख्त नजर रखी जाएगी।

आयोग की घोषणा के साथ ही राज्य की सभी राजनीतिक पार्टियों ने अपनी चुनावी रणनीतियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। ज्ञानेश कुमार ने बताया कि इस बार बिहार में लगभग 7.43 करोड़ मतदाता अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इनमें 3.92 करोड़ पुरुष, 3.50 करोड़ महिलाएँ और 1,725 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। इसके अलावा,लगभग 7.2 लाख दिव्यांग मतदाता और 4.04 लाख वरिष्ठ नागरिक (85 वर्ष से अधिक आयु वाले) भी वोट डालेंगे। दिलचस्प बात यह है कि इस बार 100 वर्ष से अधिक उम्र के मतदाताओं की संख्या लगभग 14 हजार है,जो लोकतंत्र के प्रति जनता की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि लगभग 14 लाख फर्स्ट टाइम वोटर (18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले नए मतदाता) इस बार अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। आयोग ने विशेष रूप से नए मतदाताओं को चुनाव प्रक्रिया में शामिल करने के लिए जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इसके लिए सोशल मीडिया, स्कूल-कॉलेज और सामुदायिक संस्थानों के माध्यम से “मेरा पहला वोट – मेरा गर्व” जैसी मुहिम को तेज किया जाएगा।

बिहार विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल 22 नवंबर 2025 को समाप्त हो रहा है। इसलिए संवैधानिक रूप से नए विधानसभा का गठन इससे पहले होना जरूरी है। यही कारण है कि आयोग ने मतदान की तिथियों की घोषणा करते समय इस समयसीमा को ध्यान में रखा है। गौरतलब है कि राज्य के प्रमुख राजनीतिक दलों — जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू),राष्ट्रीय जनता दल (राजद),भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस — सभी ने आयोग से अनुरोध किया था कि मतदान छठ महापर्व के तुरंत बाद कराया जाए,ताकि लोगों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

इस बार का चुनाव कई दृष्टियों से खास माना जा रहा है। एक ओर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में सत्ताधारी जेडीयू-एनडीए गठबंधन अपनी सत्ता बरकरार रखने की कोशिश करेगा,वहीं दूसरी ओर राजद और कांग्रेस के नेतृत्व वाला महागठबंधन जनता के बीच नई उम्मीदें जगाने की कोशिश में है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि युवाओं और नए मतदाताओं की भूमिका इस चुनाव में निर्णायक साबित हो सकती है।

आयोग ने यह भी कहा कि राज्य में सभी मतदान केंद्रों को आवश्यक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिक मतदाताओं की सुविधा के लिए विशेष प्रबंध किए जाएँगे,जिनमें व्हीलचेयर,हेल्पलाइन और घर-घर जाकर मतदान की सुविधा भी शामिल हो सकती है। सभी बूथों पर सीसीटीवी कैमरे और वेबकास्टिंग की व्यवस्था की जाएगी,ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने स्पष्ट किया कि इस बार आयोग “फ्री एंड फेयर इलेक्शन” को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा। राज्य पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती सुनिश्चित की जा रही है,ताकि मतदान शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो सके। उन्होंने कहा, “हम नहीं चाहते कि मतदाता किसी भी प्रकार के डर या दबाव में वोट डालें। बिहार का चुनाव लोकतंत्र की मिसाल बनेगा।”

2020 के पिछले विधानसभा चुनाव की बात करें तो वह तीन चरणों में आयोजित किया गया था। पहले चरण में 28 अक्टूबर को 71 सीटों पर,दूसरे चरण में 3 नवंबर को 94 सीटों पर और तीसरे चरण में 7 नवंबर को 78 सीटों पर मतदान हुआ था। मतगणना 10 नवंबर को हुई थी,जिसमें एनडीए गठबंधन को बहुमत मिला था और नीतीश कुमार सातवीं बार मुख्यमंत्री बने थे।

हालाँकि,इस बार हालात कुछ अलग हैं। राज्य में बेरोजगारी,महँगाई,जातीय समीकरण और केंद्र-राज्य संबंध जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। राजनीतिक दलों ने पहले ही अपनी रैलियों और प्रचार अभियानों की तैयारियाँ शुरू कर दी हैं।

चुनाव आयोग के ऐलान के साथ ही बिहार में अब आचार संहिता लागू हो गई है। इसका अर्थ है कि अब राज्य सरकार किसी नई परियोजना की घोषणा नहीं कर सकेगी और प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह से चुनाव आयोग के नियंत्रण में आ गई है।

अब सभी की निगाहें 6 और 11 नवंबर पर टिकी हैं,जब बिहार की जनता एक बार फिर यह तय करेगी कि अगले पाँच वर्षों तक राज्य की सत्ता किसके हाथों में होगी। 14 नवंबर को जब नतीजे आएँगे,तो यह तय हो जाएगा कि क्या नीतीश कुमार एक बार फिर सत्ता में लौटेंगे या फिर बिहार में नई राजनीतिक कहानी लिखी जाएगी।