नई दिल्ली,18 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारतीय खेल जगत के लिए शनिवार का दिन ऐतिहासिक बन गया,जब तीरंदाजी की दुनिया में भारत की बेटी ज्योति सुरेखा वेन्नम ने ऐसा कारनामा किया,जो इससे पहले किसी भारतीय महिला कंपाउंड तीरंदाज ने नहीं किया था। चीन के नानजिंग में खेले गए विश्व कप फाइनल में ज्योति ने कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। उन्होंने दूसरी वरीयता प्राप्त ब्रिटेन की एला गिब्सन को 150-145 से मात दी। इस जीत के साथ वे वर्ल्ड कप फाइनल में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला कंपाउंड तीरंदाज बन गईं।
तीसरी वरीयता प्राप्त ज्योति ने गिब्सन के खिलाफ मुकाबले में अपने सभी 15 तीरों में सटीक 10 अंक हासिल किए। उनके प्रदर्शन ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया और यह साबित कर दिया कि वह इस समय दुनिया की सर्वश्रेष्ठ तीरंदाजों में से एक हैं। ज्योति ने मैच के हर दौर में गिब्सन को दबाव में रखा और शुरुआत से ही मुकाबले पर अपना नियंत्रण बनाए रखा। जैसे-जैसे मुकाबला आगे बढ़ता गया,ज्योति की सटीकता और आत्मविश्वास बढ़ता गया और अंततः उन्होंने 150 के परफेक्ट स्कोर के साथ ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम कर लिया।
एशियन गेम्स चैंपियन ज्योति ने इस टूर्नामेंट की शुरुआत शानदार अंदाज में की थी। उन्होंने क्वार्टर फाइनल में अमेरिका की एलेक्सिस रुइज को 143-140 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। हालाँकि,सेमीफाइनल में उन्हें दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी और मेक्सिको की एंड्रिया बेसेरा के खिलाफ कड़ा मुकाबला खेलना पड़ा। यह मैच बेहद रोमांचक रहा,लेकिन अंत में ज्योति 143-145 से मामूली अंतर से हार गईं। इसके बावजूद उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल मैच में जबरदस्त वापसी की और पूरी दुनिया को अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
यह विश्व कप फाइनल में ज्योति की तीसरी उपस्थिति थी। इससे पहले वे 2022 में मेक्सिको के ट्लाक्सकाला और 2023 में हर्मोसिलो में भी वर्ल्ड कप फाइनल में खेल चुकी हैं। हालाँकि,पिछली दोनों बार वे पदक से चूक गई थीं,लेकिन इस बार उन्होंने अपने अनुभव का पूरा इस्तेमाल किया और इतिहास रच दिया। उनकी यह उपलब्धि भारतीय तीरंदाजी के लिए एक नया अध्याय खोलती है,खासकर महिला कंपाउंड इवेंट में,जहाँ अब तक भारत को किसी पदक का इंतजार था।
वर्तमान में महिला कंपाउंड वर्ग में तीसरे स्थान पर काबिज ज्योति ने अपनी वर्ल्ड रैंकिंग के आधार पर नानजिंग में व्यक्तिगत स्पर्धा के लिए क्वालीफाई किया था। वह इस सीजन में निरंतर शानदार फॉर्म में रही हैं। उनके शांत स्वभाव,फोकस और मानसिक मजबूती ने उन्हें अंतर्राष्ट्रीय मंच पर लगातार सफल बनाया है।
भारत की एक अन्य तीरंदाज मधुरा धामनगांवकर का सफर दुर्भाग्यपूर्ण रूप से शुरुआती दौर में ही खत्म हो गया। उन्हें मेक्सिको की मारियाना बर्नाल के खिलाफ 142-145 से करीबी हार का सामना करना पड़ा। मधुरा ने हालाँकि,अपने पहले ही वर्ल्ड कप फाइनल में दमदार प्रदर्शन किया और इस अनुभव से आने वाले टूर्नामेंटों में बेहतर प्रदर्शन करने का संकेत दिया।
वहीं पुरुष कंपाउंड वर्ग में भारत की नजरें अब ऋषभ यादव पर टिकी हैं,जो दिन के बाद होने वाले क्वार्टरफाइनल मुकाबले में साउथ कोरिया के किम जोंगहो का सामना करेंगे। ऋषभ इस साल की शुरुआत में ऑबर्नडेल में कंपाउंड मिक्स्ड टीम इवेंट में ज्योति सुरेखा वेन्नम के साथ स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। इस जोड़ी ने पूरे टूर्नामेंट में बेहतरीन तालमेल दिखाया था और फाइनल में अपनी जीत से भारत का परचम ऊँचा किया था।
ज्योति और ऋषभ दोनों ने अपनी उत्कृष्ट रैंकिंग के दम पर नानजिंग में होने वाले इस प्रतिष्ठित फाइनल के लिए क्वालीफाई किया था। वर्ल्ड कप फाइनल में हिस्सा लेने वाले सभी तीरंदाजों का चयन या तो ऑबर्नडेल,शंघाई,अंताल्या और मैड्रिड में हुए चार वर्ल्ड कप चरणों में से किसी एक को जीतकर हुआ या फिर वर्ल्ड कप रैंकिंग के आधार पर किया गया। इस बात से यह साफ झलकता है कि इस टूर्नामेंट में केवल दुनिया के शीर्ष खिलाड़ी ही हिस्सा ले पाते हैं।
भारत ने इस वर्ष हुए चारों वर्ल्ड कप चरणों से कुल 14 पदक जीते हैं,जिनमें 3 स्वर्ण,4 रजत और 7 कांस्य शामिल हैं। यह भारतीय तीरंदाजी के इतिहास में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन में से एक है और इसका श्रेय ज्योति सुरेखा वेन्नम जैसी खिलाड़ियों को जाता है,जिन्होंने लगातार देश का नाम रोशन किया है।
ज्योति की यह उपलब्धि भारतीय खेल इतिहास में इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने उस वर्ग में सफलता पाई है,जिसमें भारत पारंपरिक रूप से पीछे रहा है। जब 2023 एशियन गेम्स में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था,तब ही यह स्पष्ट हो गया था कि वह आने वाले वर्षों में भारत की सबसे भरोसेमंद तीरंदाज बनने वाली हैं।
ज्योति सुरेखा वेन्नम की कहानी सिर्फ एक खेल उपलब्धि नहीं,बल्कि प्रेरणा की कहानी भी है। आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा से आने वाली ज्योति ने अपने करियर की शुरुआत बहुत कम उम्र में की थी। बचपन से ही उनकी सटीक निशानेबाजी और शांत एकाग्रता ने उन्हें अलग पहचान दी। उन्होंने अपने संघर्ष और समर्पण से भारतीय तीरंदाजी को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है।
नानजिंग में वर्ल्ड कप फाइनल में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने एक बार फिर से साबित कर दिया है कि वह केवल एशिया ही नहीं,बल्कि पूरी दुनिया की शीर्ष तीरंदाजों में शामिल हैं। उनका यह प्रदर्शन आने वाली पीढ़ी की महिला खिलाड़ियों को प्रेरित करेगा कि मेहनत,धैर्य और आत्मविश्वास के दम पर कोई भी सपना असंभव नहीं होता।
भारतीय खेलों में यह जीत सिर्फ एक पदक नहीं,बल्कि देश की नई खेल संस्कृति का प्रतीक है,जहाँ महिलाएँ अब न केवल भागीदारी कर रही हैं,बल्कि वैश्विक मंच पर सफलता की नई कहानियाँ लिख रही हैं। ज्योति सुरेखा वेन्नम का यह स्वर्णिम पल आने वाले वर्षों में भारतीय तीरंदाजी के लिए एक प्रेरणादायक अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।
