यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की,अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@Pawankumar_1305)

ट्रंप की कूटनीतिक पहल: पुतिन से फोन वार्ता के बाद ज़ेलेंस्की से मुलाकात,यूक्रेन युद्ध में ‘शांति फार्मूला’ की अपील

वाशिंगटन,18 अक्टूबर (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में खुद को स्थापित कर दिया है। रूस और यूक्रेन के बीच जारी भीषण युद्ध को समाप्त करने की दिशा में उनकी हालिया गतिविधियाँ इस बात का संकेत देती हैं कि अमेरिका अब इस संघर्ष को लंबे समय तक खींचने के बजाय किसी व्यावहारिक समाधान की ओर बढ़ना चाहता है। शुक्रवार को ट्रंप ने व्हाइट हाउस में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की से मुलाकात की,जो उनके और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच ढाई घंटे तक चली फोन वार्ता के एक दिन बाद हुई।

इस मुलाकात को दोनों नेताओं ने “सौहार्दपूर्ण” और “रचनात्मक” बताया,लेकिन सबसे ज्यादा ध्यान ट्रंप के उन बयानों ने खींचा,जिनमें उन्होंने खुलकर कहा कि “अब समय आ गया है कि हत्याएँ रोकी जाएँ और समझौता किया जाए।” अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने लिखा, “यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के साथ बैठक काफी रोचक और सौहार्दपूर्ण रही,लेकिन मैंने उनसे कहा,जैसा कि मैंने राष्ट्रपति पुतिन को भी सुझाव दिया था,कि अब समय है हत्याएँ रोकने का और शांति समझौते का।”

ट्रंप ने आगे कहा, “दोनों देशों को वहीं रुक जाना चाहिए,जहाँ वे हैं। दोनों को अपनी-अपनी जीत का दावा करने दें और बाकी फैसला इतिहास पर छोड़ दें। अब और गोलीबारी नहीं,अब और मौतें नहीं,अब और बेहिसाब धनराशि खर्च नहीं। यह ऐसा युद्ध है,जो अगर मैं राष्ट्रपति होता तो कभी शुरू ही नहीं होता। हर हफ्ते हजारों लोग मारे जा रहे हैं। अब और नहीं,अब समय है कि सैनिक अपने परिवारों के पास घर लौटें।”

ट्रंप के इस बयान ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि अमेरिका,खासकर ट्रंप प्रशासन,अब यूक्रेन युद्ध में निरंतर सैन्य मदद देने की नीति से पीछे हट सकता है। यूक्रेन को टॉमहॉक मिसाइलें देने के सवाल पर भी ट्रंप ने अपने रुख में बदलाव दिखाया। ज़ेलेंस्की के साथ बैठक से पहले मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, “हम टॉमहॉक मिसाइलों के बारे में बात करने जा रहे हैं,लेकिन हम चाहेंगे कि उन्हें टॉमहॉक की जरूरत ही न पड़े। सच कहूँ तो,हम युद्ध खत्म करना ही चाहेंगे। हम इसमें इसलिए हैं ताकि यह युद्ध खत्म हो,न कि और लंबा खिंचे।”

ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका को अपनी सुरक्षा के लिए इन मिसाइलों की जरूरत है और देश के हित सर्वोपरि हैं। “हम अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं कर सकते। हमें इन मिसाइलों की जरूरत अपने लिए भी है,लेकिन अगर शांति की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया जा सकता है,तो यही सबसे बड़ी जीत होगी।”

इस बयान से यह स्पष्ट झलकता है कि ट्रंप प्रशासन की प्राथमिकता अब युद्ध की आग में और ईंधन डालने के बजाय कूटनीतिक समाधान तलाशना है। दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है,जब मध्य पूर्व में दो साल से चल रहे इजरायल-हमास संघर्ष पर फिलहाल विराम लग चुका है। इस युद्धविराम के बाद अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की निगाहें अब रूस-यूक्रेन युद्ध पर हैं,जहाँ शांति की कोई ठोस संभावना लंबे समय से नहीं दिख रही थी।

राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने भी ट्रंप के साथ बैठक के बाद उम्मीद जताई कि अगर अमेरिका मध्य पूर्व में संघर्षविराम करा सकता है,तो रूस और यूक्रेन के बीच भी शांति का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। उन्होंने कहा, “हमें टॉमहॉक मिसाइलों की जरूरत है और हमें कई अन्य हथियारों की भी जरूरत है,जो हम पिछले चार सालों से अमेरिका से प्राप्त कर रहे हैं,लेकिन हम यह भी चाहते हैं कि युद्ध समाप्त हो। हर यूक्रेनी नागरिक शांति चाहता है,लेकिन यह शांति सम्मानजनक होनी चाहिए।”

ज़ेलेंस्की के इस बयान से यह साफ झलकता है कि यूक्रेन अब भी अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से समझौता करने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी भी संभावित शांति समझौते में रूस को उन क्षेत्रों से पीछे हटना होगा,जिन्हें उसने अवैध रूप से कब्जा किया है। हालाँकि,ट्रंप के “दोनों को वहीं रुक जाना चाहिए” वाले बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिका यूक्रेन को अपने कुछ रुखों में लचीलापन दिखाने के लिए प्रेरित कर सकता है।

ट्रंप का यह रवैया उनके पूर्व राष्ट्रपति कार्यकाल की विदेश नीति के अनुरूप है। वे हमेशा से “अमेरिका फर्स्ट” की नीति पर चलते रहे हैं और लंबे युद्धों में अमेरिकी धन और सैनिकों की भागीदारी को सीमित रखने के पक्षधर रहे हैं। उनका मानना है कि यूक्रेन युद्ध में अमेरिका की अंधाधुंध वित्तीय और सैन्य सहायता देश की आर्थिक स्थिरता के लिए खतरा बन सकती है।

विश्लेषकों के अनुसार,ट्रंप की यह पहल अमेरिकी राजनीति में भी एक बड़ा संकेत है। अगले राष्ट्रपति चुनावों से पहले ट्रंप यह दिखाना चाहते हैं कि वे शांति स्थापित करने में सक्षम हैं,खासकर उस युद्ध में जिसे बाइडन प्रशासन रोक नहीं पाया। यह कदम न केवल उनके समर्थकों को बल्कि उन अमेरिकी नागरिकों को भी संदेश देता है,जो लंबे समय से यूक्रेन युद्ध में अमेरिका की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।

रूस की ओर से अभी तक ट्रंप की इस पहल पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है,लेकिन क्रेमलिन के सूत्रों के अनुसार,पुतिन के साथ हुई फोन वार्ता में भी दोनों नेताओं के बीच “संभावित समझौते के रास्ते” पर चर्चा हुई।

अगर ट्रंप प्रशासन वास्तव में रूस और यूक्रेन को बातचीत की मेज पर लाने में सफल होता है,तो यह न केवल अमेरिकी कूटनीति की बड़ी सफलता होगी,बल्कि वैश्विक शांति प्रक्रिया में भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। फिलहाल,ट्रंप की यह कोशिश एक ऐसे समय में आई है,जब युद्ध थकान दोनों पक्षों में दिखाई देने लगी है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय भी किसी स्थायी समाधान की उम्मीद में है।

यूक्रेन युद्ध की शुरुआत 2022 में रूस के आक्रमण से हुई थी और अब तक लाखों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। ऐसे में अगर अमेरिका की पहल से शांति की कोई किरण दिखती है,तो यह पूरे विश्व के लिए राहत की खबर होगी। ट्रंप का संदेश स्पष्ट है — “अब और नहीं, युद्ध का अंत अब होना चाहिए।”