नई दिल्ली,18 अक्टूबर (युआईटीवी)- अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण हालात एक बार फिर चरम पर पहुँच गए हैं। बीते कुछ दिनों से दोनों देशों के बीच सीमा पर लगातार गोलीबारी और बमबारी की खबरें सामने आ रही थीं। हालात तब और बिगड़ गए जब 48 घंटे के युद्धविराम की अवधि खत्म होते ही पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर बड़ा हवाई हमला कर दिया। इस हमले में तीन अफगान क्रिकेटरों समेत आठ लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए। दोनों देशों के बीच सीमा संघर्ष अब मानवीय संकट में तब्दील होता जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल दक्षिण एशिया,बल्कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का भी ध्यान खींचा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप,जो हाल ही में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की से मुलाकात कर चुके हैं,उन्होंने भी इस संघर्ष पर टिप्पणी की है। ट्रंप ने कहा कि अगर उन्हें मौका मिले तो वे इस युद्ध को “बहुत आसानी से सुलझा सकते हैं।” उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि पाकिस्तान ने हमला किया है या शायद अफगानिस्तान पर हमला हुआ है। अगर मुझे इसे सुलझाना है,तो यह मेरे लिए बहुत आसान है। मुझे युद्ध सुलझाना पसंद है,क्योंकि मुझे लोगों को मरने से रोकना पसंद है। मैंने पहले भी लाखों-करोड़ों लोगों की जान बचाई है।”
ट्रंप की इस टिप्पणी ने एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने यह बयान ऐसे समय में दिया है,जब अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच की स्थिति बेहद नाजुक है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से सीमा विवाद,आतंकी गतिविधियों और राजनीतिक मतभेदों को लेकर तनाव बना हुआ है।
दूसरी ओर,अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (एसीबी) ने इस हमले की पुष्टि करते हुए पाकिस्तानी सेना की कड़ी निंदा की है। बोर्ड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड,पक्तिका प्रांत के उरगुन जिले के बहादुर क्रिकेटर्स की शहादत पर गहरा दुख व्यक्त करता है,जिन्हें पाकिस्तानी शासन की ओर से किए गए कायरतापूर्ण हमले में निशाना बनाया गया। इस हृदयविदारक घटना में उरगुन जिले के तीन खिलाड़ी — कबीर,सिबगतुल्लाह और हारून तथा पाँच अन्य देशवासियों की मौत हो गई,जबकि सात अन्य घायल हुए हैं।”
जानकारी के अनुसार,ये तीनों क्रिकेटर स्थानीय स्तर पर क्लब क्रिकेट खेलते थे और पक्तिका प्रांत की राजधानी शाराना में एक मैत्रीपूर्ण क्रिकेट मैच खेलने गए थे। मैच समाप्त होने के बाद जब वे अपने जिले उरगुन लौट रहे थे,तभी पाकिस्तान की ओर से की गई बमबारी में वे निशाने पर आ गए। यह हमला पाकिस्तान के ड्रोन या तोपों से किया गया बताया जा रहा है।
इस दर्दनाक घटना के बाद अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने पाकिस्तान के खिलाफ आगामी त्रिकोणीय टी20 सीरीज से हटने का निर्णय लिया है। यह सीरीज 17 नवंबर से शुरू होने वाली थी,जिसमें श्रीलंका,पाकिस्तान और अफगानिस्तान को हिस्सा लेना था। अब अफगानिस्तान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आक्रामकता जारी रखेगा,तब तक वह किसी भी क्रिकेट मुकाबले में हिस्सा नहीं लेगा।
यह पहली बार नहीं है,जब दोनों देशों के बीच खेल और राजनीति का टकराव हुआ है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के संबंध पिछले कुछ वर्षों से लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। खासतौर पर तालिबान के अफगानिस्तान में सत्ता में आने के बाद से दोनों देशों के बीच सीमा विवाद तेज हो गया है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की धरती से पाकिस्तान में आतंकवादी हमले किए जा रहे हैं,जबकि अफगानिस्तान इसे खारिज करते हुए पाकिस्तान पर अपनी सीमाओं में दखल देने का आरोप लगाता रहा है।
इस हमले ने दोनों देशों के बीच पहले से ही चल रहे तनाव को और भड़का दिया है। अफगानिस्तान के कई शहरों में पाकिस्तान विरोधी प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान के झंडे जलाए और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की माँग की।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इस हमले की निंदा हो रही है। संयुक्त राष्ट्र ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और तुरंत युद्धविराम लागू करने की अपील की है। यूएन के प्रवक्ता ने कहा कि किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई से निर्दोष नागरिकों की जान खतरे में पड़ रही है और इससे मानवीय स्थिति और बिगड़ सकती है।
इस बीच पाकिस्तान ने अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए दावा किया है कि उसने “आतंकी ठिकानों” को निशाना बनाया था,जो पाकिस्तान में हो रहे हमलों के लिए जिम्मेदार थे। हालाँकि,अफगानिस्तान ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि पाकिस्तान ने जानबूझकर नागरिकों को निशाना बनाया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का बयान इस पूरे विवाद को एक नया मोड़ दे सकता है। यूक्रेन-रूस युद्ध और इजरायल-हमास संघर्ष में पहले से मध्यस्थता की पेशकश कर चुके ट्रंप ने अब अफगानिस्तान-पाकिस्तान विवाद में भी “शांति वार्ता” का संकेत दिया है। उन्होंने कहा, “यह एक ऐसा युद्ध है जो अगर मैं राष्ट्रपति होता,तो कभी शुरू ही नहीं होता। मैं चाहता हूँ कि लोग अब अपने घर जाएँ,अपने परिवार के पास लौटें और यह हिंसा खत्म हो।”
हालाँकि,विश्लेषकों का मानना है कि इस क्षेत्र की जमीनी हकीकत कहीं अधिक जटिल है। सीमा विवाद,आतंकवाद,राजनीतिक अस्थिरता और बाहरी हस्तक्षेप — ये सभी ऐसे मुद्दे हैं,जिन्हें किसी एक बातचीत से सुलझाना आसान नहीं होगा,लेकिन यह साफ है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ती हिंसा न केवल क्षेत्रीय,बल्कि वैश्विक शांति के लिए भी खतरा बनती जा रही है।
अभी यह देखना बाकी है कि क्या अमेरिका या संयुक्त राष्ट्र की ओर से कोई ठोस मध्यस्थता का प्रयास किया जाएगा या दोनों देश एक बार फिर युद्धविराम की मेज पर लौटेंगे। फिलहाल,पक्तिका के क्रिकेट मैदानों में मातम पसरा है और उन परिवारों की आँखों में आँसू हैं,जिन्होंने खेल के जरिए देश का नाम रोशन करने वाले अपने बेटों को इस जंग में खो दिया।
