बॉलीवुड के वरिष्ठ एक्टर गोवर्धन असरानी (तस्वीर क्रेडिट@RahulSh87072141)

गोवर्धन असरानी के निधन पर शोक की लहर: पीएम मोदी सहित कई नेताओं और फिल्म जगत ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली,21 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारतीय सिनेमा जगत से एक बेहद दुखद खबर आई है। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और कॉमेडी के सम्राट कहे जाने वाले गोवर्धन असरानी का सोमवार शाम 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया। लंबे समय से बीमार चल रहे असरानी बीते पाँच दिनों से अस्पताल में भर्ती थे,जहाँ उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पूरे फिल्म उद्योग और उनके चाहने वालों में शोक की लहर दौड़ गई है। असरानी ने अपने लंबे करियर में 400 से अधिक फिल्मों में अभिनय कर दर्शकों को हँसाया,भावनाओं से जोड़ा और सिनेमा के हर रंग को अपनी कला से जीवंत किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असरानी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “गोवर्धन असरानी जी के निधन से अत्यंत दुःखी हूँ… एक प्रतिभाशाली मनोरंजनकर्ता और वास्तव में बहुमुखी कलाकार,उन्होंने विभिन्न पीढ़ियों के दर्शकों का मनोरंजन किया। भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को सदैव याद रखा जाएगा। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनाएँ।” प्रधानमंत्री के इस ट्वीट के बाद देशभर के लोगों ने भी असरानी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

पीएम मोदी के अलावा गृह मंत्री अमित शाह,कांग्रेस नेता राहुल गांधी,राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने भी असरानी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। अमित शाह ने अपने संदेश में लिखा, “अभिनेता असरानी जी का निधन अत्यंत दुःखद है। उन्होंने जीवन भर भारतीय सिनेमा में योगदान दिया और लोगों को हँसाकर लाखों लोगों के दिलों में जगह बनाई। भगवान उन्हें शांति दे और परिवार वालों को दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।”

स्वाति मालीवाल ने असरानी को ‘कॉमेडी की दुनिया का किंग’ बताया। उन्होंने लिखा, “अपनी एक्टिंग की कला से दशकों से देशवासियों का मनोरंजन करने वाले गोवर्धन असरानी के देहांत की दुखद खबर मिली। प्रभु दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें।” वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि असरानी एक ऐसे कलाकार थे जिन्होंने हर किरदार में जान डाल दी,चाहे वह कॉमेडी हो या गंभीर अभिनय।

गोवर्धन असरानी का फिल्मी करियर भारतीय सिनेमा के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय रहा है। उन्होंने अपने अभिनय जीवन की शुरुआत 1971 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘गुड्डी’ से की थी,जिसमें उन्होंने एक छोटे लेकिन प्रभावशाली किरदार से पहचान बनाई। शुरुआती दिनों में असरानी को अपने चेहरे-मोहरे के कारण “कमर्शियल हीरो” के रूप में नहीं देखा गया,लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। अपनी मेहनत,लगन और अभिनय कौशल के दम पर उन्होंने धीरे-धीरे खुद को एक ऐसे अभिनेता के रूप में स्थापित किया,जो किसी भी भूमिका को बखूबी निभा सकता था।

असरानी की सबसे यादगार भूमिकाओं में से एक रही ‘शोले’ फिल्म के “अंग्रेजों के जमाने के जेलर” का किरदार। यह रोल आज भी भारतीय सिनेमा की सबसे चर्चित कॉमेडी प्रस्तुतियों में गिना जाता है। इस किरदार ने असरानी को अमर कर दिया और उनकी कॉमिक टाइमिंग,हावभाव और संवाद अदायगी ने उन्हें दर्शकों के दिलों में हमेशा के लिए जगह दिला दी। इसके अलावा उन्होंने ‘चुपके चुपके’, ‘अभिमान’, ‘आंदोलन’, ‘छोटी बहू’, ‘राजा बाबू’, ‘दिल’, ‘हलचल’, ‘दुल्हे राजा’ और ‘भूल भुलैया’ जैसी कई हिट फिल्मों में यादगार भूमिकाएँ निभाईं।

उन्होंने केवल कॉमेडी में ही नहीं,बल्कि कई फिल्मों में भावनात्मक और गंभीर किरदार भी निभाए,जिससे साबित हुआ कि वह सिर्फ हँसाने वाले अभिनेता नहीं,बल्कि एक पूर्ण कलाकार थे। असरानी की जोड़ी अक्सर महमूद और कादर खान जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ नजर आई और उन्होंने अपने समय के लगभग सभी बड़े सितारों — राजेश खन्ना,अमिताभ बच्चन,धर्मेंद्र,हेमा मालिनी और जया बच्चन के साथ काम किया।

असरानी ने फिल्मों के अलावा छोटे पर्दे पर भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने कई टीवी धारावाहिकों में काम किया और यहाँ भी अपनी हास्य प्रतिभा से दर्शकों का दिल जीत लिया। ‘साबुन’ और ‘द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ जैसे कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी दर्शकों के लिए हमेशा एक मनोरंजक अनुभव रही।

अपने फिल्मी करियर के दौरान असरानी को कई पुरस्कारों और सम्मानों से नवाजा गया। उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया। उनकी कॉमेडी शैली की खासियत यह थी कि उसमें फूहड़ता नहीं,बल्कि एक सादगी और स्वाभाविकता होती थी। यही कारण है कि उनकी हँसी लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाने के साथ-साथ एक आत्मीय जुड़ाव भी पैदा करती थी।

अपने जीवन के अंतिम वर्षों में असरानी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उम्र से जुड़ी बीमारियों ने उन्हें कमजोर बना दिया था और बीते कुछ महीनों में उनकी तबीयत बिगड़ती जा रही थी। पाँच दिन पहले उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था,लेकिन डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।

गोवर्धन असरानी का निधन भारतीय सिनेमा के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपने अभिनय से न केवल दर्शकों को हँसाया,बल्कि जीवन के गहरे अर्थ भी सिखाए। उनकी अभिनय यात्रा प्रेरणा का स्रोत है,जो यह दर्शाती है कि सच्ची प्रतिभा किसी श्रेणी या रूप की मोहताज नहीं होती।

आज जब उनके निधन की खबर से पूरा देश शोक में डूबा है,तो उनके चाहने वाले यही कह रहे हैं कि असरानी भले ही अब इस दुनिया में नहीं हैं,लेकिन उनकी अदाकारी,उनका हँसमुख चेहरा और उनकी आवाज़ आने वाली पीढ़ियों तक सिनेमा के पर्दे पर जीवित रहेगी। भारतीय फिल्म उद्योग ने आज एक ऐसा सितारा खो दिया है,जिसने कभी दर्शकों को हँसाते हुए आँखों में आँसू तक ला दिए थे। गोवर्धन असरानी हमेशा भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम अध्याय का हिस्सा बने रहेंगे।