डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन (तस्वीर क्रेडिट@DeekshaKumari26)

ट्रंप-पुतिन मुलाकात रद्द: कूटनीतिक प्रगति की कमी पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने जताई नाराज़गी,रूस पर लगे नए प्रतिबंध

वाशिंगटन,23 अक्टूबर (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की संभावित मुलाकात को लेकर जो अटकलें बीते कुछ हफ्तों से लगाई जा रही थीं,उन पर अब पूर्णविराम लग गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट कर दिया है कि कूटनीतिक स्तर पर अपेक्षित प्रगति नहीं होने के कारण उन्होंने पुतिन के साथ प्रस्तावित बैठक को रद्द करने का निर्णय लिया है। व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्हें यह बैठक इस समय उचित नहीं लगी। उनके अनुसार, “हमने राष्ट्रपति पुतिन के साथ बैठक रद्द कर दी है। मुझे नहीं लगा कि हम उस स्तर पर पहुँच पाएँगे,जहाँ हमें पहुँचना था। इसलिए मैंने इसे स्थगित करने का फैसला किया,लेकिन हम भविष्य में निश्चित रूप से मिलेंगे।”

ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है,जब अंतर्राष्ट्रीय समुदाय रूस-यूक्रेन युद्ध में किसी भी संभावित समाधान को लेकर उम्मीदें लगाए बैठा है। दरअसल,पिछले हफ्ते ही ट्रंप और पुतिन के बीच करीब ढाई घंटे लंबी फोन कॉल हुई थी। उस बातचीत को ट्रंप ने “काफी सकारात्मक” बताया था और यह भी कहा था कि दोनों देशों के बीच कुछ अहम मुद्दों पर “काफी प्रगति” हुई है। इसके बावजूद जब इस बातचीत के ठोस नतीजे नहीं निकले,तो बैठक रद्द करने का निर्णय लिया गया।

सूत्रों के अनुसार,अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के बीच सोमवार को हुई फोन वार्ता के बाद यह फैसला पक्का किया गया। व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि मौजूदा परिस्थितियों में ऐसी बैठक “समय की बर्बादी” साबित हो सकती थी। मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने भी यही बात दोहराई। उन्होंने कहा, “ईमानदारी से कहूँ तो,हर बार जब मैं व्लादिमीर से बात करता हूँ,तो बातचीत अच्छी होती है,लेकिन अंत में हम किसी ठोस परिणाम तक नहीं पहुँचते। फिलहाल स्थिति ऐसी नहीं है कि हम कोई निर्णायक कदम उठा सकें।”

ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में अगर हालात सुधरते हैं और रूस की ओर से रचनात्मक संकेत मिलते हैं,तो मुलाकात को फिर से तय किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका रूस के साथ स्थायी शांति चाहता है,लेकिन इसके लिए कूटनीतिक प्रयासों का ठोस परिणाम आना जरूरी है।

हाल ही में इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम समझौते के बाद अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उम्मीद जगी थी कि रूस और यूक्रेन के बीच भी किसी तरह की सुलह प्रक्रिया शुरू हो सकती है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने भी कहा था कि “अगर हमास और इजरायल जैसे लंबे संघर्षरत पक्ष युद्धविराम पर सहमत हो सकते हैं,तो रूस-यूक्रेन युद्ध में भी ऐसा संभव है।” इसी पृष्ठभूमि में ट्रंप प्रशासन रूस के साथ संभावित वार्ता को लेकर सक्रिय हुआ था।

गौरतलब है कि ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही दावा किया था कि वह रूस-यूक्रेन युद्ध को रोक देंगे। उन्होंने कहा था कि “राष्ट्रपति बनने के 24 घंटे के भीतर ही यह युद्ध खत्म हो जाएगा।” लेकिन जनवरी 2025 में पदभार संभालने के बाद अब तक यह वादा पूरा नहीं हो पाया है। विश्लेषकों के अनुसार,रूस की कठोर रणनीति और अमेरिका के बढ़ते प्रतिबंधों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

दरअसल,इसी सप्ताह अमेरिका ने रूस पर नए प्रतिबंधों की एक बड़ी खेप लागू की है। अमेरिकी वित्त विभाग ने रूस की दो प्रमुख तेल कंपनियों—रोसनेफ्ट और लुकोइल पर सीधा प्रहार करते हुए उन्हें और उनकी सहायक कंपनियों को प्रतिबंध सूची में डाल दिया है। यह कदम रूस की ऊर्जा अर्थव्यवस्था को झटका देने वाला माना जा रहा है,क्योंकि तेल निर्यात रूस की आय का प्रमुख स्रोत है। इन प्रतिबंधों के तहत अमेरिकी कंपनियों और नागरिकों को इन रूसी संस्थाओं के साथ किसी भी तरह के वित्तीय या व्यापारिक लेन-देन की अनुमति नहीं होगी।

ट्रंप ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये कदम अस्थायी हो सकते हैं। उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि ये प्रतिबंध लंबे समय तक नहीं रहेंगे,लेकिन जब तक रूस की ओर से युद्ध रोकने की दिशा में कोई स्पष्ट कदम नहीं उठाया जाता,तब तक हमारे पास इन उपायों को लागू रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।”

विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन की यह नीति दोहरे उद्देश्य को साध रही है,एक ओर रूस पर दबाव बनाए रखना,ताकि वह यूक्रेन के खिलाफ अपने अभियान को रोकने के लिए मजबूर हो और दूसरी ओर घरेलू मोर्चे पर यह दिखाना कि अमेरिका वैश्विक शांति के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है।

हालाँकि,रूस ने इन प्रतिबंधों की निंदा की है। मॉस्को से जारी एक बयान में कहा गया कि “अमेरिकी प्रतिबंध न केवल अवैध हैं,बल्कि वे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हैं।” रूसी विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि वह “जल्द ही” इन कदमों के जवाब में समान रूप से कठोर कार्रवाई करेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार,ट्रंप का यह कदम अमेरिका-रूस संबंधों में एक और तनावपूर्ण मोड़ ला सकता है। जहाँ एक ओर व्हाइट हाउस उम्मीद कर रहा था कि पुतिन से मुलाकात के जरिए रूस-यूक्रेन वार्ता को फिर से पटरी पर लाया जा सकेगा,वहीं अब बैठक रद्द होने से कूटनीतिक चैनल कमजोर हो सकते हैं।

बहरहाल,ट्रंप ने संकेत दिया है कि बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा, “हम भविष्य में मिल सकते हैं,लेकिन फिलहाल हमें स्थिति का जायजा लेना होगा। किसी बैठक का कोई मतलब नहीं,जब तक दोनों पक्ष तैयार न हों।”

इस बयान से साफ है कि अमेरिकी प्रशासन फिलहाल सख्त रुख अपनाते हुए रूस पर दबाव बनाए रखना चाहता है। परंतु यह भी स्पष्ट है कि वाशिंगटन अब भी उम्मीद लगाए है कि कूटनीति के जरिए इस लंबे युद्ध को समाप्त करने का रास्ता निकाला जा सकता है। फिलहाल, ट्रंप-पुतिन मुलाकात रद्द होने के साथ यह साबित हो गया है कि रूस-यूक्रेन संकट का समाधान अभी दूर है और वैश्विक शांति की दिशा में दुनिया को थोड़ा और इंतजार करना होगा।