विदेश मंत्री एस जयशंकर

पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में भारत की डिजिटल मौजूदगी: पीएम मोदी वर्चुअली करेंगे संबोधन,जयशंकर जाएँगे मलेशिया

नई दिल्ली/कुआलालंपुर,24 अक्टूबर (युआईटीवी)- कुआलालंपुर में आयोजित होने जा रहे 20वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में इस बार भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं होंगे। हालाँकि,प्रधानमंत्री वर्चुअल माध्यम से समिट को संबोधित करेंगे,जबकि विदेश मंत्री एस. जयशंकर मलेशिया जाकर केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह सम्मेलन 26 और 27 अक्टूबर को आयोजित किया जाएगा,जिसमें हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता,शांति और विकास से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।

विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री मोदी 26 अक्टूबर को वर्चुअली पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन को संबोधित करेंगे,वहीं 27 अक्टूबर को विदेश मंत्री जयशंकर कुआलालंपुर में आयोजित होने वाले आसियान शिखर सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह बैठक भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है,क्योंकि यह हमारे “एक्ट ईस्ट पॉलिसी” और “इंडो-पैसिफिक विजन” का अभिन्न हिस्सा है।

मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और आसियान देशों के नेता इस दौरान भारत-आसियान संबंधों की अब तक की प्रगति की समीक्षा करेंगे और व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए नई पहलों पर चर्चा करेंगे। इस सम्मेलन में रक्षा, व्यापार,निवेश,डिजिटल अर्थव्यवस्था,जलवायु परिवर्तन,कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दे भी एजेंडे में रहेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में इस सम्मेलन के प्रति उत्साह जताते हुए लिखा कि वे “कुआलालंपुर में होने वाले 47वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में वर्चुअल रूप से भाग लेने के लिए उत्सुक हैं।” उन्होंने मलेशिया को आसियान अध्यक्षता संभालने के लिए बधाई दी और प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ हुई बातचीत का भी जिक्र किया।

मोदी ने अपने पोस्ट में लिखा, “मेरे प्रिय मित्र,मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ गर्मजोशी भरी बातचीत हुई। उन्हें आसियान की अध्यक्षता संभालने के लिए बधाई दी और आगामी शिखर सम्मेलनों की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं। आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में वर्चुअल रूप से शामिल होने और हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और प्रगाढ़ बनाने के लिए उत्सुक हूँ।”

प्रधानमंत्री के इस निर्णय के पीछे एक अहम कारण भारत में दीपावली पर्व का समय बताया जा रहा है। मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने भी इस बात की पुष्टि की कि मोदी दीपावली के चलते वर्चुअल माध्यम से सम्मेलन में शामिल होंगे। अनवर ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “कल रात मुझे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक करीबी सहयोगी का फोन आया,जिसमें भारत-मलेशिया द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक रणनीतिक और व्यापक स्तर पर मजबूत करने के प्रयासों पर चर्चा हुई।”

अनवर इब्राहिम ने आगे कहा कि मलेशिया और भारत प्रौद्योगिकी, शिक्षा और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में एक-दूसरे के अहम साझेदार हैं। उन्होंने लिखा, “भारत व्यापार और निवेश के क्षेत्र में मलेशिया का एक महत्वपूर्ण साझेदार बना हुआ है। हमने इस महीने के अंत में कुआलालंपुर में होने वाले 47वें आसियान शिखर सम्मेलन की तैयारियों पर भी चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि वह वर्चुअल रूप से भाग लेंगे,क्योंकि उस समय भारत में दीपावली का त्योहार मनाया जा रहा होगा। मैं उनके इस निर्णय का सम्मान करता हूँ और उन्हें तथा भारत के सभी नागरिकों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ।”

उन्होंने यह भी कहा कि मलेशिया भारत के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने और क्षेत्र में शांति एवं समृद्धि के लिए आसियान-भारत सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।

पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सबसे प्रभावशाली बहुपक्षीय मंचों में से एक माना जाता है। इसकी स्थापना 2005 में हुई थी और इसमें भारत,चीन,जापान,दक्षिण कोरिया,ऑस्ट्रेलिया,न्यूजीलैंड,अमेरिका और रूस सहित आसियान के 10 सदस्य देश शामिल हैं। यह मंच एशिया-प्रशांत क्षेत्र में राजनीतिक,सुरक्षा,आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देने का काम करता है।

भारत 2005 से ही इस शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख सदस्य रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने इस मंच के जरिए “इंडो-पैसिफिक की स्वतंत्रता और खुलापन” के सिद्धांत को मजबूती से आगे बढ़ाया है। मोदी सरकार के कार्यकाल में भारत ने दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ अपने आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों को नए स्तर पर पहुँचाया है।

“एक्ट ईस्ट पॉलिसी” के तहत भारत ने पिछले एक दशक में म्यांमार,थाईलैंड,वियतनाम,इंडोनेशिया और फिलीपींस जैसे देशों के साथ व्यापार,रक्षा और कनेक्टिविटी के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौते किए हैं। इसके अलावा,भारत का लक्ष्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक संतुलित और स्थिर व्यवस्था सुनिश्चित करना है,जिसमें क्षेत्रीय विवादों का शांतिपूर्ण समाधान हो सके और वैश्विक व्यापार मार्ग सुरक्षित बने रहें।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर की मलेशिया यात्रा इसी रणनीतिक दृष्टिकोण का हिस्सा है। वह न केवल आसियान समिट में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे,बल्कि कई द्विपक्षीय बैठकों में भी हिस्सा लेंगे,जिनमें व्यापारिक सहयोग,समुद्री सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन पर सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का वर्चुअल संबोधन और जयशंकर की मौजूदगी यह दर्शाती है कि भारत इस क्षेत्रीय साझेदारी को कितना महत्व देता है। भारत का उद्देश्य न केवल आर्थिक रूप से,बल्कि सांस्कृतिक और मानवीय दृष्टि से भी दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ अपने संबंधों को गहराई देना है।

इस वर्ष का पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि वैश्विक राजनीति में हिंद-प्रशांत क्षेत्र का महत्व लगातार बढ़ रहा है। चीन की आक्रामक नीतियों और क्षेत्रीय विवादों के बीच,भारत की भूमिका एक जिम्मेदार और संतुलित शक्ति के रूप में उभर रही है। इस पृष्ठभूमि में भारत की डिजिटल उपस्थिति और कूटनीतिक सक्रियता दोनों ही यह संदेश देती हैं कि भारत इस क्षेत्र की स्थिरता और समृद्धि के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।