नई दिल्ली,25 अक्टूबर (युआईटीवी)- अमेरिका और कनाडा के बीच पहले से तनावपूर्ण व्यापारिक संबंध एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गए हैं। इस बार विवाद की जड़ एक विज्ञापन है,जिसमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन की आवाज़ का इस्तेमाल किया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस विज्ञापन को “फर्जी और भ्रामक” बताते हुए कनाडा के साथ जारी सभी व्यापारिक वार्ताओं पर तत्काल रोक लगाने की घोषणा की है। इस घटनाक्रम ने दोनों पड़ोसी देशों के बीच पहले से मौजूद मतभेदों को और गहरा कर दिया है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “ट्रूथ” पर लिखा, “रोनाल्ड रीगन फाउंडेशन ने अभी घोषणा की है कि कनाडा ने धोखाधड़ी से एक विज्ञापन का इस्तेमाल किया है,जो पूरी तरह फेक है। इस विज्ञापन में रोनाल्ड रीगन को टैरिफ के खिलाफ बोलते हुए दिखाया गया है। यह विज्ञापन करीब 7.5 करोड़ डॉलर का है और इसे अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट व अन्य अदालतों के फैसलों को प्रभावित करने के मकसद से बनाया गया है। टैरिफ अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम हैं। इस घटिया हरकत के चलते मैं कनाडा के साथ सभी व्यापारिक वार्ताएँ समाप्त करता हूँ।”
ट्रंप की इस कड़ी प्रतिक्रिया के बाद अमेरिका और कनाडा के बीच तनाव तेजी से बढ़ गया है। इससे पहले भी दोनों देशों के बीच टैरिफ और व्यापार समझौतों को लेकर कई बार मतभेद सामने आ चुके हैं। कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल के दौरान भी ट्रंप और ट्रूडो के बीच कई बार कड़े बयानबाज़ी के दौर देखे गए थे। अब यह नया विवाद दोनों देशों के संबंधों में एक और अध्याय जोड़ता नजर आ रहा है।
विवाद की जड़ में मौजूद विज्ञापन कनाडा के ओंटारियो प्रांत की सरकार की फंडिंग से तैयार किया गया बताया जा रहा है। इस विज्ञापन में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के 1987 के एक भाषण की ऑडियो क्लिप का इस्तेमाल किया गया है। इस क्लिप में रीगन टैरिफ को अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक बताते हुए कहते हैं कि “टैरिफ नौकरियाँ खत्म करते हैं,उपभोक्ताओं पर बोझ डालते हैं और अमेरिकी उद्योगों को कमजोर बनाते हैं।” कनाडा ने इस ऑडियो को एडिट कर एक ऐसे विज्ञापन में शामिल किया है,जो ट्रंप की व्यापारिक नीतियों की आलोचना करता है।
विज्ञापन में दावा किया गया कि ट्रंप द्वारा लगाए गए 25 से 35 प्रतिशत आयात शुल्क “आर्थिक आत्महत्या” के समान हैं,जो अमेरिका और कनाडा दोनों के व्यापार को नुकसान पहुँचाएँगे। विज्ञापन में यह भी कहा गया कि “टैरिफ की नीति एकतरफा सोच का नतीजा है,जो उत्तरी अमेरिकी साझेदारी को कमजोर करेगी।” इस विज्ञापन के प्रसारित होने के तुरंत बाद अमेरिका में हंगामा मच गया।
रोनाल्ड रीगन फाउंडेशन ने इस विज्ञापन पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि उनके संस्थान से इस तरह के इस्तेमाल की कोई अनुमति नहीं ली गई थी। फाउंडेशन के प्रवक्ता ने कहा, “रीगन के भाषण को भ्रामक तरीके से एडिट किया गया है और इसे राजनीतिक प्रचार में इस्तेमाल किया गया,जो हमारे संस्थान की नीतियों के खिलाफ है। हम इस पर कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं।”
रीगन फाउंडेशन की आपत्ति के बाद ट्रंप ने इस मामले को राष्ट्रीय सम्मान और सुरक्षा के मुद्दे से जोड़ते हुए कनाडा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि “कनाडा ने न केवल एक अमेरिकी राष्ट्रपति की विरासत का अपमान किया है,बल्कि यह अमेरिका की संप्रभुता और स्वतंत्र आर्थिक नीति में दखल देने की कोशिश भी है।”
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की यह प्रतिक्रिया केवल विज्ञापन तक सीमित नहीं है,बल्कि यह उनके “अमेरिका फर्स्ट” एजेंडे का हिस्सा है। ट्रंप का मानना है कि टैरिफ नीति अमेरिकी उद्योगों और श्रमिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है। उनके अनुसार,अगर विदेशी उत्पादों पर ऊँचे टैरिफ नहीं लगाए जाएँ,तो अमेरिकी कंपनियाँ प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएँगी। दूसरी ओर,कनाडा और अन्य व्यापारिक साझेदार देशों का कहना है कि ट्रंप की टैरिफ नीति मुक्त व्यापार के सिद्धांतों के खिलाफ है और यह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को नुकसान पहुँचाती है।
गौरतलब है कि अमेरिका ने हाल ही में कनाडा से आने वाले कई उत्पादों पर 35 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया है। हालाँकि,अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा समझौते (यूएसएमसीए) के तहत कुछ वस्तुओं पर छूट दी गई है,लेकिन मेटल और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर टैरिफ अब भी लागू हैं। कनाडा का कहना है कि यह नीति उसकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचा रही है और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संतुलन को बिगाड़ रही है।
अब जबकि ट्रंप ने औपचारिक रूप से सभी व्यापार वार्ताओं पर रोक लगाने की घोषणा कर दी है,दोनों देशों के बीच आर्थिक तनाव और बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस निर्णय से सीमा पार व्यापार पर गंभीर असर पड़ सकता है,क्योंकि कनाडा अमेरिका का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि क्या यह विवाद केवल बयानबाज़ी तक सीमित रहेगा या फिर यह अमेरिका-कनाडा आर्थिक संबंधों में स्थायी दरार पैदा करेगा। रीगन फाउंडेशन की ओर से कानूनी कार्रवाई की बात और ट्रंप का तीखा जवाब संकेत दे रहे हैं कि यह विवाद जल्द थमने वाला नहीं है।
रोनाल्ड रीगन के एक पुराने भाषण से शुरू हुआ यह विवाद अब दो देशों की नीतियों और प्रतिष्ठा का मुद्दा बन चुका है। जहाँ अमेरिका इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्वायत्तता का मामला बता रहा है,वहीं कनाडा इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा मान रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और कूटनीति के किस नए मोड़ पर जाकर ठहरता है।
