नवी मुंबई,31 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने वनडे विश्व कप 2025 में ऐसा इतिहास रचा,जो आने वाले कई वर्षों तक याद रखा जाएगा। डीवाई पाटिल स्पोर्ट्स एकेडमी में खेले गए सेमीफाइनल मुकाबले में भारत ने मौजूदा चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को 5 विकेट से हराकर फाइनल में प्रवेश कर लिया। यह जीत सिर्फ एक मुकाबले की जीत नहीं,बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट के आत्मविश्वास,जज्बे और जुनून की मिसाल बन गई। टीम इंडिया की इस शानदार जीत की नायिका रहीं जेमिमा रोड्रिग्स,जिन्होंने दबाव के माहौल में नाबाद 127 रन की शतकीय पारी खेलकर भारत को विश्व कप फाइनल का टिकट दिलाया।
ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए बड़ा स्कोर खड़ा किया। टीम की शुरुआत शानदार रही और उनकी ओपनर फोएबे लिचफिल्ड ने भारतीय गेंदबाजों के सामने डटकर बल्लेबाजी की। लिचफिल्ड ने मात्र 93 गेंदों पर 17 चौके और 3 छक्के की मदद से 119 रन की बेहतरीन पारी खेली। उनके साथ एल्सी पेरी ने भी 77 रन बनाए,जबकि एश्ले गार्डनर ने 45 गेंदों पर 4 छक्कों और 4 चौकों के साथ 63 रन की तेज़तर्रार पारी खेली। इन तीनों बल्लेबाजों के दम पर ऑस्ट्रेलिया ने निर्धारित 50 ओवरों में 338 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया।
भारतीय गेंदबाजों के लिए यह दिन कुछ खास नहीं रहा। हालाँकि,टीम ने बीच-बीच में विकेट हासिल किए और ऑस्ट्रेलियाई रनगति को नियंत्रित करने की कोशिश की। भारत की ओर से श्री चरणी और दीप्ति शर्मा ने 2-2 विकेट झटके,जबकि क्रांति गौड़,अमनजोत कौर और राधा यादव को एक-एक विकेट मिला। तीन ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज रन आउट भी हुईं,लेकिन 339 रन का लक्ष्य महिला क्रिकेट के इतिहास में किसी भी टीम के लिए सबसे कठिन माने जाने वाले लक्ष्यों में से एक था।
लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत उम्मीदों के विपरीत रही। टीम ने 59 रन के कुल स्कोर पर अपने दोनों सलामी बल्लेबाज खो दिए। शेफाली वर्मा मात्र 10 रन बनाकर आउट हुईं,जबकि स्मृति मंधाना 24 रन के व्यक्तिगत स्कोर पर पवेलियन लौट गईं। शुरुआती झटकों के बाद भारतीय टीम पर दबाव बनना स्वाभाविक था,लेकिन इसी समय जेमिमा रोड्रिग्स और कप्तान हरमनप्रीत कौर ने मिलकर भारतीय पारी को संभाला।
दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 167 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी कर मैच को भारत के पक्ष में मोड़ा। हरमनप्रीत ने अपने अनुभव का पूरा इस्तेमाल करते हुए 88 गेंदों पर 10 चौके और 2 छक्के की मदद से 89 रन बनाए। हालाँकि,जब टीम 226 रन के स्कोर पर पहुँची,तब हरमनप्रीत आउट हो गईं। उनका विकेट गिरते ही मैच एक बार फिर रोमांचक मोड़ पर पहुँच गया,लेकिन जेमिमा ने धैर्य और संयम के साथ खेल को आगे बढ़ाया।
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दीप्ति शर्मा ने चौथे विकेट के लिए जेमिमा के साथ 38 रन की साझेदारी की और 17 गेंदों पर 24 रन बनाकर आउट हुईं। इसके बाद ऋचा घोष ने भी तेजी से रन बनाए और 16 गेंदों पर 26 रन की पारी खेली। अंत में अमनजोत कौर ने 8 गेंदों पर नाबाद 15 रन बनाकर जेमिमा का शानदार साथ दिया।
इस बीच जेमिमा रोड्रिग्स ने एक छोर मजबूती से संभाले रखा और हर गेंद को सटीक तरीके से खेलते हुए भारतीय टीम को लक्ष्य की ओर ले गईं। उन्होंने 134 गेंदों में 14 चौकों की मदद से नाबाद 127 रन की पारी खेली। उनकी यह पारी न केवल व्यक्तिगत रूप से शानदार रही,बल्कि यह महिला वनडे क्रिकेट इतिहास की सबसे यादगार पारियों में से एक बन गई।
भारतीय टीम ने 48.3 ओवर में 5 विकेट खोकर 341 रन बनाते हुए 5 विकेट से यह ऐतिहासिक जीत दर्ज की। यह मुकाबला महिला वनडे क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा सफल चेज साबित हुआ। इससे पहले 331 रन का लक्ष्य किसी भी महिला टीम ने कभी सफलतापूर्वक हासिल नहीं किया था। भारत ने 339 रन के विशाल लक्ष्य को पार कर इतिहास रच दिया और साथ ही ऑस्ट्रेलिया जैसी दिग्गज टीम को सेमीफाइनल में मात देकर अपनी काबिलियत साबित कर दी।
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मैच के बाद जेमिमा रोड्रिग्स को ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया। उन्होंने अपने प्रदर्शन को टीम वर्क और धैर्य का परिणाम बताया। जेमिमा ने कहा, “जब हमने शुरुआत में दो विकेट खो दिए,तब हमने सिर्फ यह सोचा कि साझेदारी करनी है और आखिरी तक खेलना है। हरमनप्रीत दी ने मुझे कहा कि घबराना नहीं,बस अपनी लय में खेलते रहो। वही हमने किया और नतीजा हमारे सामने है।”
भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर ने भी टीम की सराहना करते हुए कहा कि यह जीत टीम स्पिरिट का नतीजा है। उन्होंने कहा, “हर खिलाड़ी ने अपना योगदान दिया,लेकिन जेमिमा की पारी को मैं भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास की सबसे बेहतरीन पारियों में गिनूँगी।”
इस जीत के साथ भारतीय महिला टीम ने न सिर्फ फाइनल में प्रवेश किया,बल्कि दुनिया को यह भी दिखा दिया कि अब भारतीय महिलाएँ किसी भी स्तर पर पीछे नहीं हैं। टीम अब 2 नवंबर को फाइनल में दक्षिण अफ्रीका से भिड़ेगी। पूरा देश अब इस उम्मीद में है कि भारतीय महिला टीम अपने शानदार प्रदर्शन को फाइनल में भी दोहराए और पहली बार वनडे विश्व कप ट्रॉफी अपने नाम करे।
डीवाई पाटिल स्टेडियम में भारत की यह जीत क्रिकेट इतिहास का सुनहरा अध्याय बन गई। यह मुकाबला सिर्फ एक सेमीफाइनल नहीं,बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट के नए युग की शुरुआत साबित हुआ,जहाँ आत्मविश्वास,हिम्मत और जुनून ने हर मुश्किल को मात दे दी।
