मॉस्को,3 नवंबर (युआईटीवी)- रूस और अमेरिका के बीच संभावित उच्चस्तरीय वार्ता एक बार फिर अधर में लटक गई है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच प्रस्तावित बैठक रद्द होने के बाद,अब क्रेमलिन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने स्पष्ट किया कि वर्तमान परिस्थिति में इस बैठक की कोई तात्कालिक आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि दोनों देशों की सरकारें चाहें तो इस तरह की बैठक की तैयारी अल्प समय में की जा सकती है,लेकिन मौजूदा हालात में ऐसा करने की जरूरत महसूस नहीं होती।
पेस्कोव ने अपने बयान में कहा कि “इस समय सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा यूक्रेन समझौते पर बारीकी से काम करना है। रूस इस पर व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना चाहता है,न कि जल्दबाजी में बैठकें कर किसी निष्कर्ष पर पहुँचना।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब तक अमेरिका अपने रुख को लेकर स्पष्ट नहीं होता,तब तक पुतिन और ट्रंप के बीच वार्ता का कोई ठोस परिणाम निकलना मुश्किल है।
रूसी समाचार एजेंसी टीएएसएस के हवाले से न्यूज़ एजेंसी सिन्हुआ ने बताया कि पेस्कोव ने रविवार को यह भी कहा कि क्रेमलिन अब तत्काल किसी उच्चस्तरीय मुलाकात की दिशा में नहीं बढ़ रहा है। उनका बयान उस समय आया,जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 अक्टूबर को यह घोषणा की थी कि वह हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में प्रस्तावित बैठक को रद्द कर रहे हैं।
ट्रंप ने अपने बयान में कहा था, “मैंने इस बैठक को रद्द करने का निर्णय लिया है क्योंकि यह सही समय नहीं लग रहा था। मुझे नहीं लगा कि हम उस मुकाम तक पहुँच पाएँगे,जहाँ हमें पहुँचना चाहिए।” इस बयान के बाद वाशिंगटन और मॉस्को के बीच कूटनीतिक गर्माहट ठंडी पड़ गई है।
गौरतलब है कि 16 अक्टूबर को पुतिन और ट्रंप के बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई थी,जिसके बाद दोनों नेताओं ने संकेत दिए थे कि वे जल्द ही आमने-सामने मुलाकात करेंगे। उस समय खबरें थीं कि यह बैठक हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन की मध्यस्थता में बुडापेस्ट में आयोजित हो सकती है। परंतु अब यह योजना फिलहाल स्थगित हो गई है।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पहले ही कहा था कि इस बैठक को रद्द करने की बजाय इसे स्थगित करने की संभावना अधिक है। पुतिन ने यह भी कहा कि इस बैठक की पहल अमेरिका की ओर से की गई थी,न कि रूस की ओर से। उन्होंने कहा कि रूस किसी भी संवाद के लिए तैयार है,लेकिन वह इसे “सम्मानजनक और व्यावहारिक शर्तों” पर ही करेगा।
इस बीच,रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने 26 अक्टूबर को बयान दिया था कि दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच व्यक्तिगत संपर्कों का भविष्य पूरी तरह अमेरिकी पक्ष के रवैये पर निर्भर करता है। लावरोव ने कहा कि मॉस्को हमेशा बातचीत के लिए तैयार है,लेकिन अमेरिका की ओर से बार-बार के असंगत बयानों और रद्द किए गए संवादों से यह स्पष्ट है कि वाशिंगटन इस समय स्थायी समाधान की दिशा में गंभीर नहीं है।
दोनों नेताओं की आखिरी आमने-सामने की मुलाकात 15 अगस्त को हुई थी। यह बैठक अमेरिका के अलास्का राज्य के एंकोरेज शहर में स्थित ज्वाइंट बेस एल्मेंडॉर्फ-रिचर्डसन में आयोजित हुई थी। यह मुलाकात रूस-यूक्रेन युद्धविराम या किसी महत्वपूर्ण समझौते के बिना समाप्त हो गई थी। यह भी उल्लेखनीय है कि फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद यह दोनों नेताओं की पहली प्रत्यक्ष बैठक थी।
हालाँकि,पुतिन और ट्रंप की मुलाकात से जुड़ी कूटनीतिक बातचीत के बीच रूस ने शनिवार रात यूक्रेन पर एक और हमला कर दिया। रूसी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक,इस हमले में दो बच्चों समेत छह लोगों की मौत हो गई। यह हमला यूक्रेन के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में ड्रोन और मिसाइलों से किया गया। अधिकारियों ने बताया कि शनिवार रात से लेकर रविवार सुबह तक रूस ने यूक्रेन पर कई हवाई हमले किए,जिनसे बिजली व्यवस्था चरमरा गई और लगभग 58 हजार घर अँधेरे में डूब गए।
यूक्रेनी प्रशासन ने दावा किया है कि रूस के इस ताजा हमले में 11 साल और 14 साल के दो बच्चों की मौत हुई है। इस हमले के बाद कई इमारतें ध्वस्त हो गईं और सैकड़ों लोग बेघर हो गए। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इस हमले को “रूस की अमानवीय कार्रवाई” करार दिया और कहा कि यह युद्धविराम की किसी भी संभावना पर पानी फेरने वाला कदम है।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने भी इस हमले की निंदा की है। यूरोपीय संघ,ब्रिटेन और संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने रूस से संयम बरतने और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने से बचने की अपील की है।
कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बुडापेस्ट बैठक का रद्द होना रूस और अमेरिका के बीच पहले से जमे हुए रिश्तों को और ठंडा कर देगा। यह घटना ऐसे समय में हुई है,जब दुनिया यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की उम्मीद लगाए बैठी थी। अमेरिका और रूस दोनों के बीच संवाद टूटने का असर न केवल यूरोप की सुरक्षा पर पड़ेगा,बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है।
फिलहाल,क्रेमलिन ने भले ही पुतिन-ट्रंप बैठक की तत्काल आवश्यकता से इनकार किया हो,लेकिन अंतर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षक यह मानते हैं कि यदि यूक्रेन युद्ध पर कोई नया कूटनीतिक मोड़ आता है,तो दोनों नेताओं को किसी न किसी स्तर पर वार्ता की मेज पर लौटना ही पड़ेगा। पर अभी के लिए,दोनों देशों के बीच संवाद की राहें फिर से कठिन और अनिश्चित हो गई हैं और यूक्रेन की जमीं पर जारी जंग उस अनिश्चितता को और गहरा करती जा रही है।
