हिंदुजा ग्रुप के चेयरमैन गोपीचंद पी. हिंदुजा (तस्वीर क्रेडिट@AjayLalluINC)

ब्रिटेन के सबसे अमीर भारतीय मूल के उद्योगपति गोपीचंद हिंदुजा का निधन,85 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

नई दिल्ली,5 नवंबर (युआईटीवी)- भारतीय मूल के प्रख्यात उद्योगपति और हिंदुजा ग्रुप के चेयरमैन गोपीचंद पी. हिंदुजा का मंगलवार को निधन हो गया। 85 वर्षीय गोपीचंद लंबे समय से बीमार चल रहे थे और उन्होंने लंदन के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। गोपीचंद हिंदुजा को न केवल भारत में,बल्कि अंतर्राष्ट्रीय कारोबारी जगत में “जीपी” के नाम से जाना जाता था। वह हिंदुजा परिवार के चार भाइयों में दूसरे सबसे बड़े थे और दो वर्ष पहले अपने बड़े भाई श्रीचंद हिंदुजा के निधन के बाद समूह के चेयरमैन बने थे।

गोपीचंद हिंदुजा के निधन से वैश्विक व्यापार जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके नेतृत्व में हिंदुजा ग्रुप ने विश्व स्तर पर अपने कारोबार का विस्तार किया और उसे एक बहुआयामी उद्योग साम्राज्य के रूप में स्थापित किया। उनका परिवार वर्तमान में उनकी पत्नी,दो बेटे और एक बेटी से मिलकर बना है। गोपीचंद हिंदुजा को ब्रिटेन का सबसे अमीर व्यक्ति कहा जाता था। संडे टाइम्स रिच लिस्ट 2025 के अनुसार,हिंदुजा परिवार 32.3 बिलियन पाउंड्स की अनुमानित नेटवर्थ के साथ ब्रिटेन के सबसे धनी परिवारों की सूची में शीर्ष पर था।

हिंदुजा ग्रुप की स्थापना उनके पिता पी. डी. हिंदुजा ने सिंध (अब पाकिस्तान) में की थी,जिसे बाद में चारों भाइयों — श्रीचंद,गोपीचंद,प्रकाश और अशोक ने मिलकर एक अंतर्राष्ट्रीय समूह के रूप में विस्तार दिया। गोपीचंद हिंदुजा ने 1950 में फैमिली बिजनेस से जुड़कर कंपनी की गतिविधियों को एशिया से यूरोप और मध्य पूर्व तक फैलाया। उनके रणनीतिक निर्णयों ने कंपनी को ऑटोमोटिव,बैंकिंग एंड फाइनेंस,हेल्थकेयर,रियल एस्टेट,पावर,मीडिया,एंटरटेनमेंट और आईटी जैसे 11 प्रमुख सेक्टर्स में पैर पसारने का अवसर दिया।

गोपीचंद हिंदुजा की व्यावसायिक दृष्टि और प्रबंधन कौशल ने समूह की कई ऐतिहासिक उपलब्धियों की नींव रखी। उनके नेतृत्व में हिंदुजा ग्रुप ने अशोक लीलैंड और गल्फ ऑयल जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड्स का अधिग्रहण किया। विशेष रूप से,अशोक लीलैंड के अधिग्रहण के बाद समूह ने ऑटोमोटिव सेक्टर में एक नई पहचान बनाई और कंपनी को भारत के अग्रणी कमर्शियल वाहन निर्माताओं में शामिल किया। गोपीचंद की नीतियों ने न केवल कंपनी के लिए नई ऊँचाइयाँ तय कीं,बल्कि भारत के औद्योगिक विकास में भी अहम योगदान दिया।

गोपीचंद हिंदुजा ने अपनी शुरुआती शिक्षा मुंबई में प्राप्त की और जय हिंद कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने अपने पिता के साथ व्यापारिक रणनीतियों पर काम करना शुरू किया और धीरे-धीरे अंतर्राष्ट्रीय कारोबार की बारीकियों को समझा। उनका दृष्टिकोण हमेशा वैश्विक था,लेकिन दिल भारत के लिए धड़कता रहा। वे लंदन में रहते हुए भी भारत से जुड़ी सामाजिक पहलों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे।

समाजसेवा और परोपकार के क्षेत्र में भी गोपीचंद हिंदुजा का योगदान अविस्मरणीय रहा। उन्होंने हिंदुजा फाउंडेशन के माध्यम से शिक्षा,स्वास्थ्य,ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण के लिए अनेक कार्यक्रम शुरू किए। उनकी पहल पर कई स्कूलों और अस्पतालों की स्थापना हुई,जिससे हजारों लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिला। गोपीचंद का मानना था कि किसी भी सफल व्यवसायी का असली कर्तव्य समाज को कुछ लौटाना है। इसी सोच ने उन्हें भारतीय और ब्रिटिश दोनों समाजों में अत्यधिक सम्मान दिलाया।

गोपीचंद हिंदुजा का लंदन में व्यापारिक और सांस्कृतिक दोनों ही क्षेत्रों में गहरा प्रभाव था। उनके परिवार के पास ब्रिटेन में कई प्रमुख रियल एस्टेट संपत्तियाँ थीं,जिनमें रैफल्स लंदन होटल जैसी ऐतिहासिक इमारतें शामिल हैं। उन्होंने ब्रिटेन और भारत के बीच आर्थिक,व्यावसायिक और सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी नीतियों और प्रयासों ने दोनों देशों के बीच निवेश और व्यापार के नए अवसर पैदा किए।

व्यापार के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और मानवीय दृष्टिकोण ने उन्हें एक ऐसा व्यक्तित्व बनाया,जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी। गोपीचंद हिंदुजा को हमेशा एक दूरदर्शी नेता,समाजसेवी और भारतीय मूल्यों से जुड़े वैश्विक उद्योगपति के रूप में याद किया जाएगा। उनके निधन के बाद न केवल हिंदुजा परिवार,बल्कि पूरा उद्योग जगत शोक में डूबा हुआ है।

उनकी विरासत आज भी जीवित है — एक ऐसा साम्राज्य जो कड़ी मेहनत,ईमानदारी और दूरदर्शिता की मिसाल बनकर खड़ा है। हिंदुजा ग्रुप ने जिस वैश्विक प्रतिष्ठा को हासिल किया,वह गोपीचंद हिंदुजा के नेतृत्व और दृष्टिकोण की ही देन है। वे भले ही आज इस दुनिया में नहीं हैं,लेकिन उनकी सोच,उनके द्वारा बनाए गए संस्थान और उनके आदर्श आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देते रहेंगे।