नई दिल्ली,8 नवंबर (युआईटीवी)- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज से अफ्रीका के दो देशों – अंगोला और बोत्सवाना की छह दिवसीय राजकीय यात्रा पर रवाना हो रही हैं। यह दौरा 8 से 13 नवंबर तक चलेगा और इसे कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है,क्योंकि यह किसी भारतीय राष्ट्राध्यक्ष की इन दोनों देशों की पहली आधिकारिक यात्रा है। इस दौरे के माध्यम से भारत न केवल अफ्रीकी महाद्वीप के साथ अपने राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करेगा,बल्कि दक्षिणी अफ्रीका में अपनी रणनीतिक साझेदारी को भी नए आयाम देगा।
भारत के विदेश मंत्रालय ने इस यात्रा को लेकर कहा है कि यह दौरा भारत और अफ्रीका के बीच बहुआयामी सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। मंत्रालय के सचिव (आर्थिक संबंध) सुधाकर दलेला ने बताया कि राष्ट्रपति मुर्मू की यह यात्रा दोनों देशों के साथ भारत के दीर्घकालिक संबंधों को गहरा करने के उद्देश्य से की जा रही है। उन्होंने कहा, “भारत की अफ्रीका नीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2018 में निर्धारित 10 सिद्धांतों पर आधारित है,जो साझेदारी,आपसी सम्मान और सतत विकास पर केंद्रित हैं।”
राष्ट्रपति मुर्मू की यात्रा की शुरुआत अंगोला से होगी,जहाँ वह 8 से 11 नवंबर तक रहेंगी। अंगोला के राष्ट्रपति जोआओ लौरेंको ने उन्हें अपनी देश की 50वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। यह अवसर न केवल अंगोला के लिए,बल्कि भारत के लिए भी विशेष महत्व रखता है,क्योंकि दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना को इस वर्ष 40 वर्ष पूरे हो रहे हैं। 1985 में शुरू हुए इन संबंधों ने बीते चार दशकों में व्यापार,ऊर्जा,रक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में गहरी प्रगति की है।
अंगोला की राजधानी लुआंडा में राष्ट्रपति मुर्मू अपने समकक्ष राष्ट्रपति लौरेंको के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगी। इन वार्ताओं के दौरान ऊर्जा क्षेत्र में निवेश,फार्मास्यूटिकल्स,सूचना प्रौद्योगिकी,शिक्षा,रक्षा सहयोग और कृषि के क्षेत्रों में साझेदारी को विस्तार देने पर चर्चा होगी। इसके साथ ही राष्ट्रपति मुर्मू अंगोला की संसद को भी संबोधित करेंगी,जहाँ वह भारत और अफ्रीका के साझा मूल्यों — लोकतंत्र,विकास और वैश्विक दक्षिण की एकता पर प्रकाश डालेंगी।
राष्ट्रपति मुर्मू लुआंडा में प्रवासी भारतीय समुदाय से भी मुलाकात करेंगी। अफ्रीकी देशों में भारतीय समुदाय आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार,राष्ट्रपति प्रवासी भारतीयों को भारत की नई अफ्रीका नीति और वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका से अवगत कराएँगी। साथ ही,वह भारतीय निवेशकों और उद्यमियों को अफ्रीका में नए अवसरों को तलाशने के लिए प्रोत्साहित करेंगी।
अंगोला के बाद राष्ट्रपति मुर्मू 11 से 13 नवंबर तक बोत्सवाना की राजकीय यात्रा करेंगी। यह दौरा राष्ट्रपति ड्यूमा गिदोन बोको के निमंत्रण पर हो रहा है। बोत्सवाना दक्षिणी अफ्रीका का एक स्थिर और विकसित लोकतंत्र है,जिसके साथ भारत के संबंध दशकों पुराने हैं। दोनों देशों के बीच शिक्षा,स्वास्थ्य,ऊर्जा और रक्षा प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में घनिष्ठ सहयोग रहा है।
बोत्सवाना की राजधानी गबोरोन में राष्ट्रपति मुर्मू राष्ट्रीय सभा को संबोधित करेंगी और वहाँ के प्रमुख नेताओं और गणमान्य व्यक्तियों से मुलाकात करेंगी। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है,जिनमें प्रौद्योगिकी,डिजिटल नवाचार,फार्मास्यूटिकल्स,अक्षय ऊर्जा और कृषि के क्षेत्र शामिल हैं।
भारत और बोत्सवाना के बीच ‘प्रोजेक्ट चीता’ के तहत सहयोग विशेष चर्चा का विषय रहेगा। यह परियोजना वैश्विक स्तर पर जैव विविधता संरक्षण के लिए एक अनूठा प्रयास है,जिसके अंतर्गत बोत्सवाना से भारत में चीतों को पुनः बसाने का कार्य चल रहा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार,इस परियोजना से न केवल वन्यजीव संरक्षण को बल मिलेगा,बल्कि दोनों देशों के बीच पर्यावरणीय सहयोग की एक नई दिशा खुलेगी।
राष्ट्रपति मुर्मू का यह दौरा भारत की अफ्रीका नीति के व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अफ्रीका के साथ अपने संबंधों को अभूतपूर्व स्तर तक पहुँचाया है। वर्ष 2018 के बाद से भारत ने अफ्रीका में 17 नए राजनयिक मिशन खोले हैं,जिससे महाद्वीप में उसकी उपस्थिति और प्रभाव में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
भारत ने हमेशा अफ्रीका को अपनी विदेश नीति के केंद्र में रखा है। दोनों के बीच समान ऐतिहासिक अनुभव और विकास की आकांक्षाएँ हैं। उपनिवेशवाद के विरुद्ध संघर्ष,लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास और दक्षिण-दक्षिण सहयोग की भावना दोनों को जोड़ती है। भारत अफ्रीकी देशों के साथ विकास भागीदार के रूप में कार्य करता है,न कि दाता देश के रूप में। शिक्षा,स्वास्थ्य,आईटी,कृषि और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में भारत की सहायता अफ्रीकी देशों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हुई है।
राष्ट्रपति मुर्मू की यात्रा इस संबंध को और भी गहरा बनाने में मील का पत्थर साबित होगी। अफ्रीकी देशों के साथ भारत की साझेदारी न केवल आर्थिक दृष्टि से,बल्कि भू-राजनीतिक परिप्रेक्ष्य से भी महत्वपूर्ण है। पश्चिमी और एशियाई शक्तियों के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत एक विश्वसनीय और सहयोगी साझेदार के रूप में अपनी जगह मजबूत कर रहा है।
अंगोला और बोत्सवाना की यह यात्रा इसलिए भी खास है क्योंकि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह दौरा उनके कार्यकाल की अब तक की सबसे बड़ी बहुपक्षीय कूटनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। वह एक ऐसी नेता के रूप में उभरी हैं,जो विकास, समावेशिता और वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को सशक्त करने में विश्वास रखती हैं।
जब राष्ट्रपति मुर्मू लुआंडा और गबोरोन में भारतीय ध्वज के साथ कदम रखेंगी,तो यह न केवल दो देशों के बीच मित्रता का प्रतीक होगा,बल्कि यह भारत की उस नीति का प्रमाण भी होगा,जो समानता,सहयोग और साझा प्रगति पर आधारित है। यह यात्रा भारत-अफ्रीका संबंधों के एक नए अध्याय की शुरुआत करेगी,ऐसा अध्याय जो भविष्य में दोनों महाद्वीपों के बीच आर्थिक,सांस्कृतिक और राजनीतिक साझेदारी को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा।
