जोहान्सबर्ग,24 नवंबर (युआईटीवी)- दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में आयोजित जी20 समिट इस बार वैश्विक नेतृत्व के महत्वपूर्ण संवादों और रणनीतिक सहयोग की नई संभावनाओं का मंच बना। इसी क्रम में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा के साथ द्विपक्षीय बैठकों में व्यापक बातचीत की। दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से रविवार को जारी जानकारी के अनुसार,इन चर्चाओं ने आर्थिक साझेदारी से लेकर सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सुरक्षा सहयोग तक कई अहम मुद्दों पर प्रगति को दिशा दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात दक्षिण कोरिया के लिए एक अहम रणनीतिक अवसर मानी गई,क्योंकि भारत और दक्षिण कोरिया के बीच तेजी से बढ़ते सहयोग ने बीते वर्षों में एक मजबूत वैश्विक साझेदारी का रूप लिया है। बैठक में ली जे म्युंग ने भारत के साथ इकोनॉमी,कल्चर,सिक्योरिटी और पीपल-टू-पीपल कनेक्ट के क्षेत्रों में साझेदारी को और गहराई देने की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मौजूदा रिश्ते न केवल एशियाई क्षेत्र,बल्कि वैश्विक स्थिरता में भी योगदान दे सकते हैं।
इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने दक्षिण कोरिया की उन्नत शिपबिल्डिंग क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि यह उद्योग भारत के लिए भी भविष्य उन्मुख क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर खोलता है। उन्होंने विशेष रूप से इस क्षेत्र में एक छोटे समूह के कोऑपरेटिव फ्रेमवर्क बनाने के विचार का स्वागत किया,जो तकनीकी और औद्योगिक सहयोग को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके अलावा,पीएम मोदी ने डिफेंस इंडस्ट्री में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया,क्योंकि भारत और दक्षिण कोरिया पहले से ही रक्षा क्षेत्र में कई अहम प्रोजेक्ट्स पर साझेदारी कर चुके हैं।
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि दोनों नेता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,रक्षा उद्योग और उभरती तकनीकों सहित अनेक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए। उन्होंने वर्किंग-लेवल कंसल्टेशन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया,ताकि दोनों देशों के बीच संस्थागत संवाद और परियोजनाओं का तेजी से क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति ली जे म्युंग को भारत आने का आमंत्रण दिया,जिसे ली ने स्वीकार करते हुए कहा कि वे भारत के साथ अपने देश के द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक सशक्त करने के इच्छुक हैं। यह निमंत्रण भविष्य के उच्च स्तरीय संवादों और नई साझेदारियों की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा के साथ ली की मुलाकात भी व्यापक मुद्दों पर चर्चा के लिए महत्वपूर्ण रही। इस वार्ता में इकोनॉमी,कल्चर और सिक्योरिटी के क्षेत्र में दोनों देशों के सरकारी और निजी सेक्टरों के बीच सहयोग संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया। राष्ट्रपति ली ने कहा कि ब्राजील और दक्षिण कोरिया के बीच व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को मजबूती प्रदान कर सकते हैं। बातचीत में आर्थिक नीतियों,आय पुनर्वितरण और लोकतंत्र की भूमिका पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
जी20 समिट में राष्ट्रपति ली की सक्रियता यहीं तक सीमित नहीं रही। उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ भी अलग-अलग द्विपक्षीय वार्ताएँ कीं। इन बैठकों में वैश्विक सुरक्षा,ऊर्जा सहयोग,तकनीकी आदान-प्रदान और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
राष्ट्रपति ली ने साउथ अफ्रीका में रहने वाले कोरियाई नागरिकों के साथ एक बैठक भी की,जिसमें उन्होंने प्रवासी समुदाय की समस्याओं और चुनावी अधिकारों पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि विदेश में रहने वाले कोरियाई नागरिकों के मतदान अधिकारों को मजबूत करने के लिए उनकी सरकार विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही है। इस संदर्भ में उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम को एक संभावित समाधान बताया। ली ने उल्लेख किया कि दक्षिण अफ्रीका में करीब 4,000 कोरियाई नागरिक रहते हैं,जिनमें से कई लोगों को मतदान के लिए काफी लंबी दूरी तय करनी पड़ती है क्योंकि पोलिंग स्टेशन सीमित स्थानों पर मौजूद हैं। उन्होंने नागरिकों की इस परेशानी को कम करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग शुरू करने का विचार पेश किया,जिससे विदेशों में रहने वाले लोगों के लिए मतदान प्रक्रिया सरल और सुलभ हो सके।
जी20 समिट में राष्ट्रपति ली जे म्युंग की इन बहुपक्षीय और द्विपक्षीय बैठकों ने न केवल दक्षिण कोरिया की सक्रिय कूटनीतिक भूमिका को रेखांकित किया,बल्कि वैश्विक साझेदारी की दिशा में नए द्वार भी खोले। भारत,ब्राजील,फ्रांस और जर्मनी जैसे प्रमुख देशों के साथ उनकी ये बातचीत अंतर्राष्ट्रीय मंच पर दक्षिण कोरिया की बढ़ती भूमिका और उसके वैश्विक सहयोगों को नई ऊर्जा प्रदान करती हैं।

