अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और यूक्रेन राष्ट्रपति कार्यालय के प्रमुख एंड्री यरमक (तस्वीर क्रेडिट@Maks_NAFO_FELLA)

जिनेवा में अमेरिका-यूक्रेन वार्ता में प्रगति,रूस-यूक्रेन संघर्ष समाधान के 28 बिंदुओं पर आगे बढ़ा काम

जिनेवा,24 नवंबर (युआईटीवी)- जिनेवा में रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की दिशा में तैयार किए जा रहे 28 बिंदुओं वाले मसौदे पर अमेरिका और यूक्रेन के प्रतिनिधियों के बीच हुई महत्त्वपूर्ण बातचीत में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। लंबी चली चर्चाओं के बाद दोनों पक्षों ने संकेत दिए हैं कि वे कई अहम मुद्दों पर एक-दूसरे के काफी करीब पहुँच चुके हैं,हालाँकि अभी भी कुछ जटिल बिंदुओं पर और काम करने की आवश्यकता है। सिन्हुआ समाचार एजेंसी के मुताबिक,जिनेवा में यह बातचीत यूक्रेन और उसके प्रमुख यूरोपीय साझेदारों—ब्रिटेन,फ्रांस और जर्मनी के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के साथ हुई एक विस्तृत बैठक के बाद आगे बढ़ी,जिसके तुरंत बाद यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिकी टीम के साथ अलग से गहन चर्चा की।

यूक्रेन के राष्ट्रपति कार्यालय के प्रमुख एंड्री यरमक और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शाम को पत्रकारों को ब्रीफिंग देते हुए बताया कि बैठकें काफी उपयोगी,रचनात्मक और सार्थक रहीं। रुबियो ने अपनी टिप्पणी में बातचीत को अब तक की “सबसे उपयोगी और सार्थक” करार दिया। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने 28-बिंदुओं वाले मसौदे के हर महत्वपूर्ण मुद्दे पर क्रमबद्ध तरीके से चर्चा की और कई जटिल विषयों पर सकारात्मक प्रगति हासिल की है। रुबियो ने स्पष्ट किया कि टीमें अब उन सुझावों और विचारों की समीक्षा कर रही हैं,जो बैठक में सामने आए और शेष मतभेदों को कम करने की दिशा में काम जारी रहेगा।

हालाँकि,उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि मसौदे के कुछ बिंदु अभी भी ऐसे हैं,जिन पर पूर्ण सहमति बनने में कुछ और समय और प्रयास की जरूरत पड़ सकती है। फिर भी,रुबियो ने आत्मविश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि “अभी जो मुद्दे अटके हुए हैं,वे असुलझे नहीं हैं। इन्हें हल किया जा सकता है और हम उसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्ष एक ऐसे मसौदे के काफी करीब पहुँच चुके हैं,जिस पर राजनीतिक स्तर पर सहमति बनाई जा सके। अंतिम निर्णय अमेरिकी राष्ट्रपति और यूक्रेनी राष्ट्रपति व्लोदिमिर जेलेंस्की ही करेंगे,लेकिन मौजूदा स्थिति उत्साहजनक है।

यूक्रेन की ओर से एंड्री यरमक ने भी बातचीत को बेहद उत्पादक बताया। उन्होंने कहा कि न्यायपूर्ण और स्थायी शांति की स्थापना हेतु उठाए जा रहे कदमों में अच्छी प्रगति हुई है। यरमक ने टेलीग्राम पर अपने संदेश में लिखा कि “हमने बहुत अच्छी प्रग्रेस की है और अब एक सही,सुरक्षित और पक्की शांति की ओर बढ़ रहे हैं।” उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में प्रस्तावों पर और अधिक विस्तार से काम किया जाएगा और यूरोपीय साझेदारों से भी निरंतर सलाह-मशविरा जारी रहेगा।

इस बातचीत को विशेष रूप से अहम इसलिए माना जा रहा है क्योंकि रूस-यूक्रेन युद्ध को लगभग चार वर्ष पूरे होने के बावजूद संघर्ष विराम या स्थायी समाधान का कोई ठोस ढाँचा अभी तक तैयार नहीं हो पाया है। यूक्रेन की ओर से युद्ध के समाधान के लिए पहले भी कई बहुपक्षीय प्रयास किए गए हैं,जिनमें स्विट्जरलैंड में आयोजित शांति सम्मेलन समेत विभिन्न कूटनीतिक पहलें शामिल हैं,लेकिन रूस की अनुपस्थिति के कारण वे पूर्ण परिणाम नहीं दे सकीं। मौजूदा मसौदे में सुरक्षा,क्षेत्रीय अखंडता,युद्धबंदियों की रिहाई,खाद्य सुरक्षा,परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा और भविष्य में किसी भी सैन्य आक्रमण को रोकने के उपायों जैसे कई गंभीर मुद्दे शामिल हैं।

जिनेवा में हुई यह बातचीत इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इसमें न केवल अमेरिका और यूक्रेन की टीमें शामिल थीं,बल्कि यूरोप के प्रमुख देशों की सुरक्षा एजेंसियाँ भी अपने अलग चैनलों से मसौदे पर सलाह दे रही हैं। यह व्यापक सहभागिता इस बात का संकेत है कि पश्चिमी देश इस युद्ध को जल्द समाप्त करने के इच्छुक हैं और इसके लिए एक सर्वमान्य ढाँचा तैयार करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। हालाँकि,रूस की प्रतिक्रिया पर अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं है,लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यूक्रेन और उसके सहयोगी पहले एक संयुक्त और मजबूत शांति ढाँचा तैयार करना चाहते हैं,जिसे बाद में रूस के सामने प्रस्तुत किया जा सके।

बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने पत्रकारों के सवाल नहीं लिए और केवल संक्षिप्त बयान देकर यह कहा कि तकनीकी टीमें मसौदे पर शेष विषयों को अपडेट करने और आगे की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। इससे यह स्पष्ट है कि बातचीत अभी बहुत संवेदनशील चरण में है और किसी भी जल्दबाजी से बने माहौल पर असर पड़ सकता है।

जिनेवा की यह वार्ता रूस-यूक्रेन संघर्ष के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। भले ही अभी भी कई बिंदुओं पर और सहमति बनानी है,लेकिन यह प्रगति इस ओर संकेत करती है कि न्यायपूर्ण और स्थायी शांति का रास्ता अब पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट होता दिखाई दे रहा है।