भारतीय महिला ब्लाइंड क्रिकेट टीम ने पहली बार टी20 वर्ल्ड कप जीता (तस्वीर क्रेडिट@drramansingh)

भारतीय महिला ब्लाइंड क्रिकेट टीम ने रचा इतिहास: पहली बार टी20 वर्ल्ड कप जीती,नेपाल को फाइनल में 7 विकेट से हराया

कोलंबो,24 नवंबर (युआईटीवी)- भारतीय महिला ब्लाइंड क्रिकेट टीम ने इतिहास के पन्नों में अपनी अमिट छाप छोड़ते हुए पहला महिला टी20 वर्ल्ड कप फॉर द ब्लाइंड अपने नाम कर लिया। कोलंबो में खेले गए इस रोमांचक खिताबी मुकाबले में भारत ने नेपाल को 7 विकेट से शिकस्त दी और दुनिया के इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में अपना दबदबा दिखाया। यह जीत सिर्फ एक ट्रॉफी भर नहीं,बल्कि उन खिलाड़ियों के साहस,प्रतिबद्धता और अदम्य जज्बे की शानदार मिसाल है,जो प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद अपने खेल में नई ऊँचाइयों को छूने का सपना देखती हैं।

फाइनल मुकाबले में भारत ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का निर्णय लिया। भारतीय गेंदबाजों की बेहतरीन लाइन-लेंथ और सधी रणनीति ने नेपाली बल्लेबाजों को शुरुआत से ही दबाव में रखा। महज 2.2 ओवर में नेपाल ने अपना पहला विकेट खो दिया,जब कप्तान बिनीता पुन केवल 9 गेंदों में 5 रन बनाकर आउट हो गईं। यह शुरुआती झटका टीम को बैकफुट पर ले आया,लेकिन इसके बावजूद मीनाक्षी चौधरी और सुषमा तमांग ने धीरे-धीरे पारी को संभालने की कोशिश की। दोनों ने दूसरे विकेट के लिए 15 रन जोड़े,लेकिन भारतीय गेंदबाजों की सटीक गेंदबाजी ने ज्यादा साझेदारियाँ नहीं बनने दीं।

नेपाल की टीम 30 के कुल स्कोर तक पहुँचते -पहुँचते सुषमा के रूप में तीसरा विकेट भी गंवा बैठी। स्थिति चुनौतीपूर्ण होती जा रही थी,ऐसे में बिमला रानी और सरिता घिमिरे की जोड़ी ने टीम को स्थिरता प्रदान की। दोनों खिलाड़ियों ने परिस्थिति के अनुरूप खेलते हुए चौथे विकेट के लिए 65 रनों की महत्वपूर्ण साझेदारी की। इस साझेदारी ने नेपाल को सम्मानजनक स्कोर की ओर बढ़ाया और पारी को गति प्रदान की। बिमला ने 26 गेंदों में 26 रन बनाए,जबकि सरिता घिमिरे ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 38 गेंदों में नाबाद 35 रन बनाए और पारी को अंत तक संभाले रखा। भारत की ओर से बी1 श्रेणी की जमुना रानी टुडू और बी1 अनु कुमारी ने एक-एक विकेट हासिल किया।

नेपाल ने निर्धारित 20 ओवरों में 5 विकेट पर 114 रन बनाए,जो फाइनल मुकाबले के दबाव को देखते हुए एक चुनौतीपूर्ण स्कोर माना जा सकता था,लेकिन भारतीय बल्लेबाजों ने इस लक्ष्य को बेहद सहज अंदाज में हासिल करते हुए टीम को विश्व चैंपियन के ताज से नवाज दिया।

भारतीय पारी की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। महज 5 के स्कोर पर टीम ने बी2 कैटेगरी की अनेका देवी का विकेट गंवा दिया,जो केवल 2 रन बनाकर पवेलियन लौटीं। शुरुआती विकेट गिरने के बाद मैदान में उतरी बी1 करुणा ने कप्तान बी3 दीपिका के साथ मिलकर दूसरे विकेट के लिए 28 रनों की उपयोगी साझेदारी की। इस साझेदारी ने शुरुआती झटके की भरपाई की और पारी को संतुलन प्रदान किया। हालाँकि,दीपिका 6 रन बनाकर आउट हो गईं,लेकिन उनके आउट होने का टीम की रणनीति पर अधिक प्रभाव नहीं पड़ा क्योंकि करुणा आत्मविश्वास के साथ बल्लेबाजी करती रहीं।

करुणा का खेल पूरे मैच में सबसे आकर्षक में से एक रहा। उन्होंने परिस्थिति को भांपते हुए अटैक और डिफेंस का बेहतरीन संतुलन दिखाया। फुला सरेन के साथ उनकी 51 रनों की साझेदारी ने भारत को जीत की दहलीज तक पहुँचा दिया। करुणा ने 27 गेंदों में 42 रन बनाकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुँचा दिया। उनके आउट होने के बाद फुला सरेन ने बी2 बसंती हांसदा के साथ अटूट साझेदारी करते हुए मैच को जीत की मंजिल तक पहुँचाया।

फुला सरेन इस जीत की नायिका रहीं। उन्होंने केवल 27 गेंदों का सामना करते हुए नाबाद 44 रन बनाए,जिसमें 4 चौके शामिल थे। उनकी पारी ने भारत के लिए जीत को बेहद आसान बना दिया। बसंती हांसदा ने भी 13 रन बनाते हुए अहम योगदान दिया। नेपाल की ओर से केवल बी3 गेंदबाज दिल्लीसरा धमाला को एक विकेट मिला।

भारत ने 12.1 ओवरों में 115 रन बनाकर मैच को 7 विकेट से अपने नाम कर लिया। यह जीत टीम की एकजुटता,मानसिक मजबूती और खेल के प्रति अनोखी समझ का नतीजा थी।

यह टूर्नामेंट 11 नवंबर को नई दिल्ली में शुरू हुआ था और इसमें भारत,नेपाल, पाकिस्तान,श्रीलंका,ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त राज्य अमेरिका की टीमें शामिल थीं। इतने बड़े अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत का चैंपियन बनना विश्व क्रिकेट में उसकी बढ़ती प्रतिष्ठा को दर्शाता है। यह उपलब्धि खासतौर पर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ब्लाइंड क्रिकेट खिलाड़ियों के लिए संसाधन सीमित होते हैं,लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत और जुनून के दम पर विश्व क्रिकेट में भारत का परचम लहरा दिया।

भारतीय महिला ब्लाइंड क्रिकेट टीम की यह ऐतिहासिक जीत भविष्य की पीढ़ियों को प्रेरित करेगी और देश में दृष्टिबाधित खिलाड़ियों के लिए सपनों को पंख देने का काम करेगी। यह जीत केवल एक स्पोर्ट्स इवेंट की सफलता नहीं,बल्कि समावेशिता, साहस और समान अवसरों के लिए बढ़ते भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक है।