नई दिल्ली, 24 नवंबर (युआईटीवी)- पाकिस्तान एक बार फिर आतंक के साये में आ गया,जब रविवार सुबह पेशावर धमाकों की तेज आवाजों से कांप उठा। खैबर पख्तूनख्वा की राजधानी में स्थित पैरामिलिट्री फोर्स फ्रंटियर कांस्टेबुलरी (एफसी) के हेडक्वार्टर पर भीषण हमला हुआ,जिसकी पुष्टि पाकिस्तानी मीडिया समूह डॉन ने की है। यह हमला सुबह करीब 8 बजे सद्दार-कोहाट रोड पर हुआ,जो शहर के अत्यधिक भीड़भाड़ वाले इलाकों में से एक है और एक सैन्य कैंटोनमेंट के नजदीक है।
रिपोर्ट के अनुसार,हमलावरों ने सबसे पहले एफसी हेडक्वार्टर के मुख्य गेट पर आत्मघाती धमाका किया। इस शक्तिशाली विस्फोट के बाद अफरा-तफरी मच गई और तभी हमलावरों ने भवन में घुसने की कोशिश की। हालाँकि,सुरक्षाकर्मियों की त्वरित प्रतिक्रिया के चलते हमलावर अपनी योजना में सफल नहीं हो पाए और जवाबी कार्रवाई में ढेर कर दिए गए। इस आतंकी घटना में एफसी के तीन जवानों की मौत हो गई,जबकि दो अन्य घायल बताए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत इलाके को घेर लिया और भारी संख्या में पुलिस व क्विक रिस्पॉन्स यूनिट को तैनात कर दिया गया।
पेशावर के कैपिटल सिटी पुलिस ऑफिसर डॉ. मियां सईद अहमद ने मीडिया को बताया कि यह हमला फेडरल कांस्टेबुलरी के हेडक्वार्टर पर हुआ है। उन्होंने कहा, “हमलावरों ने एफसी हेडक्वार्टर पर हमला किया। हमारी टीमें सक्रिय रूप से जवाब दे रही हैं और पूरे इलाके को सील कर दिया गया है।” उन्होंने यह भी बताया कि हमले के बाद लगातार फायरिंग सुनाई दे रही थी,जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बना रहा।
सुरक्षा सूत्रों के अनुसार,आत्मघाती हमलावर ने एफसी के मुख्य गेट पर ही खुद को उड़ा लिया। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि आसपास के कई भवनों की खिड़कियाँ टूट गईं और कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। हमलावरों की संख्या को लेकर अभी भी स्पष्ट जानकारी नहीं है,लेकिन शुरुआती जाँच में यह माना जा रहा है कि 2 से 3 हमलावर शामिल थे,जिनका उद्देश्य हेडक्वार्टर के अंदर बड़ी तबाही मचाना था।
गौरतलब है कि जुलाई में पाकिस्तान सरकार ने सिविलियन पैरामिलिट्री फोर्स का नाम बदलकर फ्रंटियर कांस्टेबुलरी रखा था और इसका हेडक्वार्टर शहर के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में से एक में स्थित है। कड़ाई से सुरक्षित इस परिसर पर हमला होना पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पाकिस्तान में आतंकी गतिविधियों में हाल के महीनों में तेज़ी से इजाफा देखा गया है,खासकर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रदेशों में। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार,सितंबर में भी बनने जिले में एपीसी हेडक्वार्टर पर हमला किया गया था,जिसमें छह पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे और पाँच आतंकवादी ढेर हुए थे। यह घटनाएँ इस बात की ओर संकेत करती हैं कि आतंकवादी संगठन लगातार पाकिस्तान की सुरक्षा संस्थाओं को निशाना बना रहे हैं।
पेशावर पर यह हमला उस समय हुआ है,जब कुछ हफ्ते पहले ही इस्लामाबाद में एक बड़ा आत्मघाती हमला हुआ था,जिससे पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था की संवेदनशीलता और अधिक उजागर हो गई थी। नवंबर में इस्लामाबाद के जी-11 इलाके में जिला और सत्र न्यायालय के बाहर हुए आत्मघाती हमले में 12 लोगों की मौत हो गई थी और 27 लोग घायल हुए थे। यह हमला उस दिन हुआ जब अदालतों में भारी भीड़ रहती है,जिससे हताहतों की संख्या अधिक होने की आशंका और भी बढ़ गई थी।
इस्लामाबाद हमले के बाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इसे “वेक-अप कॉल” बताया था। उनकी टिप्पणी आज के पेशावर हमले के बाद एक बार फिर बेहद प्रासंगिक लगती है। आसिफ ने कहा था कि जो लोग यह सोचते हैं कि आतंकवाद केवल अफगान-पाकिस्तान सीमा या बलूचिस्तान के दूरदराज इलाकों तक सीमित है,उन्हें समझना चाहिए कि अब आतंक की यह आग देश के प्रमुख शहरी इलाकों को भी अपनी चपेट में ले रही है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि पाकिस्तान “युद्ध की स्थिति” में है और राष्ट्रीय सुरक्षा ढाँचे को अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
आज के पेशावर हमले ने एक बार फिर पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया है। हमले के तुरंत बाद पूरे शहर में अलर्ट जारी कर दिया गया और पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों ने चेकपोस्टों पर तलाशी बढ़ा दी है। सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह हमला केवल एक सैन्य प्रतिष्ठान पर आक्रमण नहीं,बल्कि पाकिस्तान की सुरक्षा संरचना के लिए जानी-बूझी हुई चुनौती है। इसके पीछे सक्रिय आतंकवादी समूहों की रणनीति देश में अस्थिरता फैलाना और सुरक्षा संस्थाओं के मनोबल को कमजोर करना है।
पाकिस्तानी सरकार की ओर से इस हमले की कड़ी निंदा की गई है और घायल सुरक्षा कर्मियों को सर्वोत्तम उपचार उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी पेशावर में सुरक्षा स्थिति की रिपोर्ट माँगी है और अधिकारियों से आतंकी नेटवर्क की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कदम उठाने को कहा है।
फिलहाल पूरे पेशावर शहर में तनाव का माहौल है। लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं और सुरक्षा बल इलाके में तलाशी अभियान चलाने में जुटे हुए हैं। यह हमला पाकिस्तान के लिए एक और संकेत है कि देश में आतंकवाद का खतरा लगातार बढ़ रहा है और इसे रोकने के लिए न केवल सैन्य बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर भी ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
पेशावर—जो कभी “शांति का शहर” कहलाता था,एक बार फिर आतंकवादी हिंसा के केंद्र में आ गया है। आज का यह हमला एक बार फिर याद दिलाता है कि पाकिस्तान अभी भी आतंकवाद की उस जटिल लड़ाई में फँसा हुआ है,जिसका कोई आसान अंत दिखाई नहीं देता।
