यरूशलम,24 नवंबर (युआईटीवी)- इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच जारी टकराव एक बार फिर नए मोड़ पर पहुँच गया है। रविवार को इजरायल ने दावा किया कि उसने लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी हिस्से दहिह में एक सटीक एयरस्ट्राइक कर हिज्बुल्लाह के सीनियर कमांडर हेथम अली तबातबाई को मार गिराया। यह इलाका हिज्बुल्लाह का घनी आबादी वाला और बेहद सुरक्षित गढ़ माना जाता है,जहाँ सैन्य गतिविधियों को लेकर इजरायल पहले भी लगातार खतरा जताता रहा है। इस हमले को कई विशेषज्ञ पिछले साल की लड़ाई के बाद हिज्बुल्लाह की लीडरशिप पर सबसे बड़ा झटका बता रहे हैं।
इजरायल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) ने बयान जारी कर बताया कि तबातबाई संगठन में असल चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में काम कर रहा था और उसकी रैंक हिज्बुल्लाह के सेक्रेटरी-जनरल नईम कासिम के ठीक नीचे आती थी। आईडीएफ के अनुसार,वह एक “लंबे समय से ऑपरेटिव और केंद्रीय सैन्य रणनीतिकार” था,जिसकी भूमिका युद्ध संचालन से लेकर क्रॉस-बॉर्डर एक्टिविटी तक बेहद महत्वपूर्ण थी। हालाँकि,हिज्बुल्लाह की ओर से इस हमले या तबातबाई की स्थिति पर अब तक कोई आधिकारिक टिप्पणी जारी नहीं की गई है।
दहिह वह इलाका है,जिसे इजरायल हिज्बुल्लाह की मिलिट्री प्लानिंग और ऑपरेशन्स का मुख्य केंद्र बताता रहा है। कई बार यह दावा भी किया गया कि यहाँ ग्रुप की कई सीक्रेट फैसिलिटीज मौजूद हैं। रिपोर्टों के अनुसार,तबातबाई 1980 के दशक से हिज्बुल्लाह से जुड़ा था और उसने संगठन के भीतर कई अहम जिम्मेदारियाँ संभाली थीं। जिन पोस्टों पर वह रहा,उनमें एलीट राडवान फोर्स की कमान,सीरिया में तैनात हिज्बुल्लाह यूनिट्स की निगरानी और इजरायल के खिलाफ ग्रुप के क्रॉस-बॉर्डर ऑपरेशन्स का संचालन शामिल रहा है।
माना जाता है कि संगठन के भीतर उसकी पकड़ अत्यंत मजबूत थी और इजरायली इंटेलिजेंस लंबे समय से उसे हिज्बुल्लाह के टॉप कमांडरों में गिनती रही थी। 2024 के इजरायल-हिज्बुल्लाह युद्ध के दौरान उसकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई थी,जब उसे ऑपरेशन्स डिवीजन का चीफ बनाया गया। इसके बाद वह युद्ध की बैटलफील्ड प्लानिंग और टैक्टिकल ऑपरेशन्स का केंद्रीय चेहरा बनकर उभरा। आईडीएफ का कहना है कि उसने लड़ाई के दौरान फोर्स डिप्लॉयमेंट की रणनीति बनाई,सिचुएशन असेसमेंट्स तैयार किए और कई बड़े कॉम्बैट आदेशों को निर्देशित किया।
खुफिया सूत्रों के अनुसार,संघर्ष के दौरान हिज्बुल्लाह के कई शीर्ष नेताओं के मारे जाने या घायल होने के बाद तबातबाई धीरे-धीरे ग्रुप के मिलिट्री ढाँचे का प्रमुख संचालक बन गया था। उसी पर इजरायल के खिलाफ हिज्बुल्लाह की कार्रवाइयों के अंतिम चरण में रणनीति तैयार करने और उसे लागू करवाने की जिम्मेदारी थी। इसके चलते इजरायल उसे युद्ध की कमान संभालने वाले सबसे महत्वपूर्ण कमांडर के रूप में देखता था।
इस स्ट्राइक ने पहले से तनावग्रस्त उत्तर-मध्य पूर्व क्षेत्र में चिंता और बढ़ा दी है। दहिह में किसी भी बड़े हिज्बुल्लाह नेता की मौत का असर सीधे लेबनान-इजरायल सीमा पर होने वाली मौजूदा झड़पों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि हिज्बुल्लाह इस हमले के जवाब में बड़ा कदम उठा सकता है,जिससे सीमा पर हिंसा और भड़कने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
इजरायल ने हालिया महीनों में कई ऐसे टारगेटेड ऑपरेशन्स किए हैं,जिनका लक्ष्य हिज्बुल्लाह की मिलिट्री लीडरशिप और उसके ऑपरेशनल ढाँचे को कमजोर करना रहा है। दूसरी ओर,हिज्बुल्लाह ने भी इजरायल की उत्तरी सीमा पर लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों को अंजाम दिया है,जिन्हें वह गाजा में चल रही गतिविधियों के खिलाफ “मुकाबला” बताता है। ऐसे में तबातबाई की मौत दोनों पक्षों के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है।
हालाँकि,हिज्बुल्लाह की चुप्पी यह संकेत देती है कि संगठन अभी अपनी प्रतिक्रिया तय कर रहा है,लेकिन उसके समर्थक क्षेत्रों में तनाव बढ़ने की खबरें हैं। दहिह जैसे अत्यधिक सुरक्षित क्षेत्र में इतना सटीक हमला संगठन के सुरक्षा जाल की बड़ी विफलता मानी जा रही है। यह घटना आने वाले दिनों में लेबनान की राजनीतिक स्थिरता और सुरक्षा स्थिति पर भी असर डाल सकती है।
हेथम अली तबातबाई की मौत इजरायल-हिज्बुल्लाह संघर्ष को एक नई दिशा दे सकती है। अब नज़र इस पर रहेगी कि हिज्बुल्लाह इसका जवाब किस तरह देता है और क्षेत्र में पहले से मौजूद अस्थिरता किस हद तक और गहराती है।
