अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

व्हाइट हाउस के पास गोलीबारी को ट्रंप ने बताया ‘आतंकवादी कृत्य’, 500 और सैनिकों की तैनाती का आदेश

वाशिंगटन,27 नवंबर (युआईटीवी)- अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डी.सी. में व्हाइट हाउस के पास हुई ताज़ा गोलीबारी की घटना ने पूरे देश में सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। इस भीषण हमले में दो नेशनल गार्ड्समैन गंभीर रूप से घायल हो गए,जिन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले को खुलकर “आतंकवादी कृत्य” करार दिया है और इसके बाद वाशिंगटन में सुरक्षा और अधिक कड़ी करने के लिए 500 अतिरिक्त सैनिक भेजने का आदेश जारी किया है।

गोलीबारी बुधवार शाम हुई थी और यह व्हाइट हाउस से मात्र 500 मीटर की दूरी पर थी,जो राजधानी के सबसे सुरक्षित इलाकों में से एक माना जाता है। इस हमले ने सुरक्षा एजेंसियों को झकझोर दिया है और पूरे घटनाक्रम की फेडरल स्तर पर जाँच शुरू कर दी गई है। अमेरिकी मीडिया के अनुसार संदिग्ध हमलावर की पहचान रहमानुल्लाह लकनवाल के रूप में की गई है,जो अफगानिस्तान का नागरिक है और वर्ष 2021 में अमेरिका आया था।

राष्ट्रपति ट्रंप ने देश को संबोधित करते हुए कहा कि यह हमला सिर्फ दो सैनिकों पर नहीं था,बल्कि पूरे राष्ट्र पर किया गया एक “घिनौना और नफरत से भरा अपराध” है। उन्होंने कहा कि इस कृत्य को किसी भी रूप में सामान्य नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह “बुराई,आतंक और मानवता के खिलाफ की गई हिंसा” है। ट्रंप ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि इस तरह के कृत्यों के लिए जिम्मेदार लोगों और उनके पीछे खड़े सभी नेटवर्क्स पर सरकार बहुत सख्ती से कार्रवाई करेगी।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ट्रंप ने अफगान नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश को लेकर बाइडेन प्रशासन की नीतियों पर भी सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि यह हमला उसी नीतिगत गलती का परिणाम है,जिसके चलते अफगानिस्तान से आए हजारों लोगों को बिना पर्याप्त जाँच के अमेरिका में प्रवेश मिल गया। उन्होंने कहा, “जिस व्यक्ति ने यह हमला किया,वह अफगानिस्तान जैसे नरक से हमारे देश में आया। पिछली सरकार ने उसे यहाँ आने दिया। यह हमारे देश के लिए एक बड़ी गलती थी और अब हमें इसकी कीमत चुका रहे हैं।”

इसके साथ ही ट्रंप ने घोषणा की कि सरकार अफगानिस्तान से आए हर नागरिक की फिर से गहन जाँच करेगी। उन्होंने संकेत दिया कि यह पुनः मूल्यांकन सिर्फ अफगान नागरिकों तक ही सीमित नहीं रहेगा,बल्कि उन सभी देशों पर लागू होगा जहाँ से अमेरिका सुरक्षा खतरे महसूस करता है। ट्रंप ने कहा, “अगर कोई व्यक्ति इस देश के प्रति वफादार नहीं है,इस देश से प्यार नहीं कर सकता या यहाँ के नियमों का सम्मान नहीं करता,तो हम उसे यहाँ नहीं चाहते। हमारे देश की सुरक्षा सर्वोच्च है और इसके लिए हर जरूरी कदम उठाए जाएँगे।”

वर्तमान में वाशिंगटन डी.सी. में लगभग 2,400 नेशनल गार्ड तैनात हैं,जिनमें लगभग 958 सैनिक डीसी नेशनल गार्ड से और 1,300 अन्य आठ राज्यों से भेजे गए कर्मी शामिल हैं। इस घटना के बाद बढ़ी चिंताओं को देखते हुए ट्रंप ने अतिरिक्त 500 सैनिकों की तैनाती की घोषणा की। यह कदम राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने के लिए उठाया गया है,ताकि किसी भी संभावित खतरे को पहले ही निष्क्रिय किया जा सके।

घायल दोनों नेशनल गार्ड्समैन की हालत गंभीर बनी हुई है। वे पश्चिमी वर्जीनिया से वाशिंगटन में तैनात थे और गोलीबारी के समय क्षेत्र में सक्रिय सुरक्षा पेट्रोल पर थे। हिंसा इतनी अचानक हुई कि सुरक्षा कर्मियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। हमलावर को मौके पर ही काबू में कर लिया गया और फिलहाल वह गंभीर अवस्था में हिरासत में है। उसकी हालत स्थिर होने पर उससे पूछताछ शुरू की जाएगी।

राष्ट्रपति ट्रंप ने हमले के लगभग एक घंटे पहले ही अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर संकेत दिया था कि वे इस विषय पर राष्ट्र को संबोधित करेंगे। उन्होंने लिखा था, “मैं ठीक रात 9:15 बजे हमारे महान नेशनल गार्ड योद्धाओं पर हुए भयानक हमले के बारे में बोलूँगा। इस मामले पर ध्यान देने के लिए आपका धन्यवाद। भगवान अमेरिका को आशीर्वाद दें!” उनका यह संदेश तुरंत पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया।

घटना के बाद वॉशिंगटन शहर में सुरक्षा को बेहद सख्त कर दिया गया है। व्हाइट हाउस के आसपास अतिरिक्त बैरिकेड्स लगाए गए हैं और पुलिस तथा फेडरल एजेंसियों की संयुक्त टीमें पूरे इलाके में तलाशी अभियान चला रही हैं। राजधानी में तनाव का माहौल है और नागरिकों को सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

इस हमले ने अमेरिका की इमिग्रेशन नीतियों और सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर व्यापक चर्चा शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले के राजनीतिक प्रभाव भी देखने को मिल सकते हैं क्योंकि यह मुद्दा सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रवासी नीतियों से जुड़ा हुआ है। वहीं,फेडरल एजेंसियों का कहना है कि वे इस हमले को एक अलग घटना नहीं मान रहे,बल्कि इसे बड़े सुरक्षा संकेत के रूप में देख रहे हैं।

अभी जाँच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़ी और भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आने की उम्मीद की जा रही है। फिलहाल राष्ट्र की नजरें घायल सैनिकों की सेहत और सरकार की आगे की कार्रवाइयों पर टिकी हुई हैं।