उज्बेकिस्तान के उभरते शतरंज सितारे जावोखिर सिंडारोव (तस्वीर क्रेडिट@GMJSindarov)

फिडे वर्ल्ड कप 2025: जावोखिर सिंडारोव बने विश्व कप जीतने वाले सबसे युवा चेस चैंपियन,रोमांचक फाइनल में वेई यी को दी मात

पणजी,27 नवंबर (युआईटीवी)- उज्बेकिस्तान के उभरते शतरंज सितारे जावोखिर सिंडारोव ने इतिहास रच दिया है। 18 वर्षीय इस युवा ग्रैंडमास्टर ने बुधवार को गोवा में खेले गए नर्व-रैकिंग रैपिड टाईब्रेक फाइनल में चीन के दिग्गज खिलाड़ी वेई यी को हराकर फिडे चेस वर्ल्ड कप 2025 का खिताब अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ वे चेस वर्ल्ड कप जीतने वाले अब तक के सबसे युवा खिलाड़ी बन गए हैं। यह उपलब्धि शतरंज जगत में नई पीढ़ी के उभार का प्रतीक बनकर सामने आई है,जिसमें लगातार युवा खिलाड़ी स्थापित दिग्गजों को पछाड़ते दिखाई दे रहे हैं।

8 दिसंबर 2005 को जन्मे सिंडारोव ने टूर्नामेंट की शुरुआत 16वीं सीड के रूप में की थी,इसलिए उनके खिताब तक पहुँचने की उम्मीदें सीमित थीं,लेकिन पूरे वर्ल्ड कप के दौरान उन्होंने जिस अद्भुत धैर्य,रणनीति और परिपक्वता का प्रदर्शन किया,उसने उन्हें सभी बाधाओं को पार करने में मदद की। यह प्रतियोगिता वैसे भी उलटफेरों के लिए याद की जा रही है,क्योंकि चैंपियनशिप के नॉकआउट चरण में कई शीर्ष खिलाड़ी बाहर हो गए थे। ऐसे माहौल में सिंडारोव का दबदबा और भी प्रभावी हो जाता है।

फाइनल में पहुँचने के लिए सिंडारोव ने सेमीफाइनल में अपने ही देश के शीर्ष खिलाड़ी और करीबी प्रतिद्वंदी नोडिर्बेक याकुब्बोएव को मात दी। वहीं चीन के वेई यी ने रूस के आंद्रेई एसिपेंको को हराकर फाइनल में प्रवेश किया। वेई यी का अनुभव,उनकी रेटिंग और बड़े टूर्नामेंट में उनका रिकॉर्ड देखते हुए उन्हें फाइनल का फेवरिट माना जा रहा था,लेकिन सिंडारोव ने सबको चौंका दिया।


फाइनल के पहले दिन खेले गए मैच में वेई यी ने पेट्रोव डिफेंस का इस्तेमाल किया। यह ओपनिंग सिंडारोव की रणनीति को काफी हद तक चुनौती देती है। सफेद मोहरों से खेलते हुए सिंडारोव लगातार जीत के मौके तलाशते रहे,लेकिन वेई यी की मजबूत रक्षा ने उन्हें खुलकर हमला करने का मौका नहीं दिया। मैच एंडगेम तक पहुँचा,जहाँ वेई यी थोड़े से बढ़त वाले बिशप-पॉन एंडगेम में आए। यह एक ऐसा मोड़ था,जहाँ सिंडारोव के लिए गलती की कोई गुंजाइश नहीं थी,लेकिन उन्होंने दबाव में भी धैर्य नहीं खोया और हर चाल का सटीक आकलन किया। 50 चालों की कठिन लड़ाई के बाद दोनों खिलाड़ियों ने ड्रॉ पर सहमति जताई,जिससे मुकाबला रोमांचक टाईब्रेक तक पहुँच गया।

बुधवार को जब रैपिड टाईब्रेक शुरू हुए,तो दोनों खिलाड़ियों ने आक्रामक शुरुआत की। पहला 15’ + 10” का टाईब्रेक बराबरी पर समाप्त हुआ,लेकिन दूसरे रैपिड गेम में सिंडारोव पूरी तरह छा गए। उन्होंने शुरुआत से ही आक्रामक और स्पष्ट रणनीति अपनाई। केंद्र पर मजबूत पकड़ बनाई और वेई यी को लगातार डिफेंस में धकेलते रहे। वेई यी दबाव में थोड़ा जल्दबाजी दिखाते नजर आए,जिसका सिंडारोव ने फायदा उठाया। उनकी गणना तेज थी,चालें सटीक थीं और योजनाएँ स्पष्ट। अंततः उन्होंने वेई यी को मात देकर न केवल मुकाबला,बल्कि अपने करियर का सबसे बड़ा टाइटल जीत लिया।

इस जीत के साथ सिंडारोव ने 2026 कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के लिए भी क्वालीफाई कर लिया है,जहाँ वे विश्व चैंपियनशिप के लिए चुनौती पेश करने वाले खिलाड़ियों की सूची में शामिल होंगे। विजेता के रूप में उन्हें 1,20,000 डॉलर की इनामी राशि भी मिली,जो उनके करियर को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाएगी।

सिंडारोव की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि पिछले एक वर्ष से भी कम समय में यह तीसरे टीनएजर हैं,जिन्होंने कोई बड़ा विश्व स्तर का शतरंज खिताब जीता है। इससे पहले डी. गुकेश ने विश्व चैंपियनशिप खिताब जीतकर बड़ा इतिहास रचा था और दिव्या देशमुख ने भी अपने अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शन से सबको प्रभावित किया था। सिंडारोव की जीत इस श्रृंखला को आगे बढ़ाती है और शतरंज की दुनिया में नई पीढ़ी की क्रांति को और मजबूत करती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सिंडारोव आने वाले वर्षों में विश्व चैंपियनशिप के दावेदार बन सकते हैं। उनमें खेल की गहरी समझ,एंडगेम की उत्कृष्ट तकनीक और दबाव में भी शांत रहने की खास क्षमता है। वेई यी जैसे खिलाड़ी को हराना आसान नहीं होता,लेकिन सिंडारोव ने यह साबित कर दिया कि वह किसी भी परिस्थिति में बड़े खिलाड़ियों को चुनौती देने की ताकत रखते हैं।

गोवा में हुआ यह फाइनल लंबे समय तक शतरंज प्रशंसकों की यादों में रहेगा। यह सिर्फ एक मुकाबला नहीं था,बल्कि नए चैंपियन के उदय का प्रतीक बन गया। जावोखिर सिंडारोव ने दुनिया को दिखा दिया कि उम्र सिर्फ एक संख्या है। खिताब और इतिहास उन लोगों के होते हैं,जिनमें जीतने की ललक,धैर्य और निरंतरता होती है।