नई दिल्ली,27 नवंबर (युआईटीवी)- भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) आधार डेटा को अधिक सुरक्षित,सटीक और अद्यतन बनाए रखने के अपने बड़े मिशन के तहत राष्ट्रव्यापी सफाई अभियान को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय की ओर से बुधवार को साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार,प्राधिकरण ने अब तक 2 करोड़ से अधिक मृत व्यक्तियों के आधार नंबरों को डिएक्टिवेट कर दिया है। यह कदम आधार प्रणाली में बढ़ती सुरक्षा आवश्यकताओं और डेटा शुद्धता के प्रति सरकार की गंभीरता को दर्शाता है।
मंत्रालय के बयान के मुताबिक,आधार नंबर एक व्यक्ति को जीवनभर के लिए दिया जाता है और इसे कभी भी किसी अन्य व्यक्ति को पुनः असाइन नहीं किया जाता। इसलिए,किसी व्यक्ति के निधन के बाद उसका आधार नंबर सक्रिय रहने पर अनधिकृत गतिविधियों या पहचान से जुड़ी धोखाधड़ी का खतरा बना रहता है। यही कारण है कि मृत आधार धारक के रिकॉर्ड को समय पर निष्क्रिय करना बेहद आवश्यक है। सरकार के इस कदम का उद्देश्य मृत व्यक्तियों की पहचान के दुरुपयोग को रोकना और आधार डेटा की विश्वसनीयता को और मजबूत करना है।
इस अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए यूआईडीएआई ने इस वर्ष की शुरुआत में एक नई सुविधा भी शुरू की है। इस नई सर्विस के तहत मृत आधार कार्ड धारक की जानकारी उसके परिवार के सदस्य द्वारा ऑनलाइन दर्ज कराई जा सकती है। यह सुविधा वर्तमान में उन 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उपलब्ध है,जो सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (सीआरएस) का उपयोग करते हैं। इस प्रणाली के माध्यम से परिवार के सदस्य अपने दिवंगत परिजन की मृत्यु का विवरण सीधे मायआधार पोर्टल पर रिपोर्ट कर सकते हैं।
यूआईडीएआई ने बताया कि शेष राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए मायआधार पोर्टल के साथ इंटीग्रेशन की प्रक्रिया पर काम जारी है। जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी होगी,पूरे देश में यह सुविधा उपलब्ध हो जाएगी।
डिजिटल माध्यम से जानकारी देने की यह सुविधा पूरी तरह सरल,सुरक्षित और उपयोगकर्ता-हितैषी है। परिवार के सदस्य को सबसे पहले पोर्टल पर अपनी पहचान का प्रमाणीकरण कराना होता है। इसके बाद वह मृत व्यक्ति का आधार नंबर,डेथ रजिस्ट्रेशन नंबर और अन्य डेमोग्राफिक विवरण पोर्टल पर सबमिट कर सकते हैं। संबंधित दस्तावेजों और प्रस्तुत जानकारी के सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद यूआईडीएआई मृत व्यक्ति का आधार नंबर डिएक्टिवेट कर देता है। यह प्रक्रिया न केवल डिजिटल रिकॉर्ड्स की सटीकता बढ़ाती है,बल्कि मृतक की पहचान से जुड़े किसी भी संभावित दुरुपयोग को भी रोकती है।
मंत्रालय और यूआईडीएआई लगातार नागरिकों से अपील कर रहे हैं कि वे अपने परिवार में किसी भी व्यक्ति के निधन की स्थिति में मायआधार पोर्टल का उपयोग कर इसकी सूचना दें। डेथ सर्टिफिकेट प्राप्त होने के बाद यह जानकारी जमा कराना आसान होता है और परिजन कुछ ही मिनटों में प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। परिवार द्वारा यह जानकारी उपलब्ध कराने से न केवल रिकॉर्ड सही होते हैं,बल्कि देश के पहचान प्रबंधन तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ती है।
इस राष्ट्रव्यापी अभियान के सकारात्मक प्रभाव दिखने लगे हैं। यूआईडीएआई द्वारा डिएक्टिवेट किए गए 2 करोड़ से अधिक आधार नंबर यह दर्शाते हैं कि केवाईसी, बैंकिंग,सब्सिडी वितरण और अन्य डिजिटल सेवाओं में किसी भी गलत या संदिग्ध गतिविधि की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। आधार प्रणाली पर देश की बड़ी आबादी निर्भर है और ऐसे में डेटा की सत्यता सुनिश्चित करना बेहद महत्वपूर्ण है।
डिजिटल इंडिया की दिशा में सरकार की यह पहल यह संकेत देती है कि पहचान और सत्यापन से जुड़े सिस्टम को और अधिक मजबूत,सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं। यूआईडीएआई का यह कदम एक ऐसे डिजिटल भविष्य की ओर इशारा करता है,जहाँ प्रत्येक नागरिक की पहचान सुरक्षित होगी और किसी भी प्रकार की गलत गतिविधि की संभावना न्यूनतम होगी। मृत व्यक्तियों के आधार नंबरों का समय पर निष्क्रिय होना डिजिटल गवर्नेंस को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा और सार्थक कदम है,जिससे न सिर्फ देश की पहचान प्रणाली अधिक विश्वसनीय बनेगी,बल्कि नागरिकों का भरोसा भी मजबूत होगा।

