नई दिल्ली,28 नवंबर (युआईटीवी)- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गुरुवार को अपने गृह राज्य ओडिशा के विशेष दौरे पर थीं,जहाँ उन्होंने ओडिशा विधानसभा के सदस्यों को संबोधित किया। यह अवसर न केवल ओडिशा के लिए गर्व का पल था,बल्कि देश के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण क्षण रहा। राष्ट्रपति मुर्मू का यह संबोधन उनके राजनीतिक और सामाजिक सफर का एक ऐतिहासिक पड़ाव साबित हुआ,क्योंकि वह 25 वर्ष पहले इसी ओडिशा विधानसभा से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कर चुकी हैं। आज,देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन होकर उसी सदन को संबोधित करते हुए उन्होंने ओडिशा के विकास और भारत की प्रगति की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश दिए।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि वर्ष 2036 ओडिशा के गठन की सौवीं वर्षगांठ होगी। यह राज्य के लिए अत्यंत गौरवशाली और ऐतिहासिक क्षण होगा और इस अवसर पर ओडिशा को एक खुशहाल,सक्षम और प्रगतिशील प्रदेश के रूप में स्थापित करना सभी हितधारकों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि ओडिशा आने वाले वर्षों में अपनी पूर्ण संभावनाओं के साथ विकसित होता है,तो यह 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान देगा। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि ओडिशा के लोगों को अपने विधायकों से बहुत अपेक्षाएँ हैं और सभी जनप्रतिनिधियों को नागरिकों की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए। उनका दायित्व है कि वे जनता के चेहरों पर मुस्कान लाने के लिए जिम्मेदारी,ईमानदारी और विकास की भावना के साथ कार्य करें।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में ओडिशा की असाधारण सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राज्य की बहुरंगी परंपराएँ, विविध संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत देश की एकता और सामूहिकता की अनूठी मिसाल हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि ओडिशा ने भारत के इतिहास में कई बार नेतृत्व की भूमिका निभाई है और आज भी यह राज्य अपने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल कर रहा है।
विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए उन्हें “ओडिशा की बेटी” कहा और गर्व व्यक्त किया कि राज्य से आने वाली महिला आज देश की राष्ट्रपति के रूप में राष्ट्र का नेतृत्व कर रही है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि यह पूरे ओडिशा और इसके लोगों के लिए अत्यंत सम्मान की बात है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विधानसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह क्षण केवल गौरव का ही नहीं,बल्कि प्रेरणा का भी है,क्योंकि यही वह सदन है,जहाँ से राष्ट्रपति मुर्मू ने अपनी राजनीतिक यात्रा आरंभ की थी। पटनायक ने कहा कि अपने सरल,समर्पित और संघर्षपूर्ण जीवन के साथ राष्ट्रपति मुर्मू ने ओडिशा का नाम रोशन किया है और आज उनका इस सदन में वापस आना राज्य के लिए गौरव का विषय है।
President Droupadi Murmu addressed the members of the Odisha Legislative Assembly at Bhubaneswar. The President said that the centenary of Odisha’s formation will be celebrated in 2036. If all stakeholders can work together to build a prosperous Odisha by 2036, it will be… pic.twitter.com/TXHDMq99DS
— President of India (@rashtrapatibhvn) November 27, 2025
नवीन पटनायक ने अपने संबोधन में भारतीय लोकतंत्र की विशेषता “अनेकता में एकता” को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। विभिन्न भाषाएँ,जीवनशैली,संस्कृतियाँ,परंपराएँ और विचार देश को मजबूत बनाते हैं और राजनीतिक स्थिरता और राष्ट्रीय एकता को सुनिश्चित करते हैं। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश में रियासतों के एकीकरण का चुनौतीपूर्ण कार्य हुआ था और इस कार्य में ओडिशा ने सबसे पहले उदाहरण प्रस्तुत किया था। उन्होंने बताया कि 14 नवंबर 1947 को नीलगिरी सहित कई रियासतों का ओडिशा में विलय हुआ,जिससे यह राज्य भारत के राजनीतिक एकीकरण की प्रक्रिया का अग्रणी बना।
इस अवसर पर नवीन पटनायक ने उत्कल गौरव मधुसूदन दास के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि मधुसूदन दास ने भारत में पहली बार भाषा के आधार पर एक प्रांत के गठन की अवधारणा को साकार किया। उन्होंने अन्य नेताओं के साथ मिलकर संवैधानिक दायरे में रहते हुए ओडिशा को एक अलग प्रांत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह उपलब्धि न केवल ओडिशा के लिए महत्वपूर्ण थी,बल्कि भारतीय उपमहाद्वीप में भाषाई आधार पर राज्यों के गठन की दिशा में भी यह बड़ी उपलब्धि थी।
नवीन पटनायक ने कहा कि राष्ट्रपति के रूप में द्रौपदी मुर्मू भारत के संविधान को सुरक्षित रखने,संरक्षित करने और उसकी रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। संविधान की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में उनका योगदान और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा को बचाने के लिए देश उनके नेतृत्व की ओर आशा और विश्वास के साथ देखता है।
नवीन पटनायक ने आगे कहा कि ओडिशा ने पिछले दो दशकों में विकास के अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किया है। आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में ओडिशा ने विश्व स्तर पर अपनी अलग पहचान स्थापित की है। वर्ष 1999 के सुपर साइक्लोन के बाद राज्य ने आपदा प्रबंधन में ऐसा मॉडल खड़ा किया है,जिसकी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा की जाती है। इसके अलावा खाद्य सुरक्षा,महिला सशक्तिकरण,गरीबी उन्मूलन,बुनियादी ढाँचा विकास,स्वास्थ्य और शिक्षा, और औद्योगिक प्रगति के क्षेत्रों में ओडिशा ने कई मील के पत्थर स्थापित किए हैं। नवीन पटनायक ने इस विकास यात्रा का श्रेय ओडिशा के मेहनती,सहयोगी और संवेदनशील लोगों को दिया,जिनके प्रयासों और समर्थन से यह राज्य आज देश के सबसे तेजी से विकसित होने वाले प्रदेशों में शामिल है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का ओडिशा विधानसभा में संबोधन राज्य की राजनीति,समाज और विकास यात्रा के लिए एक नई प्रेरणा लेकर आया है। उनका संदेश यह याद दिलाता है कि जब जनता और जनप्रतिनिधि मिलकर काम करें,तो किसी भी प्रदेश को आदर्श विकास मॉडल के रूप में स्थापित किया जा सकता है। ओडिशा की सौवीं वर्षगांठ से पहले राज्य को खुशहाल और सक्षम बनाने का लक्ष्य केवल राजनीतिक एजेंडा नहीं है,बल्कि यह प्रत्येक नागरिक का सामूहिक संकल्प होना चाहिए।

