नई दिल्ली,30 दिसंबर (युआईटीवी)- भारत के तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन बाजार में 2025 कई मायनों में निर्णायक साबित हो रहा है। जिस ओला इलेक्ट्रिक ने कुछ ही वर्षों में इस सेगमेंट में मजबूत पकड़ बना ली थी,वही अब अपनी स्थिति बनाए रखने के लिए संघर्ष करती दिखाई दे रही है। सरकारी वाहन पोर्टल के ताजा आँकड़ों के अनुसार,ओला इलेक्ट्रिक की बाजार हिस्सेदारी में इस साल भारी गिरावट दर्ज की गई है। 2024 में जहाँ कंपनी का मार्केट शेयर 36.7 प्रतिशत था,वहीं 2025 में यह घटकर केवल 16.1 प्रतिशत रह गया। यह गिरावट लगभग 50 प्रतिशत के नुकसान को दर्शाती है,जो कंपनी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
ओला इलेक्ट्रिक ने 2025 में कुल 1,96,767 वाहनों की बिक्री की। दिखने में यह संख्या भले ही कम न लगे,लेकिन बढ़ती प्रतिस्पर्धा और बाजार में अन्य कंपनियों के प्रदर्शन को देखते हुए यह आँकड़ा कंपनी की कमजोर स्थिति की ओर इशारा करता है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी की यह गिरावट केवल बिक्री तक सीमित नहीं है,बल्कि इसके पीछे कई संरचनात्मक और परिचालन चुनौतियाँ भी जिम्मेदार हैं।
ग्राहकों के बीच सबसे अधिक शिकायतें वाहन की आफ्टर-सेल्स सर्विस और प्रोडक्ट क्वालिटी को लेकर रही हैं। डिलीवरी के बाद सर्विस केंद्रों तक आसानी से पहुँच न होना,स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता में देरी और तकनीकी खराबियों के मामलों में त्वरित समाधान न मिल पाना — ये सभी वजहें धीरे-धीरे ग्राहकों के भरोसे को कमजोर करती चली गईं। इलेक्ट्रिक वाहन जैसे उभरते क्षेत्र में भरोसा ही सबसे बड़ी पूँजी होता है और ओला इलेक्ट्रिक इस मोर्चे पर पिछड़ती दिखाई दी।
वित्तीय रूप से भी कंपनी पर दबाव बढ़ा है। वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में ओला इलेक्ट्रिक का कंसोलिडेटेड नुकसान 418 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। इसी अवधि में कंपनी की कुल आय में भी 43 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह घटकर 690 करोड़ रुपये रह गई,जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में आय 1,214 करोड़ रुपये थी। कंपनी ने अपनी एक्सचेंज फाइलिंग में स्वीकार किया कि ऑटो सेगमेंट में वह पहली तिमाही के गाइडेंस के मुकाबले कम वॉल्यूम की उम्मीद कर रही है,क्योंकि अत्यधिक प्रतिस्पर्धी बाजार में वह मार्जिन और नकद अनुशासन पर ज्यादा ध्यान दे रही है।
इस वित्तीय दबाव का असर शेयर बाजार में भी साफ दिखाई दिया। ओला इलेक्ट्रिक के शेयर में लगातार गिरावट जारी है। पिछले एक महीने में शेयर लगभग 13.77 प्रतिशत गिरा,जबकि पिछले छह महीनों में इसमें करीब 19 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। साल की शुरुआत से अब तक शेयर मूल्य में लगभग 59.44 प्रतिशत की कमी आ चुकी है। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि कंपनी के सामने केवल बाजार हिस्सेदारी का नहीं,बल्कि दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता का भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
उधर,पारंपरिक ऑटो कंपनियाँ इस बाजार में अपनी जगह पुख्ता कर रही हैं। मजबूत डीलर नेटवर्क,भरोसेमंद सर्विस स्ट्रक्चर और लंबे समय से बने ग्राहक संबंध—ये सभी कारक इलेक्ट्रिक सेगमेंट में भी उनके पक्ष में जाते दिखाई दिए। टीवीएस मोटर कंपनी 2025 में सबसे बड़ी विजेता बनकर उभरी। कंपनी ने 2,95,315 यूनिट्स की बिक्री के साथ 24.2 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी हासिल की और मार्केट लीडर बन गई। यह उपलब्धि बताती है कि टीवीएस ने इलेक्ट्रिक सेगमेंट को केवल प्रयोग के तौर पर नहीं,बल्कि दीर्घकालिक रणनीति के रूप में अपनाया है।
बजाज ऑटो ने भी मजबूत प्रदर्शन किया और 21.9 प्रतिशत मार्केट शेयर के साथ दूसरे स्थान पर रही। बजाज ने अपने लोकप्रिय ब्रांड वैल्यू को इलेक्ट्रिक पोर्टफोलियो से जोड़ते हुए उपभोक्ताओं को भरोसे और तकनीक का संतुलित विकल्प देने की रणनीति अपनाई। इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज हो गई और वह वर्ग जो पहले ओला इलेक्ट्रिक को प्राथमिकता देता था,अब पारंपरिक कंपनियों की ओर रुख करता नजर आ रहा है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि ओला के लिए अभी भी वापसी की गुंजाइश मौजूद है,लेकिन इसके लिए कंपनी को सबसे पहले अपने सर्विस नेटवर्क को मजबूत करना होगा। इलेक्ट्रिक वाहनों के मामले में चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर,बैटरी परफॉर्मेंस और मेंटेनेंस सपोर्ट बेहद अहम हैं। यदि ग्राहक को समय पर समाधान न मिले,तो वह आसानी से दूसरे ब्रांड का विकल्प चुन लेता है। इसके साथ-साथ,प्रोडक्ट क्वालिटी में निरंतर सुधार और ग्राहकों के साथ पारदर्शी संवाद भी ओला के लिए जरूरी होंगे।
भविष्य की तस्वीर काफी दिलचस्प दिखाई देती है। सरकार की ओर से मिल रहे प्रोत्साहन,बढ़ती ईंधन कीमतें और पर्यावरण जागरूकता—इन सभी ने इलेक्ट्रिक वाहनों की माँग को स्थायी आधार दे दिया है। ऐसे में प्रतिस्पर्धा और तीखी होगी और वही कंपनियाँ आगे रहेंगी जो भरोसा,तकनीक,सेवा और वित्तीय अनुशासन का संतुलित मॉडल पेश कर सकेंगी।
ओला इलेक्ट्रिक के लिए यह दौर चुनौतीपूर्ण जरूर है,लेकिन यह सुधार और पुनर्निर्माण का भी मौका है। दूसरी ओर टीवीएस और बजाज जैसी कंपनियाँ इस मौके का पूरा लाभ उठाना चाहती हैं और बाजार में अपनी बढ़त को स्थायी बनाने की रणनीति पर काम कर रही हैं। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या ओला अपनी रणनीति में बड़े बदलाव लाकर वापसी कर पाती है या फिर 2025 इलेक्ट्रिक दोपहिया बाजार के शक्ति संतुलन में स्थायी बदलाव का साल साबित होगा।
