देवेंद्र फडणवीस

मुंबई के भांडुप बस हादसे ने झकझोरा महाराष्ट्र,पीड़ित परिवारों को मिलेगी आर्थिक मदद,मृतकों के परिजनों को पाँच लाख रुपए के मुआवजे का ऐलान

मुंबई,30 दिसंबर (युआईटीवी)- मुंबई के भांडुप इलाके में सोमवार रात हुए दर्दनाक बस हादसे ने पूरे राज्य को स्तब्ध कर दिया। भीड़भाड़ वाली स्टेशन रोड पर बीईएसटी (बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट) की एक बस अचानक बेकाबू हो गई और पैदल चल रहे लोगों को कुचलती चली गई। कुछ ही पलों में चीख-पुकार मच गई,सड़क पर अफरा-तफरी फैल गई और कई परिवारों की दुनिया उजड़ गई। इस भयावह घटना में चार लोगों की मौत हो गई,जबकि नौ अन्य गंभीर रूप से घायल हुए। राज्य सरकार ने हादसे को दुखद और चिंताजनक बताते हुए तत्काल राहत कदम उठाने का भरोसा दिया है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया और मृतकों के परिजनों के लिए पाँच लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि भांडुप रेलवे स्टेशन के पास हुआ यह हादसा बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने मृतकों को श्रद्धांजलि दी और घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और हर जरूरी मदद सुनिश्चित की जाएगी।

हादसा तब हुआ जब बस स्टेशन रोड पर रिवर्स ली जा रही थी। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक,बस अचानक नियंत्रण से बाहर हो गई और वहाँ खड़े हुए पैदल यात्रियों को टक्कर मारती चली गई। कुछ ही क्षणों में सड़क पर लहूलुहान लोग गिर पड़े,आसपास मौजूद लोग घबरा गए और तुरंत मदद के लिए आगे आए। पुलिस और आपातकालीन सेवाओं को सूचना दी गई और घायल लोगों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने चार लोगों को मृत घोषित कर दिया,जिनकी पहचान प्रणिता संदीप रसम,वर्षा सावंत,मानसी मेघश्याम गुरव और प्रशांत शिंदे के रूप में हुई। मृतकों में तीन महिलाएँ शामिल थीं,जिनमें से दो घटनास्थल पर ही दम तोड़ बैठीं।

बस चालक की पहचान संतोष रमेश सावंत के रूप में हुई है,जबकि भगवान भाऊ घारे बस के कंडक्टर थे। हादसे के तुरंत बाद बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौके पर पहुँचें और इलाके को घेराबंदी कर जाँच शुरू की। ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया ताकि बचाव कार्य में बाधा न आए। चश्मदीदों के अनुसार,बस कुछ देर पहले तेज रफ्तार से आती दिखाई दी थी और अचानक नियंत्रण खो बैठी। हालाँकि,पुलिस ने कहा है कि सभी बयानों की जाँच की जा रही है और बिना तथ्यों के किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँचा जा सकता।

जाँच अधिकारी तकनीकी पहलुओं की भी बारीकी से पड़ताल कर रहे हैं। यह देखा जा रहा है कि क्या बस में किसी तरह की मैकेनिकल खराबी थी,ब्रेक फेल हुए थे या चालक की लापरवाही हादसे का कारण बनी। परिवहन विभाग के विशेषज्ञों का मानना है कि महानगरों में भीड़भाड़ वाले बस स्टॉप,अव्यवस्थित फुटपाथ और अनियंत्रित ट्रैफिक कई बार ऐसे हादसों को न्यौता देते हैं। उनके अनुसार,यदि बस स्टॉप के डिजाइन में बदलाव नहीं किया गया,फुटपाथों पर अतिक्रमण नहीं हटाया गया और ट्रैफिक मूवमेंट को सुव्यवस्थित नहीं किया गया,तो भांडुप और कुर्ला जैसे हादसे दोबारा होने का खतरा बना रहेगा।

मुंबई जैसी तेज रफ्तार शहर में सार्वजनिक परिवहन लाखों लोगों का सहारा है। बीईएसटी बसें रोजाना हजारों यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुँचाती हैं। ऐसे में इस तरह के हादसे न केवल मानव जीवन के लिए खतरा हैं,बल्कि पूरे परिवहन तंत्र पर भी सवाल उठाते हैं। शहर में अक्सर भीड़,तंग सड़कें और लगातार बढ़ते वाहन दबाव के कारण जोखिम और बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रैफिक नियमों के सख्त पालन,चालकों के नियमित प्रशिक्षण और वाहन फिटनेस की निरंतर जाँच से ऐसी घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।

हादसे के बाद अस्पतालों में भर्ती घायलों के परिजन चिंतित और परेशान नजर आए। कई लोगों ने बताया कि वे अपने प्रियजनों के साथ रोज की तरह घर लौट रहे थे,लेकिन कुछ ही पलों में सब कुछ बदल गया। कुछ परिवारों के लिए यह हादसा हमेशा के लिए दर्द की याद बनकर रह गया। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से माँग की है कि स्टेशन रोड जैसे संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए जाएँ,स्पीड लिमिट का कड़ाई से पालन कराया जाए और बसों के रिवर्सिंग के दौरान अनिवार्य रूप से सहायक गाइड की व्यवस्था हो।

सिविक एजेंसियों के बीच समन्वय,सड़क सुरक्षा ऑडिट और भीड़ वाले इलाकों में तकनीकी सुधार की आवश्यकता पर भी चर्चा तेज हो गई है। कई सामाजिक संगठनों ने सरकार से माँग की है कि पीड़ित परिवारों को दी जा रही वित्तीय सहायता के साथ-साथ दीर्घकालिक समर्थन योजनाएँ भी बनाई जाएँ,ताकि अचानक हुए इस नुकसान से उबरने में उन्हें मदद मिल सके।

मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद उम्मीद जगी है कि सरकार इस घटना से सबक लेकर व्यापक स्तर पर सुधारात्मक कदम उठाएगी। हादसे की जाँच जारी है और पुलिस के अनुसार,दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला फिर याद दिलाता है कि सड़क सुरक्षा महज कागजी नियमों का विषय नहीं,बल्कि हर नागरिक के जीवन से जुड़ा मुद्दा है।

भांडुप के इस हादसे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भीड़भाड़ वाले शहरी इलाकों में थोड़ी सी चूक भी बड़ा संकट बन सकती है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जाँच के बाद सामने आने वाले निष्कर्षों के आधार पर सरकार और प्रशासन कौन-कौन से ठोस कदम उठाते हैं,ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके और शहर की सड़कों को यात्रियों के लिए सुरक्षित बनाया जा सके।