नई दिल्ली,30 दिसंबर (युआईटीवी)- मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्वप्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर ने मंगलवार को एक विशेष दृश्य देखा,जब बॉलीवुड अभिनेत्री नुसरत भरूचा पुत्रदा एकादशी के पावन अवसर पर बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुँचीं। तड़के ब्रह्म मुहूर्त में आयोजित होने वाली दिव्य भस्म आरती में शामिल होकर नुसरत ने भगवान शिव का आशीर्वाद लिया और पूरी श्रद्धा के साथ आरती में हिस्सा लिया। यह उनका महाकाल मंदिर में दूसरा आगमन था और इस बार भी उनकी आस्था और भक्ति साफ तौर पर झलक रही थी।
भस्म आरती के दौरान नुसरत नंदी हॉल में बैठीं और शिव भक्ति में पूरी तरह मग्न दिखाई दीं। मंदिर परिसर में व्याप्त आध्यात्मिक माहौल,मंत्रोच्चारण की ध्वनि और आरती की लय के साथ वह शांत भाव से बैठकर भगवान महाकाल की स्तुति सुनती रहीं। आरती संपन्न होने के बाद पुजारियों ने उन्हें प्रसाद स्वरूप महाकाल का अंकित दुपट्टा भेंट किया। दुपट्टा ग्रहण करते हुए उनके चेहरे पर उमंग और भावुकता का मिश्रण दिखाई दिया और उन्होंने इसे अपने लिए सौभाग्य का प्रतीक बताया।
दर्शन के बाद मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में अभिनेत्री ने महाकाल मंदिर की व्यवस्थाओं की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बावजूद मंदिर में अनुशासन और सरलता बनाए रखने की व्यवस्था काबिले तारीफ है। विशेष रूप से उन्होंने जल पात्र व्यवस्था की प्रशंसा की,जिसके तहत पाइपलाइन के माध्यम से सीधे ज्योतिर्लिंग पर जल चढ़ाया जाता है। इस व्यवस्था से भक्तों को भीड़ में धक्का-मुक्की के बिना जल अर्पित करने की सुविधा मिल जाती है और पूरे अनुष्ठान में सुव्यवस्था बनी रहती है।
नुसरत ने बताया कि महाकाल के दर्शन उनके लिए हमेशा शांति और नई ऊर्जा का स्रोत होते हैं। उन्होंने कहा कि जैसे ही वह मंदिर परिसर में प्रवेश करती हैं,मन अपने आप शांत हो जाता है और जीवन की भागदौड़ से कुछ क्षणों के लिए मुक्ति मिलती है। उनके अनुसार,भस्म आरती जैसी आध्यात्मिक रस्में न केवल आस्था को मजबूत करती हैं,बल्कि भारतीय परंपराओं की गहराई और सांस्कृतिक समृद्धि का एहसास भी कराती हैं।
महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती दुनिया भर के श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है। यह आरती प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में होती है और भगवान शिव के ‘महाकाल’ रूप की विशेष पूजा का प्रतीक मानी जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार,इस आरती में श्मशान से लाई गई चिता की भस्म से भगवान का श्रृंगार किया जाता है। यह भगवान शिव के उस स्वरूप का स्मरण कराती है,जिसमें वे समय और मृत्यु के स्वामी माने जाते हैं। भस्म के साथ-साथ इसमें गोहरी,पीपल,पलाश,शमी और बेल की लकड़ियों की राख भी मिलाई जाती है,जो आरती को विशिष्ट आध्यात्मिक महत्व प्रदान करती है।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार,भस्म आरती के दौरान महिलाएं सिर पर ओढ़नी या घूँघट रखती हैं। ऐसा माना जाता है कि इस समय महाकाल निराकार स्वरूप में माने जाते हैं और इसलिए महिलाओं को आरती के कुछ हिस्सों को न देखने की मर्यादा निभानी होती है। हालाँकि,समय के साथ मंदिर प्रशासन ने व्यवस्थाओं में बदलाव करते हुए महिलाओं के लिए भी दर्शन की सुविधा सुनिश्चित की है,ताकि वे श्रद्धा के साथ दूर से आरती के दर्शन कर सकें और पूजा का हिस्सा बन सकें।
भस्म आरती की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें शामिल होने के लिए श्रद्धालु महीनों पहले से पंजीकरण करवाते हैं। देश और विदेश से आने वाले लोगों के लिए यह केवल पूजा का अनुष्ठान नहीं,बल्कि एक गहन आध्यात्मिक अनुभव बन जाता है। उज्जैन का यह मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और माना जाता है कि यहाँ की आराधना से पापों का क्षय होता है और मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
अभिनेत्री नुसरत भरूचा का यह दौरा भले ही निजी आस्था से जुड़ा रहा हो,लेकिन इससे एक बार फिर महाकाल मंदिर की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता चर्चा में आ गई है। सोशल मीडिया पर भी उनकी तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें वह भक्ति में लीन नजर आ रही हैं। कई श्रद्धालुओं ने उनकी सादगी और सम्मानजनक व्यवहार की प्रशंसा की और कहा कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों का इस तरह आस्था के साथ जुड़ना आम लोगों के लिए प्रेरणा का काम करता है।
फिल्मी दुनिया की व्यस्त जिंदगी के बीच महाकाल के दरबार में नुसरत का यह आगमन उनकी व्यक्तिगत श्रद्धा का प्रतीक माना जा रहा है। उनके मुताबिक,उज्जैन की यह पवित्र यात्रा उनके दिल के बेहद करीब है और अवसर मिलने पर वह फिर से यहाँ आना चाहेंगी। महाकाल मंदिर परिसर में मंगलवार की सुबह भले ही भीड़ अधिक थी,लेकिन श्रद्धा और अनुशासन का संगम इसे और अधिक विशेष बना रहा।
इस तरह, पुत्रदा एकादशी के इस पावन अवसर पर महाकालेश्वर मंदिर में हुई भस्म आरती और अभिनेत्री नुसरत भरूचा की उपस्थिति ने पूरे कार्यक्रम को खास बना दिया। उज्जैन एक बार फिर आस्था,परंपरा और भक्ति के रंग में रंगा दिखाई दिया,जहाँ भक्तों ने भगवान महाकाल के दर पर सिर झुकाकर शांति और आशीर्वाद की प्रार्थना की।
