कोनेरू हम्पी (तस्वीर क्रेडिट@samrat4bjp)

फिडे वर्ल्ड रैपिड चैंपियनशिप में कोनेरू हम्पी और अर्जुन एरिगैसी की चमक,देशभर से मिली बधाइयाँ

नई दिल्ली,30 दिसंबर (युआईटीवी)- फिडे वर्ल्ड रैपिड चैंपियनशिप में भारतीय खिलाड़ियों का दमदार प्रदर्शन एक बार फिर देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। आंध्र प्रदेश की ग्रैंडमास्टर कोनेरू हम्पी ने इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में कांस्य पदक जीतकर भारत को गर्व का एक और मौका दिया,जबकि युवा शतरंज सितारे अर्जुन एरिगैसी ने भी शानदार खेल दिखाते हुए पोडियम फिनिश हासिल किया। दोनों खिलाड़ियों की इस उपलब्धि पर राजनीतिक नेतृत्व से लेकर खेल जगत और आम प्रशंसकों तक सभी ने उन्हें बधाई दी और इसे भारतीय शतरंज के स्वर्णिम दौर का प्रतीक बताया।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर हम्पी के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि वास्तविक चैंपियन वही होता है,जो नतीजों से आगे बढ़कर बार-बार उच्च स्तर पर मुकाबला करने का साहस दिखाता है। उन्होंने लिखा कि विश्व मंच पर मिला यह कांस्य पदक केवल एक उपलब्धि नहीं,बल्कि निरंतरता,समर्पण और उत्कृष्टता का प्रमाण है। नायडू ने यह भी कहा कि हम्पी की यात्रा लाखों युवा खिलाड़ियों,खासकर लड़कियों के लिए प्रेरणा है,जो खेल के क्षेत्र में अपने सपनों को साकार करना चाहती हैं। मुख्यमंत्री ने अर्जुन एरिगैसी को भी विशेष रूप से बधाई दी और बताया कि पोडियम पर स्थान हासिल करना उन्हें ग्रैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद के बाद इस उपलब्धि तक पहुँचने वाला एकमात्र भारतीय पुरुष खिलाड़ी बनाता है। उनके अनुसार,यह सफलता न केवल तेलंगाना,बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का क्षण है,जिसने भारतीय शतरंज की समृद्ध परंपरा में नया अध्याय जोड़ दिया है।

इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के खेल मंत्री मंडीपल्ली रामप्रसाद रेड्डी ने भी गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि कोनेरू हम्पी पहले ही फिडे वर्ल्ड रैपिड चैंपियनशिप में पाँच पदक जीत चुकी हैं,जो उनके अद्भुत कौशल और लंबे समय से जारी निरंतर प्रदर्शन का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे उभरते खेल राष्ट्र के लिए यह उपलब्धियाँ केवल मेडल तक सीमित नहीं हैं,बल्कि ये इस बात का संकेत भी देती हैं कि महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व शतरंज जैसे बौद्धिक खेलों में लगातार बढ़ रहा है। खेल मंत्री ने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में हम्पी अपने अनुभव और प्रतिभा के दम पर और भी कई उपलब्धियाँ हासिल करेंगी।

यही नहीं,केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने भी अर्जुन एरिगैसी को बधाई देते हुए कहा कि फिडे वर्ल्ड रैपिड चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने अर्जुन को “धरती का बेटा” बताते हुए लिखा कि विश्वनाथन आनंद के बाद इस इवेंट में पोडियम तक पहुँचना न केवल व्यक्तिगत सफलता है,बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा। मंत्री ने कहा कि तेलंगाना को उनके प्रदर्शन पर गर्व है और देश के युवा खिलाड़ियों को उनसे सीख लेनी चाहिए कि अनुशासन और निरंतर अभ्यास से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

खेल जगत के अधिकारियों ने भी इन दोनों खिलाड़ियों की सफलता को दूरगामी प्रभाव वाला बताया है। आंध्र प्रदेश खेल प्राधिकरण (एसएएपी) के अध्यक्ष ए. रवि नायडू ने कहा कि कोनेरू हम्पी ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाँच पदकों के साथ भारत का नाम रोशन किया है। उनके अनुसार,इतना स्थिर और उच्च स्तर का प्रदर्शन यह बताता है कि भारत की तैयारी और खेल संरचना अब वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप होती जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और खेल प्राधिकरण दोनों ही युवा खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएँ देने के लिए प्रतिबद्ध हैं,ताकि आने वाले समय में और भी प्रतिभाएँ अंतर्राष्ट्रीय मंच पर चमक सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि शतरंज में भारत का बढ़ता दबदबा केवल व्यक्तिगत प्रतिभा का परिणाम नहीं,बल्कि व्यापक स्तर पर बनी उस खेल संस्कृति का भी प्रतीक है,जहाँ बच्चों को कम उम्र से ही मानसिक खेलों की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है। कोनेरू हम्पी की सफलता इस बात का उदाहरण है कि निरंतर अभ्यास,मजबूत रणनीति और मानसिक दृढ़ता के साथ महिलाएँ भी पुरुष-प्रधान माने जाने वाले खेलों में शीर्ष पर पहुँच सकती हैं। वहीं अर्जुन एरिगैसी जैसे युवा खिलाड़ियों की उपलब्धियाँ इस तथ्य को मजबूती देती हैं कि भारत के पास भविष्य के लिए एक मजबूत प्रतिभा पाइपलाइन मौजूद है।

इन जीतों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि फिडे वर्ल्ड रैपिड चैंपियनशिप शतरंज की दुनिया का बेहद प्रतिस्पर्धी टूर्नामेंट माना जाता है,जहाँ दुनिया के शीर्ष खिलाड़ी भाग लेते हैं और हर चाल के साथ परिणाम बदल सकता है। इस मंच पर पदक जीतना केवल कौशल का नहीं,बल्कि परिस्थिति को पढ़ने और दबाव में सर्वश्रेष्ठ निर्णय लेने की क्षमता का भी प्रमाण होता है। यही वजह है कि कोनेरू हम्पी और अर्जुन एरिगैसी की उपलब्धियों को भारत में शतरंज के स्वर्णिम भविष्य का संकेत माना जा रहा है।

देशभर से मिल रही शुभकामनाओं और सराहना के बीच अब उम्मीद यही जताई जा रही है कि दोनों खिलाड़ी आने वाले टूर्नामेंट्स में भी इसी तरह शानदार प्रदर्शन जारी रखेंगे। उनकी सफलता उन तमाम युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है,जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। इन पदकों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि संकल्प,मेहनत और सही मार्गदर्शन के साथ भारत अंतर्राष्ट्रीय खेल मंचों पर लगातार नई ऊँचाइयाँ छूने के लिए तैयार है।