एनसीआर में प्रदूषण (तस्वीर क्रेडिट@TribalArmy)

एनसीआर में प्रदूषण और घने कोहरे की दोहरी मार,एक्यूआई 450 के पार,यातायात और जनजीवन बुरी तरह प्रभावित

नई दिल्ली,30 दिसंबर (युआईटीवी)- राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) इस समय सर्दी के साथ-साथ प्रदूषण और घने कोहरे की दोहरी मार झेल रहा है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 450 के पार पहुँच गया है,जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है और स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है। मौसम विभाग ने लगातार दूसरे दिन भी अत्यधिक घने कोहरे की चेतावनी जारी की है। देर रात और सुबह के समय कई इलाकों में दृश्यता शून्य के बराबर दर्ज की गई, जिसके कारण सड़क,रेल और हवाई सेवाओं पर बुरा असर पड़ा और यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा।

दिल्ली के कई वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों के ताजा आँकड़ें स्थिति की भयावहता को दर्शाते हैं। आनंद विहार में एक्यूआई 451,रोहिणी में 446,अशोक विहार में 433,वजीरपुर में 449 और चांदनी चौक में 432 दर्ज किया गया। ये सभी आँकड़ें ‘गंभीर’ श्रेणी में आते हैं,जो बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए विशेष रूप से हानिकारक हैं। सिरीफोर्ट,डीटीयू दिल्ली,शादिपुर,पंजाबी बाग और सोनिया विहार जैसे इलाकों में भी एक्यूआई 400 के आसपास या उससे ऊपर बना हुआ है। बवाना,अलीपुर और विवेक विहार में स्थिति कुछ कम सही होते हुए भी ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण का यह स्तर लंबे समय तक रहने पर श्वसन संबंधी बीमारियों,आँखों में जलन,गले में खराश और हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा काफी बढ़ जाता है।

दिल्ली के साथ-साथ नोएडा और गाजियाबाद में भी एयर क्वालिटी लगातार बिगड़ रही है। नोएडा के सेक्टर-1 में एक्यूआई 433, सेक्टर-125 और सेक्टर-116 में 388 दर्ज किया गया,जबकि सेक्टर-62 में एक्यूआई 372 रहा। गाजियाबाद के वसुंधरा में हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक रहे,जहाँ एक्यूआई 459 तक पहुँच गया। इसके अलावा संजय नगर,लोनी और इंदिरापुरम में भी वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रही। इससे साफ है कि पूरा एनसीआर इस समय प्रदूषण की चपेट में है और क्षेत्रीय स्तर पर इसके प्रभाव दिखाई दे रहे हैं।

भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने अगले दो दिनों के लिए घने से अत्यधिक घने कोहरे की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार,30 दिसंबर को सुबह के समय अत्यधिक घना कोहरा छाया रहा और दोपहर तक घने कोहरे का प्रकोप जारी रहा। अधिकतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया,जबकि आर्द्रता 100 प्रतिशत के करीब पहुँच गई। इसी उच्च आर्द्रता और निम्न तापमान की वजह से कोहरा और स्मॉग का मिश्रण और घना होता जा रहा है। 31 दिसंबर के लिए भी घने कोहरे का अलर्ट जारी किया गया है, हालाँकि,1 जनवरी को हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना से कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। बारिश होने पर हवा की गुणवत्ता में अस्थायी सुधार हो सकता है,क्योंकि नमी प्रदूषक कणों को जमीन की ओर बैठा देती है।

घना कोहरा केवल दृश्यता ही नहीं घटाता,बल्कि यातायात व्यवस्था को भी अस्त-व्यस्त कर देता है। बीती रात और सुबह के समय कई मुख्य मार्गों पर दृश्यता बेहद कम रही,जिसके कारण वाहन चालकों को हेडलाइट और हैजार्ड लाइट का सहारा लेना पड़ा। हाईवे पर वाहनों की रफ्तार कछुआ गति से चलती रही और जगह-जगह जाम की स्थिति बन गई। कई स्थानों पर छोटे-मोटे सड़क हादसों की भी खबरें आईं,हालाँकि बड़े हादसों से बचाव के लिए पुलिस और ट्रैफिक विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। रेल सेवाएँ भी इससे अछूती नहीं रहीं और कई ट्रेनें कोहरे के कारण घंटों लेट पहुंचीं। हवाई यातायात पर भी इसका असर पड़ा और विजिबिलिटी कम होने से कई उड़ानों में देरी और कुछ मामलों में रद्दीकरण तक करना पड़ा।

डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि बहुत खराब और गंभीर श्रेणी के एक्यूआई में संभव हो तो सुबह-शाम बाहर टहलने से बचना चाहिए, क्योंकि इसी समय कोहरा और प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा होता है। सांस के मरीजों, बुजुर्गों और बच्चों को अनावश्यक रूप से बाहर जाने से बचने, एन-95 जैसे मास्क के उपयोग, घरों के अंदर एयर-प्यूरीफायर या घर की सफाई और वेंटिलेशन पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है। साथ ही, वाहन चालकों को कम गति से चलने, अचानक ब्रेक लगाने से बचने और लंबी यात्रा के दौरान अतिरिक्त समय का प्रबंधन करने की हिदायत दी जा रही है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि केवल तात्कालिक उपायों से समस्या का समाधान संभव नहीं है। पराली, निर्माण गतिविधियों, डीजल जनरेटरों, पुरानी गाड़ियों और औद्योगिक उत्सर्जन जैसे कारकों पर सख्त नियंत्रण के बिना प्रदूषण के स्तर में स्थायी सुधार नहीं हो सकता। वहीं, अत्यधिक शहरीकरण, वाहनों की संख्या में वृद्धि और ठंडी हवा के कारण प्रदूषक कणों का न जम पाना भी इस समय के दौरान प्रदूषण को बढ़ाने वाले प्रमुख कारक हैं। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि कोहरे और प्रदूषण के मिश्रण से बना ‘स्मॉग’ सबसे खतरनाक होता है, क्योंकि इससे फेफड़ों में जमा सूक्ष्म कण शरीर के अंदर गहराई तक पहुंच जाते हैं।

एनसीआर के लोग नए साल के आगमन से पहले ही प्रदूषण और कोहरे के इस संकट से जूझ रहे हैं। प्रशासन और मौसम विभाग की ओर से लगातार अलर्ट जारी किए जा रहे हैं और नागरिकों से सावधानी बरतने की अपील की जा रही है। अब उम्मीद इसी बात की है कि संभावित बारिश और हवा के रुख में बदलाव से वायु गुणवत्ता में कुछ सुधार होगा और लोगों को इस ‘डबल व्हैममी’ यानी कोहरा और प्रदूषण की दोहरी मार से राहत मिल सकेगी।