ममता बनर्जी

ममता बनर्जी का अमित शाह पर पलटवार: “अगर घुसपैठ सिर्फ बंगाल में होती है,तो पहलगाम और दिल्ली हमले कैसे हुए?”

कोलकाता,31 दिसंबर (युआईटीवी)- पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा घुसपैठ को लेकर दिए बयान के बाद राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखा पलटवार किया और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। बांकुरा जिले के बरजोरा में आयोजित एक जनसभा में ममता बनर्जी ने सवाल उठाया कि यदि घुसपैठ केवल पश्चिम बंगाल से ही हो रही होती,तो पहलगाम आतंकी हमला और दिल्ली में कार बम धमाका कैसे हुए। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान केवल राजनीतिक लाभ के लिए दिए जा रहे हैं और इनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।

ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और भाजपा पश्चिम बंगाल में “सोनार बांग्ला” बनाने की बात करती है,लेकिन वास्तव में राज्य को कमजोर करने और विभाजन की राजनीति को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य की संस्कृति,समाज और आर्थिक तंत्र को नुकसान पहुँचाकर कोई भी विकास संभव नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि भाजपा का उद्देश्य विकास नहीं,बल्कि सत्ता हासिल करना है।

इससे पहले,अमित शाह ने कोलकाता में मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया था कि ममता बनर्जी की सरकार न केवल घुसपैठियों को राज्य में प्रवेश की अनुमति देती है,बल्कि उन्हें संरक्षण भी प्रदान करती है। शाह का कहना था कि इस नीति के चलते राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा बढ़ रहा है और जनसंख्या का संतुलन बिगड़ रहा है। उनके इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा लगातार भय और संदेह का माहौल बनाती है और हर मुद्दे को घुसपैठ से जोड़ने की कोशिश करती है। उन्होंने सवाल किया कि यदि सारी घुसपैठ बंगाल से ही हो रही है,तो देश के अन्य हिस्सों में आतंकी घटनाएँ किसकी विफलता का परिणाम हैं।

ममता बनर्जी ने अमित शाह के उस बयान को भी खारिज किया,जिसमें उन्होंने कहा था कि पश्चिम बंगाल सरकार केंद्र की विभिन्न परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध नहीं कराती। उन्होंने विस्तार से उदाहरण देते हुए कहा कि यदि राज्य ने भूमि उपलब्ध नहीं कराई होती,तो बोंगांव के पेट्रापोल और आंदल में नए हवाई अड्डों के लिए जमीन कहाँ से आई। उन्होंने पूछा कि रेलवे ट्रैक का विस्तार कैसे हुआ और ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड जैसे उपक्रम अपने प्रोजेक्ट्स कैसे चला रहे हैं। उनके अनुसार,घोक्षडांगा और चांगराबन्धा जैसे क्षेत्रों में भूमि आवंटन भी राज्य सरकार ने ही किया है। इस तरह उन्होंने केंद्र के दावों को तथ्यहीन बताया।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भाजपा हर चुनाव से पहले बड़े-बड़े दावे करती है,लेकिन जनता का विश्वास जीतने में असफल रहती है। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा नेताओं ने 200 सीटें जीतने का दावा किया था,जबकि नतीजे इसके विपरीत आए। ममता बनर्जी ने कहा कि इस बार भाजपा दो-तिहाई बहुमत की बात कर रही है,लेकिन स्पष्ट आँकड़ा देने से बच रही है। उनके अनुसार यह साफ संकेत है कि पार्टी स्वयं अपनी स्थिति को लेकर आश्वस्त नहीं है।

ममता बनर्जी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसका उपयोग मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए किया जा रहा है। उनका आरोप था कि कई क्षेत्रों में मतुआ समुदाय,अल्पसंख्यकों और सामान्य हिंदू मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं,ताकि चुनावी समीकरण भाजपा के पक्ष में किए जा सकें। उन्होंने कहा कि अब तक कम-से-कम 58 लोगों की जान इस तरह की राजनीतिक टकरावों और चुनावी तनाव के कारण गई है और फिर भी भाजपा नेताओं को इससे कोई सबक नहीं मिला।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष को बदनाम करने के लिए भाजपा नेता व्यक्तिगत हमलों से भी नहीं चूकते। ममता बनर्जी ने कहा कि उन्हें स्वयं “बांग्लादेशी” कहा गया,जबकि उनका जन्म पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में हुआ है। उन्होंने इसे न सिर्फ अपमानजनक बताया,बल्कि बंगालियों की अस्मिता पर हमला बताते हुए कहा कि भाजपा की राजनीति लोगों को बाँटने पर आधारित है। उन्होंने कहा कि बंगाल की पहचान उसकी विविधता,सहिष्णुता और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी है,जिसे राजनीतिक फायदे के लिए निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।

अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से पूछा कि यदि घुसपैठ रोकने की जिम्मेदारी राज्यों की ही है,तो सीमा सुरक्षा बल और अन्य केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका क्या है। उन्होंने कहा कि सीमा की सुरक्षा पूरी तरह केंद्र के अधीन है और यदि कहीं से अवैध प्रवेश होता है,तो यह सीधे तौर पर केंद्र की जिम्मेदारी बनती है। उनके अनुसार,बार-बार राज्य सरकार को दोष देकर केंद्र अपनी नाकामियाँ छिपाने की कोशिश कर रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयानबाजी आने वाले चुनावों की पृष्ठभूमि में बेहद महत्वपूर्ण है। भाजपा लगातार राष्ट्रीय सुरक्षा और घुसपैठ को मुद्दा बनाकर मतदाताओं के बीच समर्थन जुटाने की रणनीति पर काम कर रही है। वहीं, तृणमूल कांग्रेस इस आख्यान का मुकाबला विकास,क्षेत्रीय अस्मिता और केंद्र द्वारा कथित भेदभाव के सवालों के साथ करना चाहती है। ममता बनर्जी का यह तीखा हमला इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

चुनावी माहौल में आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर आगे भी जारी रहने की संभावना है। एक ओर भाजपा का दावा है कि वह भ्रष्टाचार-मुक्त और घुसपैठ-मुक्त बंगाल बनाना चाहती है,जबकि दूसरी ओर ममता बनर्जी कहती हैं कि भाजपा विभाजन और भय की राजनीति कर रही है। फिलहाल इस राजनीतिक टकराव से इतना स्पष्ट है कि बंगाल की राह में आने वाले दिनों में और भी सियासी तूफान उठ सकते हैं, जिनका असर सीधे-सीधे मतदाताओं की सोच और मतदान व्यवहार पर पड़ेगा।