नई दिल्ली,31 दिसंबर (युआईटीवी)- ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल स्टेडियम में मंगलवार को खेले गए रोमांचक मुकाबले में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने श्रीलंका को 15 रन से हराकर पाँच मैचों की टी20 सीरीज 5-0 से अपने नाम कर ली। यह जीत केवल एक मैच का परिणाम नहीं थी,बल्कि पूरी सीरीज में टीम की दमदार लय,संयमित बल्लेबाजी और सटीक गेंदबाजी का प्रमाण भी रही। क्लीन स्वीप के साथ टीम ने घरेलू प्रशंसकों को जीत का शानदार तोहफा दिया और आने वाले अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए मजबूत संदेश भी भेजा।
टॉस श्रीलंका ने जीता और भारत को पहले बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किया। हालाँकि,भारतीय टीम की शुरुआत उतनी उम्मीदों के मुताबिक नहीं रही। महज पाँच रन के कुल स्कोर पर शेफाली वर्मा आउट होकर लौट गईं। उनके जल्द पवेलियन लौटने के बाद डेब्यू करने उतरी जी कमलिनी भी ज्यादा देर टिक नहीं पाईं और 12 रन बनाकर वापस लौटना पड़ा। शुरुआती झटकों ने भारतीय पारी पर दबाव बढ़ा दिया और 77 रन तक पहुँचते-पहुँचते टीम ने अपने पाँच विकेट खो दिए।
यहीं से मैच का रूख बदलने की शुरुआत हुई। कप्तान हरमनप्रीत कौर ने अपनी अनुभव और धैर्य का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए पारी को थाम लिया। उनके साथ अमनजोत कौर ने छठे विकेट के लिए महत्वपूर्ण साझेदारी निभाई। दोनों ने मिलकर 37 गेंदों में 61 रन जोड़े और टीम को संभाला। अमनजोत जहाँ 18 गेंदों पर 21 रन बनाकर आउट हुईं,वहीं हरमनप्रीत कौर ने कप्तानी पारी खेलते हुए 43 गेंदों में 68 रन ठोके। उनकी पारी में 9 चौके और 1 शानदार छक्का शामिल रहा,जिसने स्टेडियम में मौजूद दर्शकों के उत्साह को चरम पर पहुँचा दिया।
पारी के आखिरी ओवरों में अरुंधति रेड्डी ने नाबाद 27 रन बनाकर कुल स्कोर को प्रतिस्पर्धी 175 तक पहुँचा दिया। यह स्कोर पिच की प्रकृति और विपक्षी बल्लेबाजों की फॉर्म को देखते हुए लड़ने लायक से कहीं अधिक साबित हुआ। श्रीलंका की ओर से रश्मिका सेवंदी,कविशा दिलहारी और चामरी अथापथु ने 2-2 विकेट झटके,जबकि निमाशा मदुशानी के खाते में एक विकेट आया। भारतीय बल्लेबाजों को मिली ये सफलताएँ दर्शाती हैं कि विपक्षी गेंदबाज लगातार दबाव बनाते रहे,लेकिन अहम मौकों पर अनुभव ने बाजी मार ली।
लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंकाई टीम की शुरुआत भी झटकेदार रही। सात रन के कुल स्कोर पर कप्तान चामरी अथापथु केवल दो रन बनाकर आउट हो गईं। इतने अहम मैच में कप्तान का जल्दी आउट होना टीम के मनोबल को प्रभावित कर सकता था,लेकिन हसिनी परेरा और इमेशा दुलानी ने मिलकर पारी को काफी देर तक सँभाले रखा। दोनों ने दूसरे विकेट के लिए 56 गेंदों में 79 रनों की साझेदारी कर मुकाबले को फिर से बराबरी पर ला खड़ा किया।
हसिनी परेरा ने आक्रामक अंदाज में खेल दिखाते हुए 42 गेंदों पर 65 रन बनाए,जिसमें 8 चौके और 1 छक्का शामिल था। वहीं दुलानी ने 39 गेंदों पर 50 रन की सधी हुई पारी खेली। इस साझेदारी ने भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बढ़ाया,लेकिन जैसे ही यह जोड़ी टूटी,मैच धीरे-धीरे भारत के पक्ष में झुक गया। रश्मिका सेवंदी ने 14 रन जोड़े,मगर मध्यक्रम के बाकी बल्लेबाज भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सके और टीम 20 ओवर में सात विकेट खोकर 160 रन तक ही पहुँच सकी।
भारत के गेंदबाजों ने योजनाबद्ध तरीके से लाइन-लेंथ का उपयोग किया। बीच के ओवरों में स्पिनरों ने रन गति पर अंकुश लगाया,जबकि तेज गेंदबाजों ने डेथ ओवरों में स्लोअर,यॉर्कर और बैक-ऑफ-लेंथ गेंदों का मिश्रण करते हुए बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। फील्डिंग भी अनुशासित रही और कैच छोड़ने जैसी गलतियों से टीम ने दूरी बनाए रखी,जो टी20 जैसे तेज़ फॉर्मेट में अक्सर परिणाम तय करती हैं।
सीरीज पर नज़र डालें तो भारत ने पहला मैच आठ विकेट से जीतकर बढ़त बनाई,दूसरे मैच में सात विकेट से जीत हासिल की,तीसरा मुकाबला फिर आठ विकेट से जीता गया और चौथे मैच में 30 रन से जीत दर्ज की। अंतिम मुकाबले में 15 रन की जीत के साथ टीम ने क्लीन स्वीप पूरा किया। अलग-अलग मैचों में अलग-अलग खिलाड़ियों के उभरने से टीम संयोजन को मजबूती मिली और बेंच स्ट्रेंथ का भी प्रदर्शन हुआ। यह संकेत है कि टीम प्रबंधन खिलाड़ियों को परिस्थितियों के अनुसार तैयार कर रहा है और नई प्रतिभाओं को जिम्मेदारी देने से नहीं हिचक रहा।
हरमनप्रीत कौर की कप्तानी इस सीरीज में विशेष रूप से चर्चा में रही। उन्होंने जरूरत पड़ने पर खुद आगे बढ़कर बल्लेबाजी संभाली,गेंदबाजों का सही रोटेशन किया और फील्ड सेटिंग्स में भी आक्रामकता और समझदारी का संतुलन बनाए रखा। उनकी यह पारी न सिर्फ मैच जिताऊ रही,बल्कि युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत भी बनी।
दूसरी ओर,श्रीलंका के लिए यह सीरीज सीख से भरपूर रही। टीम ने कुछ मुकाबलों में अच्छी शुरुआत की,लेकिन मध्य ओवरों में लय कायम रखने में चूक हुई। बल्लेबाजी में लगातार विकेट गिरने और डेथ ओवरों में रन गति बनाए रखने की चुनौती उनके सामने साफ दिखाई दी। गेंदबाजी विभाग ने कई मौकों पर प्रभाव डाला,पर निर्णायक क्षणों में दबाव झेलने की क्षमता की कमी उजागर हुई।
यह सीरीज भारतीय महिला क्रिकेट के लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाली साबित हुई। क्लीन स्वीप से टीम ने न केवल घरेलू वर्चस्व मजबूत किया,बल्कि यह भी दिखाया कि वह बड़े लक्ष्य सेट करने और उनका बचाव करने—दोनों में सक्षम है। अब नजरें भविष्य की श्रृंखलाओं और बड़े टूर्नामेंटों पर होंगी,जहाँ ऐसी ही निरंतरता टीम इंडिया को खिताब तक पहुँचा सकती है।
