प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (तस्वीर क्रेडिट@MumbaichaDon)

पुतिन के आवास पर हमले की खबर पर मोदी की चिंता,कहा—शांति का रास्ता सिर्फ कूटनीति से

नई दिल्ली,31 दिसंबर (युआईटीवी)- रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में आ गया है। इस बार चर्चा का केंद्र रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का आधिकारिक आवास रहा,जिसे कथित तौर पर निशाना बनाए जाने की खबरों ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को चिंतित कर दिया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन घटनाओं पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि मौजूदा संवेदनशील माहौल में शांति की राह केवल कूटनीतिक प्रयासों से होकर गुजरती है और किसी भी ऐसे कदम से बचना चाहिए,जो वार्ता को कमजोर करे या तनाव को और बढ़ाए।

प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि रूस-यूक्रेन संघर्ष का समाधान युद्धक्षेत्र में नहीं,बल्कि बातचीत और संवाद की मेज पर खोजा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक टिकने वाली शांति के लिए धैर्य,विश्वास और पारदर्शी कूटनीति अनिवार्य हैं। मोदी ने सभी संबंधित पक्षों से संयम बरतने की अपील की और शांति बहाली के प्रयासों को समर्थन देने पर बल दिया। उनके शब्दों में,किसी भी प्रकार की आक्रामक प्रतिक्रिया या उकसावे वाली कार्रवाई न केवल हालात को बिगाड़ सकती है,बल्कि पहले से चल रही शांति वार्ताओं को भी पटरी से उतार सकती है।

मोदी का यह बयान ऐसे समय आया है,जब रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने यूक्रेन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। लावरोव के अनुसार 28–29 दिसंबर की रात यूक्रेन ने नोवगोरोड क्षेत्र में स्थित राष्ट्रपति पुतिन के सरकारी आवास को ड्रोन के जरिए निशाना बनाने की कोशिश की। उनका दावा है कि इस कथित हमले में 91 लंबी दूरी के हमलावर ड्रोन का इस्तेमाल किया गया,लेकिन रूसी वायु रक्षा प्रणाली ने समय रहते सभी ड्रोन को मार गिराया। रूस के मुताबिक इस घटना में किसी प्रकार की जान-माल की हानि नहीं हुई,हालाँकि मॉस्को ने संकेत दिया है कि ऐसे प्रयासों का जवाब दिया जाएगा और भविष्य में सुरक्षा को और मजबूत किया जाएगा।

अंतर्राष्ट्रीय विश्लेषकों के लिए यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उस समय सामने आया जब युद्ध समाप्त करने के लिए कूटनीतिक गतिविधियाँ तेज होती दिखाई दे रही थीं। यूरोप,एशिया और संयुक्त राष्ट्र स्तर पर कई दौर की चर्चाएँ चल रही हैं,जिनमें संघर्षविराम और मानवीय सहायता के मार्ग खोलने को प्राथमिकता दी जा रही है। ऐसे में पुतिन के आधिकारिक आवास से जुड़ा विवाद शांति प्रक्रिया के लिए नई चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में यह भी रेखांकित किया कि शत्रुता समाप्त करने के लिए चल रहे प्रयासों को कमजोर करने से कोई पक्ष लाभान्वित नहीं होगा। उनका कहना है कि युद्ध में चाहे जिसके पक्ष में बढ़त दिखाई दे,अंततः नुकसान आम नागरिकों,बुनियादी ढाँचे और वैश्विक स्थिरता का ही होता है। भारत लंबे समय से इस संघर्ष पर संतुलित रुख अपनाने की कोशिश करता रहा है—एक ओर वह युद्धग्रस्त क्षेत्रों में मानवीय सहायता भेजता रहा है,तो दूसरी ओर लगातार संवाद और वार्ता की आवश्यकता पर जोर देता रहा है।

इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि उनकी रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ “अच्छी और बेहद सकारात्मक” फोन बातचीत हुई है। ट्रंप के अनुसार,बातचीत के दौरान शांति योजना से जुड़े कुछ पहलुओं पर रचनात्मक चर्चा हुई। उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में फ्लोरिडा स्थित अपने मार-ए-लागो निवास पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से उनकी मुलाकात हुई,जिसमें संघर्ष विराम के संभावित रास्तों पर विचार-विमर्श किया गया। हालाँकि,इन चर्चाओं के ठोस परिणामों को लेकर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

कूटनीतिक हलकों में यह धारणा मजबूत हो रही है कि युद्ध अब उस मोड़ पर पहुँच गया है,जहाँ किसी भी बड़े हमले या प्रत्याक्रमण से हालात बेकाबू हो सकते हैं। ऊर्जा आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पहले ही इस संघर्ष के असर से प्रभावित हो चुके हैं। यही कारण है कि भारत जैसे देश लगातार संयम और संवाद पर जोर देते रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी का ताजा बयान इसी रुख की पुनर्पुष्टि के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने परोक्ष रूप से यह भी संकेत दिया कि वैश्विक समुदाय को आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर साझा समाधान के लिए मिलकर काम करना होगा।

रूस की ओर से आए बयानों में जहाँ अपनी सुरक्षा क्षमता और जवाबी कार्रवाई के संकेत नज़र आते हैं,वहीं यूक्रेन का पक्ष यह कहता रहा है कि वह अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए मजबूर है। यह टकराव केवल दो देशों का नहीं रहा,बल्कि कई महाशक्तियों की रणनीतिक दिलचस्पियों और गठबंधनों से भी जुड़ गया है। ऐसे परिदृश्य में भारत का संदेश है कि हर हाल में बातचीत जारी रहनी चाहिए—एक संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन के आवास को निशाना बनाने की खबर,भले ही बड़े नुकसान के बिना टल गई हो,लेकिन इससे राजनीतिक और सैन्य दबाव बढ़ना तय है। यदि रूस इस घटना को अपने खिलाफ सीधी चुनौती के रूप में देखता है,तो उसकी प्रतिक्रिया क्षेत्रीय स्थिरता को और जटिल बना सकती है। वहीं यूक्रेन द्वारा कथित हमले से इनकार या चुप्पी,दोनों ही परिस्थितियों में शंकाओं की गुंजाइश बनी रहती है।

प्रधानमंत्री मोदी के संदेश ने एक तरह से उस चिंता को आवाज दी है,जो आज कई देशों में महसूस की जा रही है। दुनिया पहले ही कई मोर्चों पर अस्थिरता देख रही है—ऐसे समय में रूस-यूक्रेन युद्ध का लम्बा खिंचना वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बोझ बढ़ा रहा है। इससे ऊर्जा बाजारों में उतार-चढ़ाव,यूरोप में सुरक्षा चुनौतियाँ और विकासशील देशों पर महँगाई का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

अंततः सवाल यही है कि क्या इस संघर्ष का समाधान निकट भविष्य में संभव है। पुतिन के आवास पर कथित ड्रोन हमले की खबर ने जो नया तनाव जोड़ा है,वह शांति प्रयासों के लिए एक और परीक्षा साबित हो सकता है,लेकिन प्रधानमंत्री मोदी का संदेश इस दिशा में उम्मीद पैदा करता है कि यदि बड़े राष्ट्र संयम और कूटनीति को प्राथमिकता दें,तो संवाद का रास्ता फिर से खोला जा सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में रूस,यूक्रेन और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस संवेदनशील स्थिति को कैसे सँभालते हैं और क्या सचमुच शांति की ओर कोई ठोस कदम उठाया जा सकेगा।