चीन की महान दीवार

“किसी तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप नहीं”: चीन के भारत-पाकिस्तान युद्धविराम के दावे पर सूत्रों का बयान

नई दिल्ली,1 जनवरी (युआईटीवी)- नई दिल्ली ने चीन के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है कि उसने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कराने में कोई भूमिका निभाई थी। दिल्ली ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों के बीच हुए समझौते में किसी तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप नहीं था। सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि शत्रुता का अंत भारत और पाकिस्तान के बीच स्थापित द्विपक्षीय सैन्य चैनलों के माध्यम से हुई सीधी बातचीत का परिणाम था।

यह स्पष्टीकरण चीनी अधिकारियों द्वारा दिए गए उन बयानों के बाद आया है,जिनमें उन्होंने कहा था कि बीजिंग ने दोनों परमाणु-सशस्त्र पड़ोसी देशों के बीच शांति स्थापित करने में मध्यस्थता की थी। भारतीय सूत्रों ने इन दावों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताते हुए कहा कि सैन्य कार्रवाई रोकने का निर्णय भारत और पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशकों (डीजीएमओ) के बीच सीधे संवाद के माध्यम से लिया गया था।

मामले से परिचित अधिकारियों के अनुसार,कई दिनों से जारी सैन्य तनाव के बाद पाकिस्तान के अनुरोध पर युद्धविराम हुआ। दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों (डीजीएमओ) के बीच फोन पर हुई बातचीत में मौजूदा व्यवस्थाओं के अनुरूप सहमति बनी। सूत्रों ने बताया कि इस प्रक्रिया के किसी भी चरण में किसी भी बाहरी देश या अंतर्राष्ट्रीय संगठन की भागीदारी नहीं थी।

भारत का हमेशा से यही मानना ​​रहा है कि पाकिस्तान के साथ सभी मुद्दे द्विपक्षीय हैं और उनका समाधान बाहरी मध्यस्थता के बिना होना चाहिए। अधिकारियों ने बताया कि यह नीति लंबे समय से चली आ रही है और हालिया सैन्य गतिरोध के दौरान भी इसका पूरी तरह पालन किया गया। अतीत में भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के ऐसे दावों को नई दिल्ली ने स्पष्ट रूप से खारिज किया है।

कूटनीतिक पर्यवेक्षक चीन के इस बयान को वैश्विक मध्यस्थ के रूप में खुद को पेश करने के उसके व्यापक प्रयास का हिस्सा मानते हैं। हालाँकि,भारतीय अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि इस तरह की बातें भारत-पाकिस्तान युद्धविराम की वास्तविकता को नहीं दर्शाती हैं और उन्होंने एक बार फिर इस बात पर जोर दिया है कि शत्रुता समाप्त करने के निर्णय में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी।