नई दिल्ली,1 जनवरी (युआईटीवी)- भारतीय रेलवे ने बुधवार को स्वदेशी तकनीक से निर्मित वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का अंतिम हाई-स्पीड परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया। यह उपलब्धि न केवल रेल नेटवर्क के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है,बल्कि आत्मनिर्भर भारत के विज़न को भी नई गति देती है। कोटा-नागदा रेल सेक्शन पर रेलवे सुरक्षा आयुक्त की कड़ी निगरानी में किए गए इस परीक्षण में ट्रेन ने 180 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार हासिल की और सभी मानकों पर खरा उतरकर अपनी क्षमता सिद्ध की।
रेल मंत्रालय ने जानकारी दी कि परीक्षण के दौरान ट्रेन के हर अहम पहलू—स्थिरता, कंपन,ब्रेकिंग,आपातकालीन ब्रेक और सुरक्षा तंत्र की बारीकी से जाँच की गई। परिणाम उत्साहजनक रहे। तेज रफ्तार पर भी ट्रेन का संतुलन बना रहा,डिब्बों के भीतर कंपन न्यूनतम रहा और ब्रेकिंग सिस्टम ने उम्मीद के अनुसार तत्परता दिखाई। इन सभी मापदंडों के आधार पर परीक्षण को पूर्ण रूप से सफल घोषित किया गया,जिससे यह संकेत मिलता है कि यह ट्रेन भविष्य में लंबी दूरी की रात्रिकालीन यात्राओं के लिए एक भरोसेमंद विकल्प बन सकती है।
केंद्रीय रेल,सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी इस सफलता को सार्वजनिक करते हुए सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया। वीडियो में ट्रेन को 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पटरियों पर दौड़ते हुए देखा जा सकता है। इसके साथ ही प्रसिद्ध “वाटर-ग्लास टेस्ट” भी दिखाया गया,जिसमें तेज रफ्तार के बावजूद गिलास में रखा पानी नहीं छलका। इस दृश्य ने न केवल ट्रेन की सस्पेंशन प्रणाली की मजबूती को उजागर किया,बल्कि यात्रियों के लिए मिलने वाले आरामदायक सफर का अनुमान भी स्पष्ट कर दिया।
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में कुल 16 कोच हैं और इसे विशेष रूप से लंबी दूरी की यात्राओं के लिए डिज़ाइन किया गया है। पारंपरिक स्लीपर ट्रेनों की तुलना में इसमें कई आधुनिक सुविधाएँ जोड़ी गई हैं। आरामदायक स्लीपर बर्थ,स्वचालित दरवाजे,उन्नत सस्पेंशन,आधुनिक शौचालय और डिजिटल सूचना प्रणाली यात्रियों को बेहतर अनुभव प्रदान करेंगे। ऊर्जा-दक्ष तकनीकों के उपयोग से यह ट्रेन संचालन लागत कम करने के साथ-साथ पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव डालेगी।
सुरक्षा के मोर्चे पर वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को अत्याधुनिक तकनीकों से सुसज्जित किया गया है। इसमें ‘कवच’ ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम लगाया गया है,जो ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने और संभावित टक्कर की स्थिति में स्वत: हस्तक्षेप करने में सक्षम है। इसके अलावा क्रैश-एब्जॉर्बिंग कपलर,एंटी-क्लाइंबर और अग्निरोधी दरवाजे जैसे फीचर्स आपात परिस्थितियों में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। ट्रेन में आग का पता लगाने और उस पर काबू पाने के लिए उन्नत सेंसर और कंट्रोल यूनिट्स भी मौजूद हैं।
ऊर्जा बचत के लिहाज से ट्रेन में रीजेनेरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम शामिल है,जो ब्रेक लगाने के दौरान उत्पन्न ऊर्जा को वापस उपयोगी शक्ति में बदल देता है। एसी सिस्टम में यूवी-वी आधारित हवा की सफाई तकनीक का इस्तेमाल किया गया है,जिससे डिब्बों के भीतर वायु गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है। चौड़े,सीलबंद गलियारे और केंद्रीय रूप से नियंत्रित स्वचालित दरवाजे यात्रियों की आवाजाही को सुगम बनाते हैं और शोर को भी कम करते हैं।
यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए आपात स्थिति में सीधे ट्रेन मैनेजर या लोको पायलट से संपर्क करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। दिव्यांग यात्रियों के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए कोच,रैंप और अनुकूलित शौचालय उनकी यात्रा को सहज बनाते हैं। रेलवे का कहना है कि इन सभी फीचर्स के साथ वंदे भारत स्लीपर ट्रेन भारतीय रेल यात्री सेवाओं में एक नया मानक स्थापित करेगी।
यह परियोजना कई मायनों में महत्वपूर्ण है। पहली बात,यह पूरी तरह स्वदेशी डिजाइन और निर्माण पर आधारित है,जिसने भारतीय इंजीनियरिंग कौशल और उद्योग की क्षमता को नई पहचान दी है। दूसरी बात,हाई-स्पीड क्षमता वाली स्लीपर ट्रेनें भविष्य में प्रमुख मार्गों पर यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी ला सकती हैं। इससे देश के विभिन्न हिस्सों के बीच संपर्क और भी सुदृढ़ होगा,साथ ही यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आरामदायक परिवहन विकल्प मिलेगा।
रेलवे विशेषज्ञ मानते हैं कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन भारतीय रेल नेटवर्क को एक नए युग में प्रवेश करवाने की क्षमता रखती है। जहाँ पहले हाई-स्पीड ट्रैवल को लेकर संदेह और सीमाएँ थीं,वहीं अब सुदृढ़ परीक्षणों और तकनीकी सुधारों के साथ यह विश्वास मजबूत हो रहा है कि भारतीय यात्री भी विश्व-स्तरीय ट्रेन सफर का अनुभव कर सकेंगे।
इस सफल परीक्षण के साथ रेलवे अब अगले चरण—वाणिज्यिक संचालन की तैयारियों पर ध्यान केंद्रित करेगा। विभिन्न रूटों पर परिचालन से पहले ट्रेन के रखरखाव,क्रू प्रशिक्षण और परिचालन प्रक्रियाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा। मंत्रालय का मानना है कि जैसे-जैसे ये ट्रेनें पटरियों पर उतरेंगी,भारतीय रेलवे का चेहरा बदलता नजर आएगा।
अंततः,वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का यह हाई-स्पीड परीक्षण केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं,बल्कि उस महत्वाकांक्षी दृष्टि का प्रतीक है,जिसमें भारत अपनी रेल प्रणाली को आधुनिक,सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाना चाहता है। यह परियोजना दिखाती है कि देश न केवल वैश्विक मानकों से कदम मिला सकता है,बल्कि कई क्षेत्रों में नेतृत्व भी कर सकता है। आने वाले दिनों में जब यह ट्रेन नियमित रूप से यात्रियों को गंतव्य तक पहुँचाएगी,तब यह उपलब्धि लाखों लोगों के अनुभव का हिस्सा बन जाएगी और भारतीय रेलवे की रफ्तार सचमुच नई दिशा में आगे बढ़ चुकी होगी।
