रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ के 68वें स्थापना दिवस पर वैज्ञानिकों की ‘उत्कृष्टता’ को सराहा(तस्वीर क्रेडिट@rajnathsingh)

डीआरडीओ के 68वें स्थापना दिवस पर राष्ट्र ने किया वैज्ञानिक कर्मियों के समर्पण को सलाम,आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता के संकल्प को दोहराया

नई दिल्ली,1 जनवरी (युआईटीवी)- रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के 68वें स्थापना दिवस के अवसर पर गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश के वैज्ञानिकों,इंजीनियरों और कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि संगठन ने भारत को मजबूत,सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने में अनूठी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि विज्ञान,प्रौद्योगिकी और रक्षा अनुसंधान के क्षेत्र में डीआरडीओ की निरंतर प्रगति राष्ट्र की सुरक्षा तैयारियों और रणनीतिक क्षमताओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रही है।

रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने संदेश में लिखा, “डीआरडीओ दिवस पर मैं सभी वैज्ञानिकों,कर्मचारियों और उनके परिवारों को दिल से बधाई देता हूँ। उनकी अटूट प्रतिबद्धता,वैज्ञानिक उत्कृष्टता और राष्ट्रीय कर्तव्य भावना ने भारत की रक्षा तैयारियों को मजबूत करने में अमूल्य योगदान दिया है। स्वदेशी और भविष्य के लिए तैयार तकनीकों के विकास के माध्यम से डीआरडीओ हमारी रणनीतिक स्वायत्तता और सशस्त्र बलों के आत्मविश्वास को सुदृढ़ कर रहा है। मैं पूरे डीआरडीओ परिवार के लिए नए वर्ष में सार्थक सफलताओं और राष्ट्र सेवा के निरंतर अवसरों की शुभकामनाएँ देता हूँ।”

डीआरडीओ की स्थापना वर्ष 1958 में उस दृष्टि के साथ की गई थी कि भारत रक्षा प्रौद्योगिकी में बाहरी निर्भरता से आगे बढ़कर स्वावलंबी बने। उस समय टेक्निकल डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट,इंडियन ऑर्डनेंस फैक्ट्रीज़ के डायरेक्टरेट ऑफ टेक्निकल डेवलपमेंट एंड प्रोडक्शन और डिफेंस साइंस ऑर्गनाइजेशन का विलय कर एक एकीकृत संस्थान का गठन किया गया। यह कदम न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान को दिशा देने के लिए था,बल्कि रक्षा जरूरतों के अनुरूप तकनीकी समाधान तैयार करने के लिए भी अहम था।

समय के साथ डीआरडीओ ने अपनी क्षमताओं का विस्तार किया। वर्ष 1979 में डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट सर्विस (डीआरडीएस) का गठन किया गया,ताकि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञ अधिकारियों के लिए एक समर्पित सेवा संरचना उपलब्ध हो। आज यह सेवा रक्षा मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में रहते हुए देश के प्रमुख वैज्ञानिक अभियानों की रीढ़ मानी जाती है।

डीआरडीओ वर्तमान में 52 उन्नत प्रयोगशालाओं के विशाल नेटवर्क के साथ कार्य कर रहा है। संगठन एयरोनॉटिक्स से लेकर मिसाइल विकास,इलेक्ट्रॉनिक्स,साइबर सुरक्षा,भूमि युद्ध प्रणालियों,नौसेना उपकरणों,सामग्री विज्ञान,जीवन विज्ञान और हथियार प्रणालियों तक के विस्तृत क्षेत्रों में अनुसंधान कर रहा है। इस विविधता ने डीआरडीओ को भारत के रक्षा क्षेत्र का सबसे बड़ा और सबसे व्यापक शोध संगठन बना दिया है।

आज संगठन के पास लगभग पाँच हजार डीआरडीएस वैज्ञानिक कार्यरत हैं,जबकि 25 हजार से अधिक तकनीकी और सहायक कर्मचारी विभिन्न परियोजनाओं में योगदान दे रहे हैं। ये सभी मिलकर आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप,नई तकनीकी चुनौतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा की जटिल जरूरतों के अनुरूप समाधान विकसित कर रहे हैं।

पिछले वर्षों में संगठन ने मिसाइल प्रौद्योगिकी,रडार,लड़ाकू विमान के घटक,स्वदेशी टैंक प्रणालियों,एंटी-ड्रोन क्षमताओं और अत्याधुनिक सुरक्षात्मक उपकरणों के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। आत्मनिर्भर भारत के अभियान के तहत डीआरडीओ ने उद्योग जगत और निजी कंपनियों के साथ साझेदारी बढ़ाई है,जिससे स्वदेशी रक्षा निर्माण में गति आई है। कई प्रणालियाँ अब न केवल देश के लिए बनाई जा रही हैं,बल्कि वैश्विक बाजार में भी प्रतिस्पर्धा कर रही हैं।

स्थापना दिवस पर विशेषज्ञों ने माना कि डीआरडीओ का सफर केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहा,बल्कि उसने युवा वैज्ञानिक प्रतिभाओं को भी प्रेरित किया है। विश्वविद्यालयों,स्टार्टअप्स और अनुसंधान संस्थानों के साथ सहयोग के माध्यम से संगठन नई पीढ़ी को रक्षा अनुसंधान में आकर्षित कर रहा है। इससे देश में नवाचार की संस्कृति मजबूत हो रही है।

रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि सीमाओं पर बदलते हालात,नई तकनीकी चुनौतियों और उभरते खतरों के दौर में डीआरडीओ की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। स्वदेशी प्रणालियों का विकास न केवल सुरक्षा के दृष्टिकोण से आवश्यक है,बल्कि यह विदेशी निर्भरता कम करने और आर्थिक संसाधनों की बचत करने में भी सहायक है।

स्थापना दिवस के इस अवसर पर कई कार्यक्रमों में संगठन के वैज्ञानिकों के योगदान को याद किया गया और उन परियोजनाओं पर चर्चा हुई,जिन्होंने भारत की सामरिक क्षमता को मजबूत किया। कई वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने इस अवसर पर भावी योजनाओं की झलक भी प्रस्तुत की,जिनमें उन्नत हथियार प्रणालियाँ,कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सुरक्षा समाधान और अगली पीढ़ी की मिसाइलें शामिल हैं।

डीआरडीओ दिवस केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं,बल्कि यह उस संकल्प की याद दिलाता है,जिसके साथ संगठन का जन्म हुआ था—भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाना और एक सुरक्षित भविष्य की नींव रखना। रक्षा मंत्री के संदेश ने भी यही रेखांकित किया कि वैज्ञानिक उत्कृष्टता और राष्ट्रीय सेवा का यह समन्वय आने वाले वर्षों में भी राष्ट्र को नई उपलब्धियों की ओर ले जाएगा।