यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@BBCHindi)

कमजोर शांति नहीं,टिकाऊ समाधान चाहता है यूक्रेन — जेलेंस्की का नए साल पर संदेश,युद्ध का अंत चाहिए, यूक्रेन का नहीं

कीव,1 जनवरी (युआईटीवी)- यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने नए साल की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को दिए अपने भावुक और दृढ़ संदेश में साफ कर दिया कि उनका देश शांति तो चाहता है,लेकिन किसी भी कीमत पर नहीं। करीब 21 मिनट के इस संबोधन में उन्होंने कहा कि युद्ध ने यूक्रेन के नागरिकों को बेहद थका दिया है,लोगों ने अपनों को खोया,घर उजड़े और पूरा जीवन अस्त-व्यस्त हो गया,लेकिन इसके बावजूद उनका संकल्प कमजोर नहीं पड़ा है। जेलेंस्की के शब्दों में, “हम युद्ध का अंत चाहते हैं,लेकिन यूक्रेन का अंत नहीं। अगर कोई सोचता है कि यूक्रेन थककर आत्मसमर्पण कर देगा,तो वह पूरी तरह गलत है।”

जेलेंस्की का यह बयान ऐसे समय आया है,जब दूसरी ओर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन लगातार यह दावा दोहरा रहे हैं कि रूस इस लंबी लड़ाई में अंततः जीत हासिल करेगा। पुतिन ने भी नए साल के मौके पर अपने सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि रूस अपने लड़ाकों और कमांडरों पर भरोसा करता है और अंत में विजय उसी की होगी। दोनों देशों के नेताओं के ये संदेश इस बात का संकेत हैं कि भले ही कूटनीतिक बातचीत चल रही हो,लेकिन जमीनी सच्चाई अब भी जटिल और तनावपूर्ण बनी हुई है।

अपने भाषण में जेलेंस्की ने इस संघर्ष की लंबाई पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह युद्ध अब लगभग चार साल का समय पार कर चुका है,जो इतिहास के लिहाज से बेहद लंबा दौर है। उन्होंने यह तुलना भी की कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मन कब्जे के कई दौर से यह समय अवधि अधिक लंबी हो चुकी है,लेकिन उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि थकान का अर्थ हार नहीं होता। लोगों के भीतर आज भी वही जज्बा,वही उम्मीद और वही विश्वास जीवित है,जिसने युद्ध के शुरुआती दिनों में पूरे राष्ट्र को एकजुट किया था।

यूक्रेनी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में यह भी रेखांकित किया कि शांति तभी स्वीकार्य होगी जब वह मजबूत,न्यायपूर्ण और विश्वसनीय सुरक्षा गारंटियों पर आधारित हो। उनके अनुसार,कमजोर या जल्दबाजी में किए गए किसी भी समझौते से न केवल यूक्रेन का भविष्य खतरे में पड़ेगा,बल्कि युद्ध के भड़क उठने की आशंका भी बनी रहेगी। उन्होंने कहा, “कमजोर समझौते पर किया गया हर हस्ताक्षर (साइन) युद्ध को बढ़ावा देगा। हम केवल उस समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे,जो आने वाले वर्षों के लिए हमारे बच्चों और देश को सुरक्षित करे।”

जेलेंस्की ने अपने संदेश में कूटनीतिक प्रयासों की वर्तमान स्थिति पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि विभिन्न देशों के साथ हालिया बातचीत,बैठकों और फोन कॉल्स का मकसद एक ऐसा ढाँचा तैयार करना है,जो लंबी अवधि के लिए स्थायी शांति सुनिश्चित कर सके। उनके अनुसार,अमेरिका की अगुवाई में चल रही चर्चाएँ अब अंतिम चरण में पहुँच चुकी हैं और संभावित शांति समझौते का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा तैयार हो चुका है,लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि शेष 10 प्रतिशत में ही सबसे कठिन और संवेदनशील मुद्दे शामिल हैं,जिन पर समाधान ढूँढना अब भी चुनौती बना हुआ है। यही हिस्सा तय करेगा कि आगे आने वाले समय में यूक्रेन और पूरे यूरोप का भविष्य किस दिशा में जाएगा।

यूक्रेनी मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए संबोधन में इशारों-इशारों में यह बात भी सामने आई कि रूस इस समय यूक्रेन के लगभग 19 प्रतिशत भूभाग पर नियंत्रण बनाए हुए है,जो मुख्य रूप से देश के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों में स्थित है। रूस चाहता है कि यूक्रेन पूर्वी डोनबास क्षेत्र से पूरी तरह पीछे हट जाए और वास्तविक नियंत्रण रेखा को ही नई सीमा मान लिया जाए,लेकिन जेलेंस्की ने इस सोच को यूक्रेन के साथ “धोखा” बताते हुए अस्वीकार कर दिया। उनके अनुसार,किसी भी देश से उसके वैधानिक भूभाग को छोड़ने के लिए कहना सीधे-सीधे उसकी संप्रभुता पर हमला है और यह बात यूक्रेन के लिए अस्वीकार्य है।

साथ ही,जेलेंस्की ने यह भी माना कि युद्ध ने समाज के हर वर्ग को प्रभावित किया है। लाखों लोग शरणार्थी बनकर अपने घरों से दूर रहने को मजबूर हुए,बच्चों की शिक्षा बाधित हुई,अस्पतालों और बुनियादी ढाँचे को भारी नुकसान पहुँचा। फिर भी उन्होंने नागरिकों के साहस और धैर्य की सराहना करते हुए कहा कि इसी एकजुटता ने यूक्रेन को अब तक सँभाले रखा है। उन्होंने सेना,स्वयंसेवकों और अंतर्राष्ट्रीय सहयोगियों का आभार जताया,जिन्होंने लगातार सहायता और समर्थन दिया।

दूसरी ओर,पुतिन का संदेश रूस के घरेलू दर्शकों के लिए अधिक उत्साहवर्धन और जीत के भरोसे पर केंद्रित रहा। उन्होंने मोर्चे पर तैनात सैनिकों को “हीरो” बताते हुए कहा कि वे देश की सुरक्षा और गौरव की रक्षा कर रहे हैं। पुतिन ने संकेत दिया कि रूस अपने लक्ष्यों से पीछे नहीं हटेगा और यही बात संघर्ष को और पेचीदा बना देती है। कूटनीतिक प्रयास जारी रहने के बावजूद,दोनों पक्षों के कड़े रुख यह दर्शाते हैं कि किसी भी समझौते पर सहमति बनाना आसान नहीं होगा।

जेलेंस्की के संदेश का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह था कि यूक्रेन किसी “कमजोर शांति” के साथ आगे नहीं बढ़ सकता। उन्होंने कहा कि अगर समझौता केवल कागजी शांति साबित हुआ और सुरक्षा की ठोस गारंटी नहीं दे सका,तो आने वाला हर साल अनिश्चितता और नए खतरों से भरा होगा। इसलिए,यूक्रेन एक ऐसे समाधान की तलाश में है,जो न केवल गोलाबारी रोके,बल्कि देश की स्वतंत्रता,सीमाओं और जनता के अधिकारों की रक्षा भी सुनिश्चित करे।

नए साल के मौके पर यह भाषण यूक्रेन के नागरिकों के लिए उम्मीद और चेतावनी—दोनों का मिश्रण था। उम्मीद इसलिए कि शांति की दिशा में बातचीत आगे बढ़ रही है और समाधान संभव दिख रहा है। चेतावनी इसलिए कि कमजोर फैसले भविष्य में और बड़े संकट का कारण बन सकते हैं। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि कूटनीतिक प्रयास वास्तव में शांति का रास्ता बनाते हैं या फिर युद्ध का यह अध्याय और लंबा खिंचता है,लेकिन फिलहाल इतना तो तय है कि यूक्रेन अपने भविष्य से समझौता करने को तैयार नहीं और उसकी नेतृत्व-रेखा यही संदेश दुनिया तक पहुँचाना चाहती है।