वंदे भारत स्लीपर ट्रेन (तस्वीर क्रेडिट@alwar_junction)

देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन जल्द गुवाहाटी-हावड़ा रूट पर दौड़ेगी,लंबी दूरी की यात्रा होगी और भी आरामदायक व किफायती

नई दिल्ली,2 जनवरी (युआईटीवी)- भारतीय रेलवे नए साल की शुरुआत में यात्रियों के लिए एक बड़ा उपहार लेकर आ रहा है। देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन अब जल्द ही पटरियों पर दौड़ती दिखाई देगी। यह आधुनिक और हाई-टेक ट्रेन पश्चिम बंगाल के हावड़ा (कोलकाता) और असम के गुवाहाटी के बीच चलाई जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके शुभारंभ को हरी झंडी दिखाएँगे,जिसके साथ ही भारतीय रेल के इतिहास में एक और नया अध्याय जुड़ जाएगा।

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जानकारी देते हुए कहा कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में यात्रा करना आम यात्रियों के लिए सुविधाजनक ही नहीं,बल्कि आर्थिक रूप से भी काफी किफायती साबित होगा। उनके अनुसार,हावड़ा–गुवाहाटी रूट पर हवाई यात्रा का किराया सामान्यतः 6,000 से 8,000 रुपए के बीच होता है,जबकि वंदे भारत स्लीपर में यात्रियों को उसी दूरी की यात्रा काफी कम खर्च में मिलेगी। थर्ड एसी का किराया भोजन सहित करीब 2,300 रुपए,सेकंड एसी लगभग 3,000 रुपए और फर्स्ट एसी लगभग 3,600 रुपए रखा गया है। यह किराया खासतौर पर मध्यम वर्ग और नियमित यात्रियों को ध्यान में रखकर तय किया गया है,ताकि लोग आरामदायक रात्री-यात्रा का विकल्प चुन सकें और जेब पर भी अतिरिक्त बोझ न पड़े।

रेल मंत्री ने बताया कि अब तक वंदे भारत एक्सप्रेस की चेयर कार सेवाओं ने देशभर के यात्रियों के बीच भरोसा और लोकप्रियता दोनों जीते हैं। हर राज्य से इन ट्रेनों की माँग बढ़ना इस बात का प्रमाण है कि लोग तेज,सुरक्षित और साफ-सुथरी यात्रा को प्राथमिकता देने लगे हैं। इसी भरोसे को और आगे बढ़ाते हुए भारतीय रेलवे अब स्लीपर संस्करण लेकर आया है,जो लंबी दूरी और रात में सफर करने वाले यात्रियों को नई सुविधा देगा। उनका कहना था कि जैसे चेयर कार ने इंटरसिटी यात्रा का स्वरूप बदला,वैसे ही वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें लंबी दूरी की यात्रा का अनुभव नए स्तर पर ले जाएँगी।

अश्विनी वैष्णव ने संकेत दिया कि यह सेवा अगले 15 से 20 दिनों के भीतर शुरू की जा सकती है। उन्होंने बताया कि 18 या 19 जनवरी के आसपास उद्घाटन संभावित है,हालाँकि,अंतिम तारीख प्रधानमंत्री कार्यालय की स्वीकृति के बाद घोषित की जाएगी। ट्रेनसेट पूरी तरह तैयार है और विस्तृत तकनीकी परीक्षणों के बाद इसे यात्रियों के लिए उतारने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। इसके साथ ही रेलवे ने संचालन,रखरखाव और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं को भी अंतिम रूप दे दिया है।

पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में कुल 16 कोच होंगे। इनमें 11 एसी थ्री-टियर, 4 एसी टू-टियर और 1 एसी फर्स्ट क्लास कोच शामिल होंगे। कुल मिलाकर यह ट्रेन एक समय में करीब 823 यात्रियों को यात्रा सुविधा प्रदान करेगी। रेलवे के मुताबिक,यह रूट पूर्वोत्तर भारत के लिए बेहद अहम है,क्योंकि इससे गुवाहाटी सहित आसपास के क्षेत्रों को देश के बड़े शहरी केंद्रों से और मजबूत रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे न केवल यात्रियों की आवाजाही आसान होगी,बल्कि व्यापार,पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

तकनीकी दृष्टि से देखें तो वंदे भारत स्लीपर ट्रेन भारतीय रेलवे की अब तक की सबसे आधुनिक स्लीपर ट्रेन कही जा सकती है। इसकी डिजाइन स्पीड 180 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है। हाल ही में कोटा–नागदा खंड पर हाई-स्पीड ट्रायल किए गए,जिनमें ट्रेन ने 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार को सफलतापूर्वक छुआ। परीक्षण के दौरान ट्रेन की स्थिरता और सस्पेंशन सिस्टम की मजबूती का खासतौर पर परीक्षण किया गया। रेल मंत्री ने बताया कि “वॉटर टेस्ट” के दौरान इतनी तेज रफ्तार पर भी कोच के भीतर रखे पानी के गिलास हिले तक नहीं। यह प्रयोग ट्रेन के संतुलन,डिजाइन और तकनीक की गुणवत्ता को दर्शाता है।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस ट्रेन में अत्याधुनिक ब्रेकिंग सिस्टम,बेहतर सस्पेंशन,कम शोर वाले कोच और उन्नत सेफ्टी फीचर्स दिए गए हैं। हर कोच में बेहतर प्रकाश व्यवस्था,आरामदायक सीट-बर्थ डिजाइन और सुरक्षित लगेज स्पेस उपलब्ध होगा। इसके अलावा,स्वच्छता और मेंटेनेंस के लिए विशेष प्रोटोकॉल तैयार किए गए हैं,जिससे यात्रा के दौरान यात्रियों को साफ-सुथरा वातावरण मिल सके। ट्रेन के अंदर तापमान नियंत्रण प्रणाली और आधुनिक सूचना डिस्प्ले यात्रियों के अनुभव को और सहज बनाएँगे।

अश्विनी वैष्णव ने यह भी जानकारी दी कि आने वाले छह महीनों के भीतर आठ और वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें शुरू करने की योजना है। साल 2026 के अंत तक इनकी संख्या 12 तक पहुँच जाएगी। भविष्य में भारतीय रेलवे पूरे देश में 200 से अधिक वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें चलाने का लक्ष्य रखता है। यह योजना संकेत देती है कि रेलवे न केवल अपने नेटवर्क का विस्तार करना चाहता है,बल्कि यात्रियों को समय के साथ नई तकनीक और बेहतर सुविधा भी देना चाहता है।

रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें भारतीय रेल की पारंपरिक लंबी दूरी वाली ट्रेनों के लिए आधुनिक विकल्प साबित होंगी। इससे यात्रा का समय कम होने के साथ-साथ सुरक्षा और आराम का स्तर भी काफी बढ़ जाएगा। खासतौर पर उन यात्रियों के लिए,जो नियमित रूप से काम,शिक्षा या व्यवसाय के सिलसिले में लंबी दूरी तय करते हैं,यह एक बड़ा बदलाव होगा।

वंदे भारत परियोजना प्रधानमंत्री मोदी के “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” अभियानों से सीधे जुड़ी है। ट्रेन के अधिकांश उपकरण और तकनीक देश के भीतर विकसित की गई है। इससे न केवल रेलवे क्षेत्र में तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी,बल्कि रोजगार और औद्योगिक विकास के नए अवसर भी तैयार होंगे।

जैसे-जैसे पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के उद्घाटन का समय नजदीक आ रहा है,यात्रियों में उत्सुकता बढ़ती जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि यह ट्रेन न केवल यात्रा के अनुभव को बदल देगी,बल्कि भारतीय रेल के भविष्य की दिशा भी तय करेगी। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा,तो आने वाले वर्षों में देशभर की लंबी दूरी की यात्राएँ पहले से कहीं अधिक तेज,सुरक्षित और आरामदायक होंगी और वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें इस बदलाव की अग्रदूत साबित होंगी।