वाशिंगटन,5 जनवरी (युआईटीवी)- अमेरिका के मैरीलैंड राज्य में एक दर्दनाक वारदात ने भारतीय समुदाय को गहरे सदमे में डाल दिया है। एलिसॉट सिटी में रहने वाली 27 वर्षीय निकिता गोडिशला,जो एक उभरती हुई हेल्थकेयर और डेटा एनालिटिक्स प्रोफेशनल थीं,उनका शव कोलंबिया स्थित एक अपार्टमेंट से बरामद किया गया। पुलिस की प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि उनकी चाकू से गोदकर हत्या की गई थी। इस मामले में पुलिस ने युवती के पूर्व साथी 26 वर्षीय अर्जुन शर्मा पर फर्स्ट-डिग्री और सेकंड-डिग्री मर्डर के आरोप दर्ज किए हैं और अब उसकी तलाश अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर की जा रही है।
हॉवर्ड काउंटी पुलिस के अनुसार, 3 जनवरी को जब पुलिस टीम ने ट्विन रिवर्स रोड के 10100 ब्लॉक स्थित अपार्टमेंट की तलाशी ली,तो अंदर से निकिता का शव मिला। यह वही अपार्टमेंट था,जिसे अर्जुन शर्मा का निवास बताया जा रहा है। फोरेंसिक जाँच में यह संकेत मिले हैं कि हत्या 31 दिसंबर की शाम,नए साल की पूर्व संध्या के तुरंत बाद हुई होगी। पुलिस का कहना है कि घटनास्थल से मिले सबूत यह दर्शाते हैं कि वारदात को अत्यंत निर्दयी तरीके से अंजाम दिया गया है और इसमें चाकू का इस्तेमाल हुआ।
इस मामले में एक बड़ा मोड़ तब आया जब पता चला कि अर्जुन शर्मा ने खुद 2 जनवरी को पुलिस थाने में निकिता के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसने पुलिस को बताया था कि उसने निकिता को आखिरी बार 31 दिसंबर को अपने अपार्टमेंट में देखा था,लेकिन कुछ ही घंटों बाद जाँचकर्ताओं को यह जानकारी मिली कि उसी दिन अर्जुन ने अमेरिका छोड़ दिया और भारत के लिए उड़ान भर ली। पुलिस का मानना है कि यह रवाना होना महज संयोग नहीं था,बल्कि संभवतः एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
जाँच एजेंसियों ने अर्जुन शर्मा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। अमेरिकी अधिकारी भारतीय एजेंसियों के साथ संपर्क बनाए हुए हैं,ताकि जहाँ भी वह मौजूद हो,उसे कानून के दायरे में लाया जा सके। चूँकि अमेरिका और भारत के बीच प्रत्यर्पण संधि है,इसलिए सिद्धांततः गंभीर अपराधों के मामलों में अभियुक्त को वापस अमेरिका लाया जा सकता है। हालाँकि,ऐसी प्रक्रिया अक्सर लंबी होती है,जिसमें अदालतों की विस्तृत कानूनी समीक्षा,दस्तावेजी कार्यवाही और कूटनीतिक समन्वय शामिल होता है। विशेषज्ञों के अनुसार,अगर पर्याप्त सबूत प्रस्तुत किए जाते हैं,तो प्रत्यर्पण संभव है,लेकिन इस प्रक्रिया में महीनों लग सकते हैं।
फिलहाल पुलिस इस बात की जाँच कर रही है कि क्या हत्या पहले से प्लान की गई थी या फिर किसी विवाद के दौरान अचानक यह वारदात घटित हुई। अमेरिकी कानून में फर्स्ट-डिग्री मर्डर का अर्थ होता है पूर्व नियोजित हत्या,जबकि सेकंड-डिग्री मर्डर उन मामलों में लगाया जाता है,जहाँ हत्या जानबूझकर तो की गई हो,लेकिन उसकी योजना पहले नहीं बनाई गई हो। दोनों ही आरोप बेहद गंभीर हैं और दोष सिद्ध होने पर सख्त सजा का प्रावधान है।
निकिता गोडिशला का जीवन अपने आप में एक प्रेरणादायक कहानी रहा। उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार,वे हेल्थकेयर,क्लिनिकल रिसर्च और डेटा एनालिटिक्स के क्षेत्र में सक्रिय रूप से काम कर रही थीं। उनका लक्ष्य तकनीक और डेटा के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना,इलाज की गुणवत्ता सुधारना और मरीजों के परिणाम बेहतर करना था। उन्हें नियामक अनुपालन,हेल्थ क्वालिटी सिस्टम और डेटा प्रबंधन का व्यापक अनुभव था और वे इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए कई परियोजनाओं पर कार्यरत थीं।
शिक्षा के क्षेत्र में भी निकिता ने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की थीं। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड बाल्टीमोर काउंटी से हेल्थ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में मास्टर डिग्री प्राप्त की थी। इससे पहले भारत में जवाहरलाल नेहरू टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से डॉक्टर ऑफ फार्मेसी की डिग्री हासिल की। बेहतर अवसरों और एक सार्थक करियर की तलाश में उन्होंने अमेरिका का रुख किया था। वे अपने परिवार और साथियों के बीच मेहनती,संवेदनशील और दूरदर्शी युवती के तौर पर जानी जाती थीं।
उनकी अचानक हुई मौत ने न केवल उनके परिवार,बल्कि भारतीय मूल के समुदाय को भी दुख और आक्रोश से भर दिया है। सोशल मीडिया पर कई लोग न्याय की माँग कर रहे हैं और उम्मीद जता रहे हैं कि आरोपी को जल्द पकड़ा जाएगा। निकिता के परिचितों का कहना है कि वे हमेशा मुस्कुराते हुए मुश्किल परिस्थितियों का सामना करती थीं और अपने काम के प्रति बेहद समर्पित थीं।
जाँचकर्ता अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि निकिता और अर्जुन के संबंधों में हाल के दिनों में क्या उतार-चढ़ाव आए थे। पुलिस यह जानना चाहती है कि क्या उनके बीच किसी तरह का विवाद चल रहा था,क्या कोई धमकी या हिंसा का इतिहास था या फिर यह मामला अचानक भड़की भावनाओं का नतीजा बन गया। पुलिस डिजिटल रिकॉर्ड्स,फोन कॉल्स,मैसेज और सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण कर रही है,ताकि घटनाओं की सटीक कड़ी जोड़ी जा सके।
अंतर्राष्ट्रीय अपराधों से जुड़े मामलों में अक्सर कई कानूनी पेच सामने आते हैं। प्रत्यर्पण के लिए यह साबित करना होता है कि अभियुक्त के खिलाफ लगाए गए आरोप उस देश में भी अपराध हैं,जहाँ वह मौजूद है। साथ ही,यह सुनिश्चित करना होता है कि उसके साथ न्यायिक प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होगी। इसी वजह से ऐसी कार्यवाहियों में समय लगता है,लेकिन अमेरिकी एजेंसियों का कहना है कि वे इस मामले में पूरी गंभीरता के साथ आगे बढ़ रही हैं।
निकिता की हत्या ने एक बार फिर विदेशों में रहने वाले भारतीय छात्रों और पेशेवरों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि रिश्तों में हिंसा और व्यक्तिगत विवाद अक्सर खतरनाक रूप ले सकते हैं,इसलिए ऐसे मामलों को समय रहते गंभीरता से सँभालना जरूरी है। समुदाय संगठनों ने भी युवाओं से अपील की है कि वे किसी भी तरह के खतरे या हिंसक व्यवहार के संकेत मिलने पर तुरंत कानून प्रवर्तन एजेंसियों से संपर्क करें।
फिलहाल इस मामले की जाँच जारी है और अधिकृत बयान के अनुसार,अभी तक हत्या के स्पष्ट मकसद का खुलासा नहीं हुआ है। पुलिस को उम्मीद है कि फोरेंसिक रिपोर्ट और डिजिटल सबूतों के आधार पर जल्द ही कई पहेलियाँ सुलझ जाएँगी। दूसरी ओर,निकिता के परिजन अपनी बेटी के लिए न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उनके सपने और मेहनत इस तरह अचानक खत्म हो जाना,हर किसी के लिए एक भावुक करने वाली त्रासदी बन गया है।
अंततः यह मामला सिर्फ एक आपराधिक जाँच नहीं,बल्कि भरोसे,सुरक्षा और न्याय की उस लंबी प्रक्रिया का हिस्सा बन गया है,जो सीमा-पार अपराधों के संदर्भ में और भी जटिल हो जाती है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आरोपी को पकड़कर अदालत के सामने पेश किया जा सकेगा और क्या निकिता को न्याय मिल पाएगा।
