भारतीय तटरक्षक बल में 'समुद्र प्रताप' शामिल हुआ (तस्वीर क्रेडिट@DefProdnIndia)

समुद्री सुरक्षा में नया मील का पत्थर: आईसीजीएस ‘समुद्र प्रताप’ से तटरक्षक बल की क्षमता हुई और मजबूत

नई दिल्ली,7 जनवरी (युआईटीवी)- भारत ने समुद्री सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए देश के पहले स्वदेशी रूप से डिजाइन किए गए प्रदूषण नियंत्रण पोत,आईसीजीएस ‘समुद्र प्रताप’,को आधिकारिक रूप से भारतीय तटरक्षक बल में शामिल कर लिया है। इस आधुनिक जहाज का कमीशन होना न केवल तकनीकी और औद्योगिक आत्मनिर्भरता का प्रतीक है,बल्कि यह देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा,प्रदूषण नियंत्रण और आपदा प्रबंधन की क्षमता को भी नई मजबूती प्रदान करता है।

इस अवसर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशेष और ऐतिहासिक करार दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखते हुए कहा कि आईसीजीएस समुद्र प्रताप का कमीशन होना कई मायनों में महत्वपूर्ण है—यह आत्मनिर्भर भारत के विजन को बल देता है,राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करता है और साथ ही सतत विकास के प्रति भारत की गंभीर प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। प्रधानमंत्री के संदेश में यह स्पष्ट रूप से झलका कि सरकार समुद्री क्षेत्र में उन्नत तकनीक और स्वदेशी निर्माण क्षमताओं के जरिए दीर्घकालिक रणनीतिक तैयारियों को मजबूत करना चाहती है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कमीशनिंग समारोह में शामिल होकर इस उपलब्धि को भारत के रक्षा औद्योगिक इकोसिस्टम का बड़ा प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित यह पोत देश में विकसित कौशल,अनुसंधान और आधुनिक शिपबिल्डिंग तकनीकों का नतीजा है। उनके अनुसार,समुद्र प्रताप भारत की परिपक्व होती रक्षा उद्योग क्षमता का परिचायक है और यह दिखाता है कि देश अब जटिल समुद्री प्लेटफॉर्म्स के निर्माण में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

रक्षामंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि भारतीय तटरक्षक बल की बहुआयामी भूमिका ने संभावित दुश्मनों को साफ संदेश दिया है कि भारत किसी भी प्रकार के दुस्साहस का उपयुक्त और कड़ा जवाब देने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि भारत एक जिम्मेदार समुद्री शक्ति के रूप में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति,स्थिरता और सुरक्षित समुद्री व्यापार मार्गों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। आईसीजीएस समुद्र प्रताप को इसी व्यापक रणनीतिक परिप्रेक्ष्य में एक अहम संपत्ति के रूप में देखा जा रहा है।

समुद्र प्रताप विशेष रूप से प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरणीय आपदाओं से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है। समुद्र में तेल रिसाव या रासायनिक पदार्थों के फैलाव जैसी घटनाएँ न केवल समुद्री जीव-जंतुओं बल्कि तटीय समुदायों,पर्यटन और व्यापार पर भी गंभीर असर डालती हैं। इस पोत में अत्याधुनिक उपकरण लगे हैं,जो ऐसे प्रदूषण को कुशलतापूर्वक रोकने और नियंत्रित करने में मदद करते हैं। साथ ही,यह जहाज आग बुझाने,बचाव अभियानों और आपात स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया देने के लिए भी सुसज्जित है। इससे भारतीय तटरक्षक बल की परिचालन क्षमता कई गुना बढ़ने की उम्मीद है।

इसके अलावा,आईसीजीएस समुद्र प्रताप विस्तारित समुद्री निगरानी और सुरक्षा मिशनों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत के विशालतम विशेष आर्थिक क्षेत्र और लंबी समुद्री सीमाओं की निगरानी एक बड़ी चुनौती है। यह पोत ऐसे मिशनों में तटरक्षक बल को अधिक लचीला,तेज और प्रभावी बनाता है। जहाज की रेंज,गति और तकनीकी क्षमताएँ इसे समुद्री तस्करी,अवैध मछली पकड़ने और अनाधिकृत घुसपैठ जैसी गतिविधियों पर निगरानी रखने में भी मददगार बनाती हैं।

स्वदेशी निर्माण इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है। गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा विकसित यह पोत ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियानों के वास्तविक परिणामों को सामने लाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रोजेक्ट्स से न केवल घरेलू उद्योग को प्रोत्साहन मिलता है,बल्कि रोजगार,अनुसंधान और निर्यात संभावनाओं में भी वृद्धि होती है। लंबे समय में यह भारत को वैश्विक रक्षा और समुद्री उपकरण बाजार में एक भरोसेमंद खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में मदद कर सकता है।

समुद्र प्रताप का इंडक्शन ऐसे समय में हुआ है,जब विश्व भर में समुद्री सुरक्षा चुनौतियाँ तेजी से बदल रही हैं। जलवायु परिवर्तन,समुद्री यातायात में बढ़ोतरी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा ने समुद्री बलों के सामने नई जिम्मेदारियाँ रख दी हैं। ऐसे परिदृश्य में एक आधुनिक,बहुउद्देशीय और पर्यावरण-अनुकूल पोत का शामिल होना भारत की सामरिक तैयारियों को एक नई दिशा देता है।

तटरक्षक बल के अधिकारियों का मानना है कि यह जहाज प्रशिक्षण,संयुक्त अभ्यास और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के नए अवसर भी पैदा करेगा। भारत पहले से ही कई देशों के साथ समुद्री सुरक्षा और सर्च-एंड-रेस्क्यू अभियानों में सहयोग करता रहा है। समुद्र प्रताप जैसे प्लेटफॉर्म इन पहलों को और प्रभावी बनाएँगे तथा क्षेत्रीय स्तर पर भरोसे और समन्वय को मजबूत करेंगे।

आईसीजीएस ‘समुद्र प्रताप’ का कमीशन होना सिर्फ एक जहाज का तटरक्षक बेड़े में शामिल होना नहीं,बल्कि भारत के समुद्री भविष्य की एक व्यापक और दूरदर्शी परिकल्पना का हिस्सा है। यह पोत प्रदूषण नियंत्रण से लेकर सुरक्षा और आपदा प्रबंधन तक,कई मोर्चों पर देश की क्षमता बढ़ाएगा। साथ ही यह संदेश भी देगा कि भारत अपने समुद्री हितों की रक्षा करते हुए पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्रीय स्थिरता—दोनों को समान महत्व देता है।