केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (तस्वीर क्रेडिट@NeeluYa85999076)

जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा पर आज अहम मंथन: अमित शाह की अध्यक्षता में उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक

नई दिल्ली,7 जनवरी (युआईटीवी)- जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा परिस्थितियों को लेकर केंद्र सरकार आज एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। गुरुवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में उच्च-स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी,जिसमें केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा सहित पुलिस,सिविल प्रशासन,केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और खुफिया एजेंसियों के शीर्ष अधिकारी हिस्सा लेंगे। वर्ष 2026 में जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में यह पहली बड़ी समीक्षा बैठक है,इसलिए स्वाभाविक तौर पर इसकी चर्चा रणनीतिक हलकों में तेज़ हो गई है।

यह बैठक ऐसे समय हो रही है,जब जम्मू क्षेत्र के पर्वतीय और दूरदराज के इलाकों में सुरक्षाबल लगातार आतंकवाद-रोधी अभियानों में जुटे हुए हैं। पिछले कुछ महीनों में सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच कई मुठभेड़ें हुई हैं,खासकर किश्तवाड़,डोडा और उधमपुर जैसे जिलों के ऊपरी हिस्सों में। इन अभियानों के दौरान बड़ी संख्या में आतंकी साजिशों को नाकाम किया गया है,जबकि कई संदिग्ध ठिकानों को भी ध्वस्त किया गया है। इसके अलावा,लाइन ऑफ कंट्रोल और अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर घुसपैठ की कोशिशों को रोकने के लिए भी सुरक्षा एजेंसियां चौकन्नी हैं।

अधिकारियों के अनुसार,बैठक में सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। विशेष ध्यान इस बात पर होगा कि दुर्गम और पहाड़ी इलाकों में छिपे आतंकवादियों का व्यवस्थित तरीके से सफाया कैसे किया जाए और साथ-साथ एलओसी तथा अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर “जीरो इनफिल्ट्रेशन” यानी शून्य घुसपैठ का लक्ष्य किस तरह हासिल किया जाए। इसके लिए सेना,सीएपीएफ,जम्मू-कश्मीर पुलिस और खुफिया तंत्र के बीच बेहतर समन्वय को और मजबूत बनाने पर जोर दिया जाएगा।

बैठक में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के अलावा मुख्य सचिव अटल डुल्लू,गृह सचिव चंद्रकर भारती,पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात,इंटेलिजेंस प्रमुख नीतीश कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन के साथ सभी प्रमुख केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के प्रमुख भी बैठक में हिस्सा लेंगे। माना जा रहा है कि ये अधिकारी गृह मंत्री को मौजूदा सुरक्षा स्थिति का समग्र आकलन प्रस्तुत करेंगे और भविष्य के लिए सुझाव देंगे।

यह भी उम्मीद की जा रही है कि बैठक में सर्दियों के मौसम के दौरान एलओसी और आईबी पर बढ़ती घुसपैठ की कोशिशों से निपटने के लिए उठाए गए कदमों की समीक्षा होगी। सर्दियों में ऊँचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और प्रतिकूल मौसम के कारण निगरानी मुश्किल हो जाती है,जिसका फायदा उठाकर आतंकवादी सीमा पार से घुसने की कोशिश करते हैं। इसी वजह से निगरानी उपकरणों के उन्नयन, ड्रोन-सर्विलांस और संयुक्त गश्त जैसे उपायों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

खुफिया रिपोर्ट्स के हवाले से यह भी संकेत मिल रहे हैं कि आतंकवादी समूह पाकिस्तान सेना और आईएसआई की मदद से एलओसी और अंतर्राष्ट्रीय सीमा के विभिन्न सेक्टरों में अवसर तलाश रहे हैं। इन रिपोर्टों के बाद से सुरक्षाबलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त जवानों की तैनाती के साथ-साथ नाकेबंदी और तलाशी अभियानों को तेज कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि सीमा पार के लॉन्च-पैड्स पर सक्रियता बढ़ी है,जिसे देखते हुए हर स्तर पर सतर्कता और भी जरूरी हो गई है।

पिछले कुछ समय में जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा परिदृश्य में एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिला है। जहाँ एक ओर घाटी के कई हिस्सों में हिंसा की घटनाएँ कम हुई हैं,वहीं जम्मू क्षेत्र के दूरस्थ पहाड़ी इलाकों में आतंकवादियों की गतिविधियाँ बढ़ने की कोशिशें दिखाई दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा बलों के लगातार दबाव के कारण आतंकवादी अब कम आबादी वाले और कठिन भौगोलिक इलाकों में शरण लेने की रणनीति अपना रहे हैं। ऐसे में,अभियानों को सफल बनाने के लिए बेहतर स्थानीय खुफिया जानकारी और आधुनिक तकनीक दोनों की अहम भूमिका होगी।

बैठक में यह भी चर्चा हो सकती है कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए विकास परियोजनाओं को गति कैसे दी जाए। केंद्र सरकार का मानना है कि सुरक्षा और विकास,दोनों साथ-साथ चलें तो ही क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित हो सकती है। इसलिए सड़क,स्वास्थ्य,शिक्षा और पर्यटन जैसी पहलों को भी सुरक्षा परिदृश्य के साथ जोड़कर देखा जा रहा है।

नई दिल्ली में होने वाली यह उच्च-स्तरीय बैठक केवल औपचारिक समीक्षा नहीं, बल्कि आने वाले महीनों के लिए रणनीति तय करने का मंच मानी जा रही है। गृह मंत्री अमित शाह को सुरक्षा एजेंसियां न केवल हालिया अभियानों की जानकारी देंगी,बल्कि संभावित खतरों और उनके समाधान पर भी रोडमैप पेश करेंगी। सीमा पार से जारी कोशिशों,स्थानीय स्तर पर सक्रिय मॉड्यूल्स और आधुनिक तकनीकों के उपयोग—सब पर व्यापक चर्चा की उम्मीद है।

जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति हमेशा से राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। इस पृष्ठभूमि में आयोजित यह बैठक इस बात का संकेत है कि केंद्र सरकार किसी भी तरह की ढिलाई के बिना,सख्त और समन्वित रणनीति के साथ आगे बढ़ना चाहती है। आने वाले दिनों में इस बैठक के फैसलों का असर ज़मीनी स्तर पर भी दिखाई देगा और यह तय करेगा कि आतंकवाद-रोधी मोर्चे पर भारत अपनी तैयारियों को किस तरह और मज़बूत बनाता है।