सिडनी,7 जनवरी (युआईटीवी)- सिडनी टेस्ट के चौथे दिन पहला सत्र इंग्लैंड के लिए उम्मीद के बजाय चिंता लेकर आया। टीम के कप्तान और ऑलराउंडर बेन स्टोक्स चोटिल होकर मैदान से बाहर चले गए,जिससे इंग्लैंड का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया। जिस समय स्टोक्स मैदान छोड़ रहे थे,तब ऑस्ट्रेलिया मजबूती के साथ खेल रही थी और इंग्लैंड की योजनाएँ अचानक अस्त-व्यस्त हो गईं। चोट के बाद टीम को न केवल गेंदबाजी में असर दिखा,बल्कि नेतृत्व की कमी भी महसूस होने लगी।
बुधवार सुबह खेल शुरू होते ही स्टोक्स अपने स्पेल में लय पकड़ने की कोशिश कर रहे थे,लेकिन दूसरे ओवर की चौथी गेंद डालने के बाद वह अचानक दर्द से कराह उठे और स्पष्ट दिखाई देने लगा कि कुछ गंभीर समस्या है। यह उनके स्पेल का 28वां ओवर था और उस समय ऑस्ट्रेलिया ने 7 विकेट पर 523 रन बना लिए थे। इसी दौरान उन्होंने फील्ड छोड़ने का इशारा किया और फिजियो के साथ पवेलियन लौट गए। उनके ओवर की बची गेंदें जैकब बेथेल ने पूरी कीं,जबकि कप्तानी की जिम्मेदारी हैरी ब्रूक को सौंप दी गई।
इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड द्वारा जारी प्रारंभिक अपडेट के अनुसार,स्टोक्स को दाहिनी जांघ की मांसपेशी,विशेष रूप से एडडक्टर क्षेत्र में दर्द महसूस हुआ। टीम प्रबंधन ने बताया कि उनकी स्कैनिंग और मेडिकल जाँच जारी है और अगले कुछ घंटों में स्थिति स्पष्ट होगी। हालाँकि,इस बीच टीम के भीतर चिंता का माहौल बन गया है,क्योंकि स्टोक्स न केवल कप्तान हैं,बल्कि मध्यक्रम और गेंदबाजी इकाई दोनों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। उनकी अनुपस्थिति इंग्लैंड की रणनीति पर सीधा असर डालती दिखाई दी।
दिलचस्प बात यह है कि स्टोक्स का वही ओवर दो बार चर्चा में रहा। मैदान छोड़ने से पहले उन्होंने चौथी गेंद फेंकी और उसी के बाद अचानक रुक गए। यह चोट उस समय हुई,जब इंग्लैंड पहले ही लंबे स्पेल के दबाव में था और गेंदबाज थकान झेल रहे थे। ऐसे में एक अनुभवी गेंदबाज और कप्तान का जाना टीम के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। बेन स्टोक्स पिछले कुछ महीनों से फिटनेस चुनौतियों से जूझते रहे हैं और इससे इस चोट पर सवाल और गंभीर हो गए हैं कि क्या उन्हें पहले से अधिक आराम दिया जाना चाहिए था।
इस दौरान ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी शानदार रही। टीम ने 567 रन पर पारी घोषित की,जिससे इंग्लैंड पर जबरदस्त दबाव बन गया। स्टीव स्मिथ ने अपनी अनुभवी बल्लेबाजी का प्रदर्शन करते हुए 138 रन की शानदार पारी खेली। वहीं ब्यू वेबस्टर 71 रन बनाकर नाबाद रहे और पारी को मजबूती से आगे बढ़ाया। उनके धैर्यपूर्ण खेल ने निचले क्रम के साथ महत्वपूर्ण साझेदारियाँ निभाईं और ऑस्ट्रेलिया को विशाल स्कोर तक पहुँचाया। इंग्लैंड के गेंदबाजों ने बीच-बीच में वापसी की कोशिश की,लेकिन बड़े स्कोर को रोक पाना उनके लिए मुश्किल साबित हुआ।
इंग्लैंड की पहली पारी 384 रन पर सिमट चुकी थी और इस तरह ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी के आधार पर 183 रन की मजबूत बढ़त हासिल कर ली। टेस्ट क्रिकेट में इतनी बढ़त ना केवल स्कोरबोर्ड पर असर डालती है,बल्कि विपक्षी टीम के मनोबल पर भी दबाव बनाती है। स्टोक्स की चोट के बाद यह दबाव और बढ़ गया,क्योंकि टीम को हर सेशन में अपने विकल्पों के साथ प्रयोग करना पड़ रहा है।
हैरी ब्रूक ने अंतरिम कप्तानी सँभालते हुए मैदान पर संयम बनाए रखने की कोशिश की,लेकिन यह साफ दिख रहा था कि निर्णय लेने में स्टोक्स की कमी खल रही है। फील्ड सेटिंग से लेकर गेंदबाजों के रोटेशन तक,हर कदम पर टीम को सतर्क रहना पड़ रहा था। इस बीच इंग्लैंड की मेडिकल टीम लगातार कप्तान की निगरानी करती रही और ड्रेसिंग रूम के बाहर बेचैनी का माहौल बना रहा।
इंग्लैंड के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर स्टोक्स अगला हिस्सा नहीं खेल पाए,तो टीम के संतुलन पर गंभीर असर पड़ेगा। उनके जाने से बल्लेबाजी में एक भरोसेमंद स्तंभ और गेंदबाजी में एक आक्रामक विकल्प दोनों कम हो जाएँगे। साथ ही,कप्तानी का दबाव किसी युवा खिलाड़ी पर आना भी टीम की रणनीति को प्रभावित कर सकता है। टेस्ट मैच के इस अहम मोड़ पर इंग्लैंड को अपनी कमजोरियों से ऊपर उठकर सामूहिक प्रदर्शन करना होगा।
ऑस्ट्रेलिया की ओर से यह मैच अब पूरी तरह नियंत्रण के करीब लगता है। 183 रन की बढ़त,मजबूत गेंदबाजी आक्रमण और घरेलू परिस्थितियों का फायदा उन्हें स्पष्ट बढ़त देता है। दूसरी ओर इंग्लैंड को न केवल रन बचाने,बल्कि मानसिक मजबूती दिखाने की भी चुनौती होगी। मैच के पाँचवें दिन स्टोक्स की उपलब्धता इस मुकाबले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
फिलहाल पूरी नजर इंग्लैंड कप्तान की मेडिकल रिपोर्ट पर टिकी है। अगर उनकी चोट गंभीर नहीं होती,तो इंग्लैंड को राहत मिलेगी और शायद रणनीति में कुछ नए बदलाव देखने को मिलें,लेकिन यदि वे बाहर रहते हैं,तो यह सिडनी टेस्ट ही नहीं,बल्कि आने वाली सीरीज के लिए भी इंग्लैंड के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकता है। सिडनी के मैदान पर चौथे दिन की यह घटना क्रिकेट प्रेमियों को याद दिलाती है कि टेस्ट क्रिकेट में मैच का रुख केवल स्कोरबोर्ड नहीं,बल्कि एक खिलाड़ी की फिटनेस भी बदल सकती है।
