नई दिल्ली,8 जनवरी (युआईटीवी)- वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत और यूरोप के बीच आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए लिकटेंस्टीन की उप प्रधानमंत्री और विदेश मामलों की मंत्री सबाइन मोनाउनी से उच्च स्तरीय बातचीत की है। बुधवार को हुई इस बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार विस्तार,इनोवेशन और स्वच्छ प्रौद्योगिकी जैसे भविष्य के अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा हुई। पीयूष गोयल ने इस बातचीत की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा करते हुए इसे भारत-लिकटेंस्टीन संबंधों के लिए एक सकारात्मक और दूरदर्शी पहल बताया।
अपने पोस्ट में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और लिकटेंस्टीन के बीच पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंधों को और गहरा करने के तरीकों पर विचार किया गया,खासकर भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) के संचालन में आने के बाद। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों ने व्यापार विस्तार,नवाचार और स्वच्छ प्रौद्योगिकी से जुड़े अवसरों की पहचान की,जो आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकते हैं। गोयल के मुताबिक,यह बातचीत केवल मौजूदा सहयोग तक सीमित नहीं रही,बल्कि भविष्य की रणनीतिक साझेदारी पर भी केंद्रित थी।
पीयूष गोयल ने इस साझेदारी को “यूनिक” बताते हुए कहा कि भारत और लिकटेंस्टीन की ताकतें एक-दूसरे की पूरक हैं। उनके अनुसार,भारत प्रतिभा,विशाल बाजार,उत्पादन क्षमता और तेजी से बढ़ती माँग के साथ सामने आता है,जबकि लिकटेंस्टीन उच्च मूल्य वाले विनिर्माण,विशिष्ट इंजीनियरिंग और उन्नत तकनीक में अपनी विशेषज्ञता का योगदान देता है। उन्होंने कहा कि इन दोनों क्षमताओं का संगम व्यापार,निवेश और प्रौद्योगिकी के प्रवाह को तेज करने की अपार संभावनाएँ पैदा करता है। यह साझेदारी न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है,बल्कि भारत के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों को भी मजबूती देती है।
भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ यानी ईएफटीए के साथ किया गया व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता इस पूरे प्रयास का एक अहम स्तंभ माना जा रहा है। यह समझौता 1 अक्टूबर से आधिकारिक रूप से लागू होने जा रहा है,जिसमें स्विट्जरलैंड,नॉर्वे,आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं। इस समझौते के तहत यूरोपीय देशों ने भारत में अगले 15 वर्षों में करीब 100 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। सरकार का मानना है कि इस निवेश से भारत में लगभग 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे,जिससे न केवल आर्थिक विकास को गति मिलेगी,बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
It was a pleasure to meet Ms. Sabine Monauni, Deputy Prime Minister and Minister of Foreign Affairs of Liechtenstein.
We discussed opportunities for trade expansion, innovation & clean tech, and explored ways to deepen our mutually beneficial ties, especially after the… pic.twitter.com/dolqApJoiQ
— Piyush Goyal (@PiyushGoyal) January 7, 2026
ईएफटीए के साथ यह समझौता भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह यूरोप के विकसित और तकनीकी रूप से उन्नत देशों के साथ भारत की आर्थिक भागीदारी को एक नई दिशा देता है। लिकटेंस्टीन जैसे छोटे लेकिन तकनीकी रूप से मजबूत देश के साथ सहयोग से भारत को उच्च गुणवत्ता वाले विनिर्माण,इंजीनियरिंग समाधान और उन्नत औद्योगिक तकनीकों तक बेहतर पहुँच मिल सकती है। वहीं यूरोपीय कंपनियों के लिए भारत का विशाल बाजार,कुशल कार्यबल और तेजी से बढ़ता उपभोक्ता आधार आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
पीयूष गोयल की यह बैठक ऐसे समय पर हुई है,जब वह आधिकारिक यूरोप यात्रा पर हैं और भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में निर्णायक प्रयास कर रहे हैं। मंगलवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार,गोयल ब्रुसेल्स में दो दिवसीय व्यापार वार्ता में भाग लेंगे,जहाँ भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से चल रही एफटीए बातचीत को गति देने पर जोर दिया जाएगा। यह यात्रा नई दिल्ली और ब्रुसेल्स के बीच बढ़ते राजनयिक,आर्थिक और तकनीकी संबंधों को रेखांकित करती है।
यूरोप दौरे के दौरान पीयूष गोयल की यूरोपीय संघ के व्यापार और आर्थिक सुरक्षा आयुक्त मारोस सेफकोविक के साथ उच्च स्तरीय वार्ता प्रस्तावित है। इन वार्ताओं का मुख्य उद्देश्य दोनों पक्षों की वार्ता टीमों को रणनीतिक मार्गदर्शन देना,लंबे समय से लंबित मुद्दों का समाधान निकालना और एक संतुलित एवं महत्वाकांक्षी समझौते को जल्द से जल्द अंतिम रूप देना है। अधिकारियों के मुताबिक,इन बैठकों में टैरिफ,बाजार पहुँच,निवेश संरक्षण,डिजिटल व्यापार और सतत विकास जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है।
सूत्रों का कहना है कि प्रस्तावित समझौते के प्रमुख क्षेत्रों पर नेताओं के बीच गहन विचार-विमर्श होगा,ताकि मतभेदों को कम किया जा सके और लंबित मामलों पर स्पष्टता लाई जा सके। मंत्रिस्तरीय स्तर की यह वार्ता ब्रुसेल्स में एक सप्ताह तक चले तकनीकी और गहन विचार-विमर्श के बाद हो रही है। इस सप्ताह की शुरुआत में भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और यूरोपीय आयोग की व्यापार महानिदेशक सबाइन वेयंड के बीच हुई उच्च स्तरीय चर्चाओं ने इन वार्ताओं के लिए मजबूत आधार तैयार किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यूरोप के साथ बढ़ती सक्रियता वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की भूमिका को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है। लिकटेंस्टीन जैसे देशों के साथ सहयोग से भारत को न केवल निवेश और तकनीक मिलेगी,बल्कि वैश्विक बाजारों में उसकी विश्वसनीयता और प्रतिस्पर्धात्मकता भी बढ़ेगी। कुल मिलाकर,पीयूष गोयल और सबाइन मोनाउनी के बीच हुई यह बातचीत भारत-यूरोप संबंधों में एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है,जो आने वाले समय में व्यापार,निवेश और नवाचार के नए रास्ते खोल सकती है।
