भारत-ईएफटीए साझेदारी को नई गति (तस्वीर क्रेडिट@PiyushGoyal)

भारत-ईएफटीए साझेदारी को नई गति: पीयूष गोयल ने लिकटेंस्टीन कंपनियों से निवेश और तकनीकी सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया

नई दिल्ली,8 जनवरी (युआईटीवी)- वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने लिकटेंस्टीन की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण राउंडटेबल चर्चा कर भारत में निवेश और औद्योगिक सहयोग की संभावनाओं को रेखांकित किया। इस अवसर पर उन्होंने यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के सदस्य देशों द्वारा भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता के तहत उत्पन्न अवसरों का लाभ उठाने का आग्रह किया। गोयल ने स्पष्ट किया कि भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता (टीईपीए) केवल व्यापार तक सीमित नहीं है,बल्कि यह निवेश,प्रौद्योगिकी साझेदारी,कौशल विकास और मजबूत मूल्य श्रृंखलाओं के निर्माण का व्यापक ढाँचा प्रदान करता है।

पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किए गए संदेश में कहा कि भारत-ईएफटीए टीईपीए को एक दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार,यह समझौता भारत और ईएफटीए देशों के बीच आर्थिक संबंधों को नई ऊँचाइयों पर ले जाने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि इस समझौते के तहत प्रेसिजन इंजीनियरिंग,स्वच्छ ऊर्जा,स्मार्ट बुनियादी ढाँचा,उन्नत सामग्री,डिजिटल सेवाएँ और वित्तीय सेवाओं जैसे कई उभरते क्षेत्रों में व्यापक अवसर उपलब्ध हैं,जिनका लाभ उठाकर दोनों पक्षों को समान रूप से फायदा हो सकता है।

केंद्रीय मंत्री ने लिकटेंस्टीन के उद्योग जगत से भारत को केवल एक बाजार के रूप में नहीं,बल्कि एक दीर्घकालिक निवेश और विनिर्माण आधार के रूप में देखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भारत की युवा आबादी,तेजी से बढ़ता उपभोक्ता आधार,मजबूत डिजिटल बुनियादी ढाँचा और सरकार की निवेश-समर्थक नीतियाँ विदेशी कंपनियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रही हैं। गोयल ने यह भी रेखांकित किया कि ईएफटीए देशों द्वारा 15 वर्षों की अवधि में 100 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता भारत में लगभग दस लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने की क्षमता रखती है,जो देश की आर्थिक वृद्धि और रोजगार सृजन के लक्ष्यों के अनुरूप है।

इस दौरान गोयल ने लिकटेंस्टीन स्थित प्रसिद्ध हिल्टी समूह के मुख्यालय का भी दौरा किया और समूह के सीईओ जहांगीर डूंगाजी से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि भारत के निर्माण क्षेत्र में हिल्टी समूह की 25 वर्षों से अधिक की मौजूदगी को देखते हुए चर्चा का मुख्य फोकस स्थानीयकरण को बढ़ावा देने,मूल्यवर्धन को मजबूत करने और भारत से वैश्विक स्तर पर शिपमेंट बढ़ाने पर रहा। मंत्री ने कहा कि यह रणनीति भारत के ‘मेक इन इंडिया’ और निर्यात वृद्धि के लक्ष्यों के पूरी तरह अनुरूप है और इससे देश के विनिर्माण क्षेत्र को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में और गहराई से जोड़ा जा सकेगा।

गोयल ने यह भी कहा कि सुरक्षित और स्मार्ट बुनियादी ढाँचे के निर्माण के लिए प्रौद्योगिकी सहयोग पर विशेष ध्यान दिया गया। उन्होंने निवेश विस्तार,तेज नवाचार और मजबूत घरेलू क्षमता निर्माण को इस सहयोग की आधारशिला बताया। उनके अनुसार,उन्नत प्रौद्योगिकियों और नवाचारों के माध्यम से भारत न केवल अपने बुनियादी ढांचे को आधुनिक बना सकता है,बल्कि वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रतिस्पर्धी उत्पाद और सेवाएँ भी विकसित कर सकता है।

इससे पहले,पीयूष गोयल ने लिकटेंस्टीन की उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री सबीन मोनाउनी के साथ भी मुलाकात की थी। इस बैठक में व्यापार,नवाचार और स्वच्छ प्रौद्योगिकी सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि हरित प्रौद्योगिकियों,ऊर्जा दक्षता और टिकाऊ विकास के क्षेत्रों में सहयोग भविष्य की साझेदारी का महत्वपूर्ण स्तंभ हो सकता है। भारत की ओर से यह संदेश दिया गया कि स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु-अनुकूल प्रौद्योगिकियों में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।

भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता आधिकारिक तौर पर अक्टूबर 2025 में लागू हुआ था। इस समझौते में स्विट्जरलैंड,नॉर्वे,आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं। टीईपीए के लागू होने के बाद से भारत और इन देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों में नई गति देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत को यूरोपीय बाजारों से जोड़ने में एक महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभा सकता है,खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ उच्च तकनीक,नवाचार और गुणवत्ता मानकों की आवश्यकता होती है।

ब्रुसेल्स में पीयूष गोयल की दो दिवसीय व्यापार वार्ता का व्यापक उद्देश्य भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में निर्णायक कदम उठाना था। एक आधिकारिक बयान के अनुसार,भारतीय प्रतिनिधिमंडल का फोकस वस्त्र,चमड़ा,परिधान,रत्न और आभूषण तथा हस्तशिल्प जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए शून्य शुल्क पहुँच सुनिश्चित करने पर रहा। इन क्षेत्रों में शुल्क मुक्त पहुँच मिलने से भारतीय निर्यात को बड़ा प्रोत्साहन मिल सकता है और लाखों लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

लिकटेंस्टीन और अन्य ईएफटीए देशों के साथ बढ़ता सहयोग भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ रहा है। निवेश,प्रौद्योगिकी और नवाचार के जरिए यह साझेदारी न केवल भारत की आर्थिक वृद्धि को गति देने में सहायक होगी,बल्कि देश को वैश्विक विनिर्माण और मूल्य श्रृंखला का एक मजबूत केंद्र बनाने की दिशा में भी अहम भूमिका निभाएगी।