नई दिल्ली,9 जनवरी (युआईटीवी)- पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से जुड़े आई-पीएसी (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) पर पड़े छापों के विरोध में तृणमूल कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। ममता बनर्जी की प्रस्तावित रैली से पहले दिल्ली में सियासी माहौल उस वक्त गरमा गया,जब टीएमसी के सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दिल्ली स्थित कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने टीएमसी के वरिष्ठ सांसद डेरेक ओ’ब्रायन और महुआ मोइत्रा समेत कुल आठ सांसदों को हिरासत में ले लिया,जिससे विवाद और गहरा गया।
दिल्ली में गृह मंत्रालय के बाहर टीएमसी सांसदों का यह धरना शांतिपूर्ण विरोध के रूप में शुरू हुआ था,लेकिन थोड़ी ही देर में पुलिस हस्तक्षेप के कारण स्थिति तनावपूर्ण हो गई। धरने में शामिल सांसदों में डेरेक ओ’ब्रायन,शताब्दी रॉय,महुआ मोइत्रा,बापी हलदर,साकेत गोखले,प्रतिमा मंडल,कीर्ति आज़ाद और डॉ. शर्मिला सरकार शामिल थे। इन सभी नेताओं ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह केंद्रीय एजेंसियों और पुलिस का इस्तेमाल कर विपक्ष को डराने और दबाने की कोशिश कर रही है। दिल्ली पुलिस ने इन सभी आठ सांसदों को हिरासत में ले लिया,जिसके बाद टीएमसी ने इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद टीएमसी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला। पार्टी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से किए गए पोस्ट में अमित शाह को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा गया, “यह किस तरह का घमंड है?” टीएमसी ने सवाल उठाया कि क्या अब लोकतंत्र को कुचलने के लिए दिल्ली पुलिस का इस्तेमाल चुने हुए जनप्रतिनिधियों पर हमला करने के लिए किया जा रहा है। पोस्ट में यह भी पूछा गया कि क्या अमित शाह के भारत में असहमति को इसी तरह चुप कराया जाता है और यह आरोप लगाया गया कि केंद्र सरकार घबराहट में ऐसे कदम उठा रही है।
टीएमसी ने अपने बयान में यह भी कहा कि पहले प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी का “बेशर्मी से गलत इस्तेमाल” किया गया और अब शांतिपूर्ण धरने पर बैठे सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। पार्टी का दावा है कि यह सब केंद्र सरकार की बेचैनी और डर को दर्शाता है। पोस्ट में साफ शब्दों में लिखा गया कि आप लोकतंत्र का गला घोंटने की कोशिश कर सकते हैं,लेकिन बंगाल झुकेगा नहीं। टीएमसी ने यह भी कहा कि जितना भी हमला किया जाए,बंगाल फिर से जीतेगा। इस बयानबाजी ने साफ कर दिया कि केंद्र और राज्य के बीच राजनीतिक टकराव अब और तेज होने वाला है।
इस पूरे विवाद की जड़ आई-पीएसी से जुड़े छापे हैं,जिन्हें टीएमसी सीधे तौर पर ममता बनर्जी को निशाना बनाने की कार्रवाई बता रही है। इन छापों की टाइमलाइन भी काफी अहम मानी जा रही है। जानकारी के मुताबिक,सुबह करीब साढ़े छह बजे एक टीम सबसे पहले आई-पीएसी से जुड़े एक ऑफिस पहुँची,जहाँ उस वक्त कोई मौजूद नहीं था। टीम ने दफ्तर में मौजूद सभी डिजिटल उपकरणों और भौतिक दस्तावेजों की जाँच की। इसके करीब एक घंटे बाद,सुबह साढ़े सात बजे दूसरी टीम प्रतीक जैन के घर पहुँची,जो एक इमारत की चौथी मंजिल पर रहते हैं। वहाँ कागजातों की जाँच शुरू की गई।
दोपहर करीब 12 बजे इस मामले ने उस वक्त और राजनीतिक रंग ले लिया,जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद प्रतीक जैन के घर पहुँचीं। बताया गया कि वह वहाँ करीब 19 मिनट तक रहीं और बाहर निकलते समय उनके हाथ में एक हरा फाइल फोल्डर था। इसके बाद दोपहर करीब एक बजे ममता बनर्जी आई-पीएसी के ऑफिस पहुँचीं,जो उस घर से लगभग 15 किलोमीटर दूर है। उस समय बिल्डिंग की एंट्री और एग्जिट केंद्रीय बलों ने बंद कर रखी थी,जिसके चलते ममता बनर्जी को बेसमेंट की लिफ्ट से सीधे 11वीं मंजिल पर जाना पड़ा। उनके साथ राज्य के डीजीपी राजीव कुमार भी मौजूद थे। राजीव कुमार वही अधिकारी हैं,जिनके घर 2019 में सीबीआई ने छापा मारा था और तब ममता बनर्जी उनके समर्थन में वहीं धरने पर बैठ गई थीं। इस समानता को टीएमसी नेता केंद्र सरकार की कथित “बदले की राजनीति” के उदाहरण के तौर पर देख रहे हैं।
करीब शाम 4 बजकर 22 मिनट पर ममता बनर्जी आई-पीएसी के ऑफिस से बाहर निकलीं। उनके पीछे मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी हाथों में फाइलें लिए हुए थे,जिन्हें काफिले की गाड़ी की पिछली सीट पर रखा गया। इस पूरी गतिविधि ने राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष का कहना है कि यह सब चुनावी रणनीतिकारों और राजनीतिक सलाहकारों को डराने का प्रयास है,जबकि केंद्र सरकार की ओर से अब तक इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है।
दिल्ली में सांसदों की हिरासत और बंगाल में छापों के विरोध ने यह साफ कर दिया है कि केंद्र और तृणमूल कांग्रेस के बीच टकराव अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। टीएमसी इसे संघीय ढाँचे और लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बता रही है,जबकि केंद्र सरकार का पक्ष है कि कानून अपना काम कर रहा है और किसी को भी कानून से ऊपर नहीं रखा जा सकता।
आने वाले दिनों में ममता बनर्जी की रैली और टीएमसी के अगले कदम इस टकराव को और तेज कर सकते हैं। जिस तरह से दिल्ली में विरोध प्रदर्शन और हिरासत की तस्वीरें सामने आई हैं,उसने यह संकेत दे दिया है कि केंद्र और बंगाल के बीच सियासी जंग अब और तीखी होने वाली है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि राजनीतिक मतभेदों के दौर में लोकतांत्रिक विरोध और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन कैसे बनाए रखा जाए।
