नई दिल्ली,9 जनवरी (युआईटीवी)- दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास नगर निगम की ओर से चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान भड़की हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। इस ताजा गिरफ्तारी के साथ ही इस मामले में अब तक पकड़े गए आरोपियों की संख्या बढ़कर 12 हो गई है। पुलिस का कहना है कि जाँच लगातार आगे बढ़ रही है और आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं,क्योंकि कई संदिग्धों की भूमिका सामने आ चुकी है।
दिल्ली पुलिस के अनुसार,गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान मोहम्मद इमरान उर्फ राजू के रूप में हुई है,जिसकी उम्र करीब 36 साल बताई जा रही है। पुलिस का दावा है कि इमरान हिंसा और पत्थरबाजी की घटना में सक्रिय रूप से शामिल था। जाँच के दौरान उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत मिलने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक,इमरान घटना के समय भीड़ के बीच मौजूद था और उसने पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंकने में अन्य लोगों के साथ मिलकर भूमिका निभाई थी।
इससे पहले पुलिस ने बुधवार को पाँच और गुरुवार को छह आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इन सभी से पूछताछ की जा रही है,ताकि यह पता लगाया जा सके कि हिंसा की साजिश पहले से रची गई थी या यह अचानक भड़की। पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे किन लोगों ने भीड़ को उकसाया और क्या इसमें किसी संगठित गिरोह या राजनीतिक दबाव की भूमिका रही।
घटना उस समय हुई,जब नगर निगम की टीम फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर रही थी। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई कानून के तहत की जा रही थी और इसके लिए पहले से सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। पुलिस ने इलाके में बैरिकेडिंग शुरू कर दी थी,ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे। हालाँकि,इसी दौरान कुछ असामाजिक तत्व मौके पर इकट्ठा हो गए और अचानक माहौल तनावपूर्ण हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस के अनुसार,जैसे ही अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई,वैसे ही कुछ लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी और देखते ही देखते भीड़ उग्र हो गई। आरोप है कि असामाजिक तत्वों ने पुलिसकर्मियों और नगर निगम के कर्मचारियों पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए। इस हिंसा में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए,जबकि सरकारी वाहनों और अन्य संपत्तियों को भी नुकसान पहुँचा। हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस को अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा और स्थिति को काबू में लाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
दिल्ली पुलिस ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि हिंसा में शामिल लोगों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। इसी कड़ी में पुलिस ने अब तक करीब 30 लोगों की पहचान कर ली है। यह पहचान इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज,पुलिसकर्मियों के बॉडी-वॉर्न कैमरों की रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो के आधार पर की गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फुटेज में साफ दिख रहा है कि कौन लोग भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे और कौन हिंसा में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।
इस मामले में जाँच का दायरा अब और भी बढ़ गया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक,समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी को भी जाँच में शामिल होने के लिए समन भेजे जाने की तैयारी है। आरोप है कि हिंसा भड़कने से पहले वह घटनास्थल पर मौजूद थे। पुलिस का कहना है कि अधिकारियों ने सांसद से इलाके से दूर रहने का अनुरोध किया था,लेकिन इसके बावजूद वह घटना से ठीक पहले उस क्षेत्र के आसपास बने रहे। पुलिस अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि उनकी मौजूदगी का हिंसा से कोई सीधा या परोक्ष संबंध था या नहीं।
इसके अलावा,दिल्ली पुलिस ने यूट्यूबर सलमान की तलाश भी तेज कर दी है। सलमान पर आरोप है कि उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर शांति भंग करने की कोशिश की। पुलिस का कहना है कि उसने डिमोलिशन ड्राइव के दौरान स्थानीय लोगों को घटनास्थल पर इकट्ठा होने के लिए उकसाया और भड़काऊ संदेश फैलाए। पुलिस की साइबर टीम सलमान से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स की गहन जाँच कर रही है और उसके डिजिटल सबूत जुटाए जा रहे हैं।
जाँच में यह भी सामने आया है कि इलाके के कुछ प्रभावशाली लोगों ने कथित तौर पर अपने-अपने व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए स्थानीय निवासियों को मौके पर इकट्ठा होने के लिए उकसाया। पुलिस का मानना है कि इन ग्रुप्स के जरिए फैलाए गए संदेशों का मकसद प्रशासन और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के काम में बाधा डालना और ऑपरेशन के दौरान अशांति फैलाना था। इन व्हाट्सएप ग्रुप्स के एडमिन और सक्रिय सदस्यों की पहचान की जा रही है और जरूरत पड़ने पर उन्हें भी पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।
एफआईआर की कॉपी में दर्ज घटनाक्रम के अनुसार,जब पुलिस ने अतिक्रमण वाली जमीन पर बैरिकेडिंग शुरू की,तब दोपहर करीब 12:40 बजे 30 से 35 लोगों का एक समूह मौके पर इकट्ठा हो गया। इन लोगों ने पहले नारेबाजी की और पुलिस को बैरिकेडिंग करने से रोकने की कोशिश की। इसके बाद माहौल अचानक हिंसक हो गया और पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंके जाने लगे। एफआईआर में यह भी दर्ज है कि भीड़ को समझाने की कोशिश की गई,लेकिन उपद्रवी तत्वों ने किसी की नहीं सुनी।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और इस तरह की हिंसा को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस ने साफ किया है कि चाहे आरोपी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो,अगर वह कानून तोड़ता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले की जाँच जारी है और पुलिस आने वाले दिनों में और खुलासे कर सकती है।
