अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@Arya909050)

वेनेजुएला के तेल क्षेत्र पर ट्रंप का बड़ा दांव,चीन और रूस का प्रभाव रोकने को बताया अमेरिकी रणनीति का केंद्र

वाशिंगटन,10 जनवरी (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला को लेकर अपनी ऊर्जा और विदेश नीति का खुलकर बचाव करते हुए कहा है कि अमेरिका की अगुवाई में वेनेजुएला के तेल क्षेत्र को दोबारा खड़ा करने की कोशिश इसलिए की जा रही है,ताकि चीन और रूस इस रणनीतिक रूप से अहम इलाके में अपना प्रभाव न बढ़ा सकें। व्हाइट हाउस में अमेरिकी और अंतर्राष्ट्रीय तेल कंपनियों के प्रमुखों के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि अगर अमेरिका ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया होता,तो चीन या रूस वेनेजुएला के ऊर्जा संसाधनों पर तेजी से कब्जा जमा लेते।

ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा, “अगर हमने यह कदम नहीं उठाया होता,तो वहाँ चीन या रूस पहुँच चुके होते।” उनके मुताबिक,वेनेजुएला जैसे तेल-समृद्ध देश में बाहरी शक्तियों की बढ़ती मौजूदगी न सिर्फ अमेरिका के आर्थिक हितों के खिलाफ है,बल्कि यह उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती बन सकती है। उन्होंने कहा कि अमेरिका दुनिया के साथ व्यापार करने में विश्वास रखता है और वह चीन सहित अन्य देशों को तेल बेचने के लिए भी तैयार है,लेकिन वेनेजुएला में तेल उत्पादन और आपूर्ति पर नियंत्रण अमेरिकी हितों के अनुरूप होना चाहिए।

ट्रंप ने जोर देकर कहा, “हम अमेरिका में बिजनेस के लिए तैयार हैं और हम वेनेजुएला में भी बिजनेस के लिए तैयार हैं।” इस बयान को वेनेजुएला में अमेरिकी कंपनियों की वापसी और वहाँ के ऊर्जा ढाँचे के पुनर्निर्माण की दिशा में एक स्पष्ट संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि अमेरिकी कंपनियों की मौजूदगी से न सिर्फ वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिलेगी,बल्कि क्षेत्र में चीन और रूस के बढ़ते प्रभाव को भी संतुलित किया जा सकेगा।

इस बैठक में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कड़े शब्दों में पिछली सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रशासन के दौरान वेनेजुएला दुश्मन ताकतों का अड्डा बन गया था,जो अमेरिका के लिए स्वीकार्य नहीं था। रुबियो ने कहा, “अमेरिका की सुरक्षा और राष्ट्रीय हित के लिए यह ठीक नहीं था कि उसके ही क्षेत्र में कोई देश एक ऐसे व्यक्ति के नियंत्रण में हो,जिस पर मादक पदार्थों की तस्करी जैसे गंभीर आरोप हों।” उनके इस बयान को वेनेजुएला के मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व और वहाँ फैले भ्रष्टाचार की ओर इशारा माना जा रहा है।

ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने भी वेनेजुएला की स्थिति को क्षेत्रीय और वैश्विक संकट से जोड़ते हुए कहा कि वहाँ की गिरावट का असर केवल उसकी सीमाओं तक सीमित नहीं रहा। उनके अनुसार,लंबे समय से चले आ रहे भ्रष्टाचार,कुप्रबंधन और आर्थिक पतन ने वेनेजुएला के आम लोगों को भारी नुकसान पहुँचाया है। राइट ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र के ध्वस्त होने से देश की आय के मुख्य स्रोत खत्म हो गए,जिससे सामाजिक और मानवीय संकट और गहरा गया।

ट्रंप ने यह भी बताया कि वेनेजुएला पर दबाव बनाने के लिए अमेरिका ने सैन्य ताकत का इस्तेमाल किया,लेकिन बिना किसी लंबे युद्ध के। उन्होंने कहा कि सेना की ताकत का इस्तेमाल गोलियाँ चलाने के लिए नहीं,बल्कि वेनेजुएला के तेल की आपूर्ति को रोकने और रणनीतिक दबाव बनाने के लिए किया गया। ट्रंप के अनुसार,यह एक ऐसी रणनीति थी,जिसमें सीधे युद्ध के बजाय आर्थिक और सैन्य दबाव के जरिए लक्ष्य हासिल किया गया।

उन्होंने कहा कि यह तरीका वैसा ही है,जैसा अमेरिका दुनिया के दूसरे अहम इलाकों में चीन और रूस के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए अपनाता रहा है। ट्रंप ने दो टूक कहा, “हम रूस या चीन को वेनेजुएला पर कब्जा नहीं करने देंगे।” यह बयान दिखाता है कि अमेरिका वेनेजुएला को केवल एक ऊर्जा स्रोत के रूप में नहीं,बल्कि भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के एक महत्वपूर्ण मोर्चे के रूप में देख रहा है।

लैटिन अमेरिका हमेशा से अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से अहम क्षेत्र रहा है। इस इलाके में ऊर्जा सुरक्षा,प्रवासन,राजनीतिक स्थिरता और वैश्विक शक्ति संतुलन जैसे कई मुद्दे आपस में जुड़े हुए हैं। अलग-अलग अमेरिकी सरकारों ने समय-समय पर अपनी नीतियाँ बदली हैं,लेकिन ट्रंप प्रशासन की नीति अपेक्षाकृत अधिक सख्त और सीधे हस्तक्षेप वाली मानी जा रही है। वेनेजुएला के संदर्भ में यह नीति स्पष्ट रूप से चीन और रूस को रोकने पर केंद्रित दिखाई देती है।

विश्लेषकों का मानना है कि वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक है और यही वजह है कि वह लंबे समय से वैश्विक शक्तियों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। चीन और रूस ने बीते वर्षों में वहाँ निवेश और कर्ज के जरिए अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश की थी। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि अगर अमेरिका ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया होता,तो वेनेजुएला पूरी तरह इन ताकतों के प्रभाव में चला जाता।

हालाँकि,आलोचक यह भी कहते हैं कि अमेरिका की यह नीति वेनेजुएला की संप्रभुता पर सवाल खड़े करती है और इससे वहाँ की आंतरिक राजनीति और अस्थिर हो सकती है। इसके बावजूद,ट्रंप और उनकी टीम का कहना है कि उनका मकसद वेनेजुएला को स्थिर करना,वहाँ की अर्थव्यवस्था को दोबारा खड़ा करना और क्षेत्र को दुश्मन ताकतों के प्रभाव से मुक्त रखना है।

ट्रंप के बयान यह साफ करते हैं कि वेनेजुएला का तेल सिर्फ एक आर्थिक संसाधन नहीं,बल्कि वैश्विक राजनीति की बड़ी शतरंज का अहम मोहरा बन चुका है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि अमेरिका की इस रणनीति का वेनेजुएला की राजनीति,उसकी जनता और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों पर क्या असर पड़ता है।