वाशिंगटन,12 जनवरी (युआईटीवी)- अमेरिका के मिनेसोटा राज्य के मिनियापोलिस शहर में एक आईसीई (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) अधिकारी द्वारा महिला की गोली मारकर हत्या किए जाने का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बनता जा रहा है। सड़कों से लेकर अंतर्राष्ट्रीय मंचों तक इस घटना के खिलाफ विरोध देखने को मिल रहा है। गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड्स जैसे प्रतिष्ठित समारोहों में भी इस घटना को लेकर नाराज़गी जाहिर की गई,जिससे साफ है कि यह मामला अब सिर्फ कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है,बल्कि अमेरिका की सख्त इमिग्रेशन नीतियों और पुलिसिया कार्रवाई पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
इस पूरे विवाद के केंद्र में 37 वर्षीय रेनी निकोल गुड की मौत है,जिन्हें बुधवार को मिनियापोलिस में 34वीं स्ट्रीट और पोर्टलैंड एवेन्यू के चौराहे के पास गोली मारी गई थी। बताया गया कि उस समय रेनी अपनी एसयूवी में थीं। इस घटना के बाद से ही मिनेसोटा समेत कई राज्यों में लोगों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। प्रदर्शनकारी इसे पुलिस और आईसीई अधिकारियों द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग का मामला बता रहे हैं,जबकि प्रशासन इसे आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई करार दे रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शुरू से ही इन विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए हैं। जब पत्रकारों ने एयरफोर्स वन में इस घटना को लेकर उनसे सवाल किया,तो ट्रंप ने मारी गई महिला के व्यवहार को ही पूरी घटना के लिए जिम्मेदार ठहरा दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका में कानून लागू करने वाली एजेंसियों का सम्मान होना चाहिए और किसी को भी उनके साथ दुर्व्यवहार करने का अधिकार नहीं है। ट्रंप के मुताबिक,रेनी निकोल गुड ने आईसीई अधिकारी के साथ “बहुत, बहुत बुरा” बर्ताव किया,जो किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि चाहे वह पुलिस हो,आईसीई हो,बॉर्डर पेट्रोल हो या कोई अन्य लॉ एनफोर्समेंट एजेंसी,उनके साथ इस तरह का व्यवहार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मारी गई महिला का रवैया बेहद असम्मानजनक था और वह संभवतः “प्रोफेशनल एजिटेटर” यानी पेशेवर विद्रोही थीं। ट्रंप ने यहाँ तक कहा कि वह यह पता लगाएँगे कि क्या किसी ने उन्हें इसके लिए पैसे दिए थे। इस बयान के बाद अमेरिकी राजनीति में बयानबाजी और तेज हो गई है।
इस मामले में होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम भी ट्रंप के समर्थन में सामने आई हैं। ट्रंप की सख्त प्रवासन नीति का प्रमुख चेहरा मानी जाने वाली नोएम ने कहा कि घटना के समय आईसीई अधिकारी अपने आधिकारिक कर्तव्यों का पालन कर रहे थे और रेनी निकोल गुड उनके काम में जानबूझकर दखल दे रही थीं। नोएम के अनुसार,अधिकारियों ने महिला से गाड़ी से बाहर निकलने के लिए कहा था,लेकिन उन्होंने आदेश मानने से इनकार कर दिया।
नोएम ने यह भी दावा किया कि रेनी ने अपनी एसयूवी को हथियार की तरह इस्तेमाल करते हुए आईसीई अधिकारी को टक्कर मारने की कोशिश की। इसी दौरान अधिकारी ने आत्मरक्षा में तीन गोलियाँ चलाईं, जिनमें से एक महिला को लगी और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। प्रशासन का कहना है कि यह एक दुखद घटना जरूर है,लेकिन इसमें अधिकारी की कार्रवाई नियमों के दायरे में थी।
हालाँकि,इस आधिकारिक बयान को लेकर लोगों में गहरा असंतोष है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह मामला एक निहत्थी नागरिक के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग का है। उनका आरोप है कि ट्रंप प्रशासन लगातार इमिग्रेशन के नाम पर सख्ती दिखा रहा है और इस तरह की घटनाएँ उसी नीति का नतीजा हैं। मिनियापोलिस में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं,जहाँ लोग “न्याय चाहिए” और “आईसीई जवाब दे” जैसे नारे लगा रहे हैं।
यह घटना ऐसे समय में हुई है,जब अमेरिका में पहले से ही इमिग्रेशन नीति को लेकर समाज दो हिस्सों में बॅंटा हुआ है। ट्रंप की सख्त प्रवासन मुहिम उनके समर्थकों के लिए कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है,जबकि आलोचकों के लिए यह मानवाधिकारों का उल्लंघन है। रेनी निकोल गुड की मौत ने इस बहस को और तेज कर दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में अमेरिकी राजनीति में बड़ा असर डाल सकता है। एक तरफ ट्रंप प्रशासन लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों के बचाव में मजबूती से खड़ा है,तो दूसरी तरफ आम जनता का एक बड़ा वर्ग इस घटना को सत्ता की बर्बरता के रूप में देख रहा है। फिलहाल जाँच जारी है,लेकिन इतना तय है कि मिनियापोलिस की यह घटना अमेरिका में इमिग्रेशन,पुलिसिया कार्रवाई और नागरिक अधिकारों की बहस को और गहरा कर चुकी है।
