भारतीय सेना का जवान (तस्वीर क्रेडिट@frontline00)

किश्तवाड़ के सुदूर वन क्षेत्र में मुठभेड़ जारी, ‘ऑपरेशन त्राशी-1’ के तहत सुरक्षाबलों का आतंकियों से आमना-सामना

कश्‍मीर,19 जनवरी (युआईटीवी)- जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में स्थित एक सुदूर और दुर्गम वन क्षेत्र में सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच रविवार से जारी मुठभेड़ ने पूरे इलाके को हाई अलर्ट पर ला दिया है। इस भीषण मुठभेड़ में अब तक आठ जवान घायल हो चुके हैं,जबकि सुरक्षा एजेंसियाँ आतंकवादियों को पूरी तरह घेरने और उन्हें मार गिराने के लिए अभियान को लगातार तेज कर रही हैं। सेना के अधिकारियों के मुताबिक,कई घंटों तक चली भारी गोलीबारी के बाद फिलहाल फायरिंग थमी हुई है,लेकिन इलाके में तलाशी और घेराबंदी का अभियान जारी है।

सेना की जम्मू स्थित व्हाइट नाइट कोर द्वारा इस संयुक्त आतंकवाद-रोधी अभियान को ‘ऑपरेशन त्राशी-1’ नाम दिया गया है। यह अभियान रविवार दोपहर उस समय शुरू हुआ,जब जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ मिलकर सुरक्षाबल किश्तवाड़ जिले के चतरू इलाके के उत्तर-पूर्व में स्थित सोननार क्षेत्र में तलाशी अभियान चला रहे थे। यह इलाका घने जंगलों, ऊँचीं पहाड़ियों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के लिए जाना जाता है,जो अक्सर आतंकियों को छिपने और घुसपैठ के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करता है।

सेना के अनुसार,तलाशी अभियान के दौरान अचानक सुरक्षाबलों का सामना दो से तीन विदेशी आतंकवादियों से हो गया। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक,ये आतंकी पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हो सकते हैं। संपर्क होते ही आतंकियों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी और घेराबंदी तोड़कर भागने की कोशिश की। इस दौरान उन्होंने सुरक्षाबलों पर हथगोले भी फेंके,जिससे हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए।

सुरक्षाबलों ने भी तुरंत मोर्चा सँभालते हुए जवाबी कार्रवाई की। घंटों तक दोनों पक्षों के बीच रुक-रुककर भारी गोलीबारी होती रही। सेना के अधिकारियों ने बताया कि शाम करीब 5 बजकर 40 मिनट तक इलाके में फायरिंग की आवाजें आती रहीं। मुठभेड़ के दौरान चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों और घने जंगलों के बावजूद जवानों ने असाधारण पेशेवर कौशल और दृढ़ता का परिचय दिया। सेना ने अपने बयान में जवानों की बहादुरी और अनुशासन की सराहना की है।

मुठभेड़ के दौरान घायल हुए आठ जवानों को तत्काल प्राथमिक उपचार के बाद सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया है। अधिकारियों के अनुसार,सभी घायल जवानों की हालत स्थिर बताई जा रही है और उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। हालाँकि,सुरक्षा एजेंसियाँ इस मुठभेड़ को गंभीरता से ले रही हैं,क्योंकि आशंका है कि आतंकी लंबे समय से इस इलाके में छिपे हुए थे और किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की फिराक में थे।

व्हाइट नाइट कोर ने बताया कि घेराबंदी को और मजबूत करने के लिए सेना,केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और जम्मू-कश्मीर पुलिस के अतिरिक्त जवानों को मौके पर तैनात किया गया है। पूरे इलाके को कई स्तरों पर घेरा गया है,ताकि आतंकियों के भागने का कोई रास्ता न बचे। साथ ही नागरिक प्रशासन और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ भी लगातार समन्वय बनाए रखा जा रहा है,जिससे किसी भी आकस्मिक स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

किश्तवाड़ जिला पहले भी आतंकवादी गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील रहा है। यहाँ के घने जंगल और पहाड़ी इलाके अक्सर आतंकियों के लिए अस्थायी ठिकाने के रूप में इस्तेमाल किए जाते रहे हैं। हाल के महीनों में सुरक्षा बलों ने इस क्षेत्र में अपनी गश्त और खुफिया गतिविधियों को बढ़ाया है,जिसके चलते आतंकियों की गतिविधियों पर दबाव बढ़ा है। माना जा रहा है कि इसी दबाव के चलते आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर हमला करने की कोशिश की,लेकिन उन्हें कड़ा प्रतिरोध झेलना पड़ा।

सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल गोलीबारी बंद है,लेकिन ऑपरेशन खत्म नहीं हुआ है। पूरे क्षेत्र में सघन तलाशी अभियान जारी है और ड्रोन,थर्मल इमेजिंग तथा अन्य आधुनिक उपकरणों की मदद से आतंकियों की मौजूदगी का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। रात के समय भी ऑपरेशन जारी रखने की पूरी तैयारी है,ताकि किसी भी स्थिति में आतंकियों को भागने का मौका न मिले।

सेना और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। स्थानीय लोगों से भी सतर्क रहने और सुरक्षा बलों के साथ सहयोग करने की अपील की गई है। साथ ही,मुठभेड़ स्थल के आसपास के इलाकों में अस्थायी रूप से आवाजाही पर रोक लगाई गई है,ताकि आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

किश्तवाड़ के सोननार क्षेत्र में जारी यह मुठभेड़ एक बार फिर यह दर्शाती है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। हालाँकि,सुरक्षा बलों की सतर्कता,त्वरित कार्रवाई और मजबूत रणनीति यह संकेत देती है कि आतंकियों की हर साजिश को नाकाम करने के लिए एजेंसियाँ पूरी तरह तैयार हैं। आने वाले समय में इस अभियान के परिणाम और आतंकियों के हताहत होने को लेकर और अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आने की उम्मीद है।