वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को ऐतिहासिक शुरुआत (तस्वीर क्रेडिट@VivekshuklaLive)

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को ऐतिहासिक शुरुआत,टिकट खुलते ही फुल; पूर्वोत्तर–पूर्वी भारत की कनेक्टिविटी को मिलेगा नया आयाम

नई दिल्ली,21 जनवरी (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से हाल ही में उद्घाटन की गई देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन ने अपने पहले ही कदम पर इतिहास रच दिया है। यात्रियों की जबरदस्त दिलचस्पी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टिकट बुकिंग शुरू होने के कुछ ही घंटों के भीतर पूरी ट्रेन फुल हो गई। रेल मंत्रालय ने मंगलवार को इस बात की आधिकारिक पुष्टि करते हुए इसे भारतीय रेल के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताया। लंबे समय से जिस वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का इंतजार किया जा रहा था,उसकी शुरुआत ने साफ कर दिया है कि देश में तेज,आरामदायक और आधुनिक रेल यात्रा को लेकर यात्रियों में कितना उत्साह है।

पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन कामाख्या और हावड़ा के बीच चलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जनवरी 2026 को इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर राष्ट्र को समर्पित किया था। इसके साथ ही यह ट्रेन न सिर्फ तकनीकी दृष्टि से एक नई पहल मानी जा रही है,बल्कि यह पूर्वोत्तर भारत को देश के अन्य हिस्सों से बेहतर तरीके से जोड़ने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। रेल मंत्रालय के मुताबिक,इस ट्रेन की पहली व्यावसायिक यात्रा को लेकर यात्रियों में जिस तरह का उत्साह देखने को मिला,वह उम्मीदों से कहीं ज्यादा है।

रेल मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि कामाख्या (केवाईक्यू) और हावड़ा (एचडब्ल्यूएच) के बीच चलने वाली वंदे भारत शयनयान रेलगाड़ी संख्या 27576 की पहली व्यावसायिक यात्रा के लिए जैसे ही पीआरएस और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर टिकट बुकिंग शुरू हुई,कुछ ही घंटों में सभी सीटें बुक हो गईं। यह दर्शाता है कि यात्रियों को इस नई पीढ़ी की सेमी-हाई-स्पीड स्लीपर ट्रेन का बेसब्री से इंतजार था। मंत्रालय ने इसे यात्रियों के भरोसे और भारतीय रेल की बदलती छवि का प्रतीक बताया।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार,यह ट्रेन 22 जनवरी 2026 से कामाख्या से और 23 जनवरी 2026 से हावड़ा से अपनी पहली व्यावसायिक यात्रा शुरू करेगी। इस नई सेवा के लिए टिकट बुकिंग 19 जनवरी 2026 को सुबह 8 बजे शुरू की गई थी। 24 घंटे से भी कम समय में सभी श्रेणियों के टिकट बिक जाना इस बात का संकेत है कि लोग अब पारंपरिक लंबी दूरी की ट्रेनों के बजाय आधुनिक सुविधाओं से लैस तेज ट्रेनों को प्राथमिकता देने लगे हैं। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन खासतौर पर रात की लंबी यात्राओं को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई है,जिससे यात्री आराम के साथ कम समय में अपने गंतव्य तक पहुँच सकें।

रेल मंत्रालय ने अपने बयान में यह भी कहा कि पहली ही व्यावसायिक यात्रा में मिली इस शानदार प्रतिक्रिया से यह साफ है कि यात्रियों की तेज,सुरक्षित और अधिक आरामदायक रेल यात्रा विकल्पों के प्रति रुचि लगातार बढ़ रही है। कामाख्या-हावड़ा वंदे भारत स्लीपर ट्रेन से पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के बीच कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है। यह ट्रेन न केवल यात्रा समय को कम करेगी,बल्कि आधुनिक इंटीरियर,आरामदायक स्लीपर कोच,बेहतर सुरक्षा व्यवस्था और विश्व स्तरीय रात्रिकालीन यात्रा अनुभव भी प्रदान करेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का सफल आगाज भविष्य में इस तरह की और ट्रेनों के रास्ते खोल सकता है। अब तक वंदे भारत एक्सप्रेस को चेयर कार फॉर्मेट में देखा गया था,लेकिन स्लीपर वर्जन के आने से लंबी दूरी की यात्राओं में भी वंदे भारत ब्रांड की मौजूदगी मजबूत होगी। खासकर पूर्वोत्तर भारत जैसे क्षेत्रों के लिए,जहाँ रेल कनेक्टिविटी सामाजिक और आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाती है,यह ट्रेन एक गेम चेंजर साबित हो सकती है।

इसी बीच रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को भारतीय रेल के विस्तार और आधुनिकीकरण से जुड़ी एक और बड़ी घोषणा की। उन्होंने नौ नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को शुरू करने का ऐलान किया है। इन नई ट्रेनों के रूट्स में कामाख्या-रोहतक,हावड़ा-आनंद विहार टर्मिनल,बेंगलुरु-अलीपुरद्वार,अलीपुरद्वार-मुंबई और गोमती नगर-डिब्रूगढ़ जैसे महत्वपूर्ण मार्ग शामिल हैं। रेल मंत्री ने कहा कि इन ट्रेनों का उद्देश्य देश के दूरदराज और महत्वपूर्ण क्षेत्रों को बेहतर और सस्ती कनेक्टिविटी देना है।

सरकार का कहना है कि वंदे भारत स्लीपर और अमृत भारत एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों के जरिए भारतीय रेल को नई तकनीक,बेहतर सेवाओं और यात्री-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। यात्रियों की ओर से मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया यह साबित करती है कि रेलवे की ये पहलें सही दिशा में जा रही हैं। कामाख्या-हावड़ा वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की टिकटों का इतनी तेजी से बिक जाना न सिर्फ एक रिकॉर्ड है,बल्कि यह आने वाले समय में भारतीय रेल के बदलते स्वरूप की भी झलक देता है।