न्यूजीलैंड में भारी बारिश के बाद भूस्खलन से मचा हाहाकार (तस्वीर क्रेडिट@thecontextaus)

न्यूजीलैंड में भारी बारिश के बाद भूस्खलन से मचा हाहाकार,माउंट मौंगानुई के हॉलिडे पार्क में कई लोग लापता

न्यूजीलैंड,22 जनवरी (युआईटीवी)- न्यूजीलैंड के बे ऑफ प्लेंटी क्षेत्र में गुरुवार को एक भीषण प्राकृतिक आपदा ने छुट्टियाँ मना रहे कई परिवारों की खुशियों को मातम में बदल दिया। माउंट मौंगानुई के नीचे स्थित बीचसाइड हॉलिडे पार्क में अचानक हुए भूस्खलन में कई लोगों के लापता होने की खबर है,जिनमें बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। यह हादसा उस वक्त हुआ,जब रिकॉर्ड तोड़ बारिश के बाद पहाड़ी इलाके की जमीन खिसक गई और देखते ही देखते कैंपग्राउंड मलबे की चपेट में आ गया।

स्थानीय समय के अनुसार सुबह करीब 9:30 बजे हुए इस भूस्खलन ने पूरे इलाके में अफरा-तफरी मचा दी। चश्मदीदों के मुताबिक,तेज बारिश के बाद पहाड़ी से भारी मात्रा में मिट्टी, पत्थर और मलबा नीचे की ओर आ गिरा,जिसने कैंपर वैन,कारों,टेंटों, हॉट पूल और एक शॉवर ब्लॉक को अपनी चपेट में ले लिया। कुछ ही पलों में हॉलिडे पार्क का बड़ा हिस्सा मलबे के नीचे दब गया,जिससे वहाँ मौजूद लोगों को सँभलने तक का मौका नहीं मिल सका।

न्यूजीलैंड के आपातकालीन प्रबंधन मंत्री मार्क मिचेल ने इस घटना को “एक गहरी त्रासदी” करार देते हुए कहा कि हालात बेहद गंभीर हैं और हर संभव प्रयास किया जा रहा है कि फँसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। उन्होंने बताया कि बीचसाइड हॉलिडे पार्क में खोज और बचाव अभियान लगातार जारी है और राष्ट्रीय तथा स्थानीय स्तर की आपातकालीन एजेंसियाँ मिलकर काम कर रही हैं।

न्यूजीलैंड अग्निशमन एवं आपातकालीन विभाग के कमांडर विलियम पाइके ने कहा कि बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने बताया कि शुरुआती चरण में राहत दल को मलबे के नीचे से कुछ आवाजें सुनाई दी थीं,जिससे यह उम्मीद जगी थी कि कुछ लोग जीवित हो सकते हैं। हालाँकि,बाद के घंटों में ऐसी कोई आवाज सुनाई नहीं दी और अब तक किसी भी व्यक्ति के जीवित मिलने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। उन्होंने यह भी कहा कि भारी मलबा,लगातार नमी और अस्थिर जमीन के कारण राहतकर्मियों को बेहद सावधानी के साथ काम करना पड़ रहा है।

हादसे के तुरंत बाद पूरे इलाके को खाली करा लिया गया और आसपास मौजूद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया। आपातकालीन सेवाएँ यह सुनिश्चित करने में जुटी हैं कि कोई भी व्यक्ति प्रभावित क्षेत्र में फँसा न रह गया हो। ड्रोन,खोजी कुत्तों और विशेष उपकरणों की मदद से मलबे की तलाशी ली जा रही है,लेकिन खराब मौसम राहत कार्यों में लगातार बाधा बन रहा है।

यह भूस्खलन ऐसे समय में हुआ है,जब टौरंगा शहर और उसके आसपास के इलाकों में रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई है। आधिकारिक आँकड़ों के मुताबिक,सुबह 9 बजे तक के 24 घंटों में टौरंगा में 270 मिलीमीटर बारिश हुई,जो सामान्य से कई गुना अधिक है। माउंट मौंगानुई क्षेत्र में तो हालात और भी भयावह रहे,जहाँ महज 12 घंटों में ढाई महीने के बराबर बारिश दर्ज की गई। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी कम अवधि में इतनी अधिक बारिश अपने आप में एक असाधारण और खतरनाक स्थिति है।

भारी बारिश और इसके चलते आई बाढ़ ने नॉर्थ आइलैंड के कई हिस्सों को रातभर प्रभावित किया है। हजारों घरों में बिजली गुल हो गई है,जबकि पूर्वी तट और नॉर्थलैंड के कुछ इलाकों में सड़कों के टूट जाने और पानी भर जाने के कारण समुदायों का संपर्क पूरी तरह कट गया है। कई जगहों पर लोग अपने घरों में फँसे हुए हैं और उन्हें नावों या हेलीकॉप्टरों के जरिए सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा रहा है।

न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने प्रभावित क्षेत्रों के लोगों से स्थानीय प्रशासन और आपातकालीन सेवाओं की ओर से जारी सुरक्षा सलाह का सख्ती से पालन करने की अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि नॉर्थ आइलैंड में मौसम बेहद खतरनाक हालात पैदा कर रहा है और सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रही है।

स्थानीय मेयर माहे ड्राइसडेल ने भूस्खलन की इस घटना को “बेहद दुखद और दिल दहला देने वाला” बताया। उन्होंने कहा कि इस समय उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा,लापता लोगों की तलाश और प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद पहुँचाना है। मेयर के अनुसार,शहर प्रशासन मौसम की स्थिति और जमीन की स्थिरता पर लगातार नजर रखे हुए है,ताकि भविष्य में किसी और हादसे को रोका जा सके।

माउंट मौंगानुई और आसपास के इलाकों में इस हफ्ते आए भीषण तूफान और बाढ़ ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बदलते मौसम और चरम मौसमी घटनाओं के लिए कितनी तैयारियाँ की गई हैं। फिलहाल पूरा देश इस हादसे से स्तब्ध है और लोगों की निगाहें बचाव दल की कोशिशों पर टिकी हैं,जो मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश में दिन-रात जुटे हुए हैं।