इस्लामाबाद,24 जनवरी (युआईटीवी)- पाकिस्तान के कराची शहर में स्थित गुल प्लाजा शॉपिंग मॉल में लगी भीषण आग ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 67 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है,जबकि 77 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। घटना के सात दिन बाद भी सर्च और रिकवरी ऑपरेशन जारी है,लेकिन धीमी रफ्तार को लेकर स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। इस बीच सिंध के गवर्नर कामरान टेसोरी ने इस त्रासदी की न्यायिक जॉंच की माँग करते हुए प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
गुल प्लाजा में 17 जनवरी को लगी यह आग कराची में पिछले दस वर्षों की सबसे भयावह अग्निकांड मानी जा रही है। आग इतनी तेजी से फैली कि मॉल के भीतर मौजूद लोग बाहर निकलने का रास्ता तक नहीं ढूँढ पाए। कई लोगों की दम घुटने से मौत हो गई,जबकि कुछ लोग आग की लपटों में घिरकर जिंदा जल गए। हादसे के बाद से ही लापता लोगों के परिजन अपने प्रियजनों की एक झलक पाने की आस में मॉल के बाहर डटे हुए हैं।
सिंध के गवर्नर कामरान टेसोरी ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस घटना को लेकर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि गुल प्लाजा अग्निकांड की निष्पक्ष और पारदर्शी न्यायिक जाँच बेहद जरूरी है। टेसोरी ने ऐलान किया कि वह पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट और सिंध हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से इस मामले की जाँच शुरू करने की अपील करेंगे। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान होनी चाहिए और उन्हें बिना किसी देरी के सजा मिलनी चाहिए।
गवर्नर टेसोरी ने प्रशासन को भी कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि गुल प्लाजा में आग लगने की घटना के लिए प्रशासन खुद को जिम्मेदारी से बरी नहीं कर सकता। टेसोरी के मुताबिक,न केवल सुरक्षा मानकों की अनदेखी हुई,बल्कि आग लगने के बाद हालात से निपटने में भी गंभीर लापरवाही बरती गई। उनका यह बयान ऐसे समय आया है,जब लापता लोगों को ढूँढने के लिए बचाव अभियान अब भी जारी है और पीड़ित परिवार प्रशासन की कार्यप्रणाली से बेहद नाराज हैं।
जाँच से जुड़े सूत्रों के अनुसार,आग की शुरुआत शॉपिंग मॉल में मौजूद एक दुकान से हुई,जहाँ आर्टिफिशियल फूल बेचे जाते थे। बताया जा रहा है कि घटना के वक्त दुकान में बच्चे खेल रहे थे। शुरुआती जाँच में आशंका जताई जा रही है कि बच्चे माचिस या लाइटर से खेल रहे थे,जिससे दुकान में रखे ज्वलनशील सामान ने आग पकड़ ली। देखते ही देखते आग ने आसपास की दुकानों और बिजली की वायरिंग को अपनी चपेट में ले लिया। जाँचकर्ताओं का मानना है कि यह आग बिजली की खराबी की वजह से नहीं लगी थी,बल्कि ज्वलनशील सामान और सुरक्षा उपायों की कमी ने इसे भयावह रूप दे दिया।
डिस्ट्रिक्ट साउथ के डिप्टी कमिश्नर जावेद नबी खोसो ने बताया कि मृतकों की संख्या बढ़कर 67 हो चुकी है,जबकि 77 लोग अब भी लापता हैं। उन्होंने कहा कि शॉपिंग मॉल में सर्च और रिकवरी ऑपरेशन लगातार चल रहा है। राहत और बचाव दल मलबे को हटाकर हर कोने की तलाशी ले रहे हैं,ताकि लापता लोगों का पता लगाया जा सके। हालाँकि,हादसे के सात दिन बाद भी इतने लोगों का लापता होना प्रशासन की तैयारियों और संसाधनों पर सवाल खड़े कर रहा है।
स्थानीय मीडिया के अनुसार,गुरुवार को लापता लोगों के घरों की महिलाएँ रेस्क्यू और रिकवरी ऑपरेशन की धीमी रफ्तार से बेहद नाराज नजर आईं। उन्होंने घटना स्थल के पास इकट्ठा होकर विरोध प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। महिलाओं का कहना था कि अगर समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जाती,तो शायद उनके अपने आज जिंदा होते। उनका आरोप है कि आग लगने के बाद शुरुआती घंटों में राहत कार्य बेहद कमजोर रहा,जिसका खामियाजा निर्दोष लोगों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा।
गुल प्लाजा अग्निकांड ने कराची में शॉपिंग मॉल्स और व्यावसायिक इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मॉल में न तो पर्याप्त फायर सेफ्टी सिस्टम था और न ही आपातकालीन निकास मार्गों की उचित व्यवस्था। आग लगने के दौरान कई दरवाजे बंद पाए गए,जिससे भीतर फँसे लोग बाहर नहीं निकल सके। यही वजह रही कि यह हादसा इतना भयावह रूप ले सका।
इस घटना के बाद पूरे पाकिस्तान में शोक और गुस्से का माहौल है। लोग सोशल मीडिया के जरिए भी प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठा रहे हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। गुल प्लाजा अग्निकांड अब सिर्फ एक हादसा नहीं,बल्कि प्रशासनिक विफलता और सुरक्षा मानकों की अनदेखी का प्रतीक बन गया है। न्यायिक जाँच की माँग के बीच देश की निगाहें अब इस पर टिकी हैं कि क्या पीड़ितों को इंसाफ मिलेगा और क्या भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएँगे।
