कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के पति एवं बिजनेसमैन रॉबर्ट वाड्रा (तस्वीर क्रेडिट@garrywalia_)

रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ ईडी की चार्जशीट पर सुनवाई टली, राऊज एवेन्यू कोर्ट ने लगाई फटकार, अब 26 फरवरी को होगी अगली सुनवाई

नई दिल्ली,24 जनवरी (युआईटीवी)- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लेने को लेकर शनिवार को राऊज एवेन्यू कोर्ट में होने वाली सुनवाई टल गई। इस मामले में अब अगली सुनवाई 26 फरवरी को होगी। सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से चार्जशीट से जुड़े कुछ आवश्यक दस्तावेज अभी तक दाखिल न किए जाने का मुद्दा सामने आया,जिस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एजेंसी को दस्तावेज जमा करने के लिए यह आखिरी मौका दिया जा रहा है और अगली तारीख पर किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

यह मामला ब्रिटेन स्थित डिफेंस डीलर संजय भंडारी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस से संबंधित है,जिसमें रॉबर्ट वाड्रा का नाम सामने आया है। ईडी ने इस केस में मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम यानी पीएमएलए के तहत चार्जशीट दाखिल की है। एजेंसी का आरोप है कि संजय भंडारी से जुड़े विदेशी संपत्तियों और कथित अवैध वित्तीय लेन-देन में रॉबर्ट वाड्रा की भूमिका रही है। इन लेन-देन को अपराध की कमाई से जोड़ते हुए ईडी ने विस्तृत जाँच की है,जिसके आधार पर चार्जशीट दाखिल की गई।

शनिवार को हुई सुनवाई के दौरान ईडी ने कोर्ट से यह कहते हुए अतिरिक्त समय की माँग की कि चार्जशीट से संबंधित कुछ जरूरी कागजात अभी दाखिल किए जाने हैं। इस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया और ईडी को फटकार लगाते हुए कहा कि इतने महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल मामले में इस तरह की लापरवाही स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई से पहले सभी दस्तावेज रिकॉर्ड पर होने चाहिए,ताकि मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा सके।

इस केस की पृष्ठभूमि काफी पुरानी है। प्रवर्तन निदेशालय की जाँच की शुरुआत वर्ष 2016 में हुई थी,जब आयकर विभाग ने संजय भंडारी के खिलाफ छापेमारी की थी। उस दौरान कथित तौर पर ऐसे कई ईमेल और दस्तावेज बरामद हुए थे,जिनसे भंडारी के विदेशी खातों,अघोषित संपत्तियों और अंतर्राष्ट्रीय लेन-देन का खुलासा हुआ था। ईडी का दावा है कि इन्हीं दस्तावेजों में रॉबर्ट वाड्रा और उनके कुछ सहयोगियों के साथ संबंधों के संकेत भी मिले थे। इसके बाद ईडी ने इस मामले में अलग से मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच शुरू की।

ईडी के अनुसार, जाँच के दौरान यह सामने आया कि संजय भंडारी के माध्यम से विदेशों में संपत्तियाँ खरीदी गईं और वित्तीय लेन-देन को छिपाने के लिए जटिल कॉरपोरेट संरचनाओं और शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। एजेंसी का आरोप है कि इन गतिविधियों में मनी लॉन्ड्रिंग के स्पष्ट तत्व मौजूद हैं और इसी कड़ी में रॉबर्ट वाड्रा को आरोपी बनाया गया। ईडी का कहना है कि वाड्रा का नाम उन विदेशी संपत्तियों और वित्तीय ट्रांजैक्शनों से जुड़ा हुआ है,जिनकी जाँच पीएमएलए के तहत की जा रही है।

इस केस से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण पहलू गुरुग्राम की एक विवादित जमीन डील का है। एक संबंधित मामले में ईडी ने विशेष अदालत को बताया है कि रॉबर्ट वाड्रा को गुरुग्राम में हुए एक जमीन सौदे से कुल 58 करोड़ रुपए प्राप्त हुए थे। एजेंसी के मुताबिक,इस राशि में से 53 करोड़ रुपए स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी के जरिए और 5 करोड़ रुपए ब्लू ब्रीज़ ट्रेडिंग के माध्यम से भेजे गए थे। ईडी का दावा है कि यह रकम संदिग्ध लेन-देन का हिस्सा है और इसे अपराध की कमाई से जोड़ा जा रहा है।

जाँच के दौरान ईडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 38.69 करोड़ रुपए मूल्य की 43 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया था। एजेंसी ने इन संपत्तियों को अपराध की प्रत्यक्ष कमाई या उसके बराबर मूल्य की संपत्ति के रूप में चिह्नित किया है। इन संपत्तियों में विभिन्न राज्यों में स्थित जमीन और अन्य अचल संपत्तियाँ शामिल बताई जा रही हैं। ईडी का कहना है कि ये अटैचमेंट जाँच का हिस्सा है और अंतिम फैसला अदालत के आदेश के बाद ही होगा।

ईडी ने जुलाई 2025 में रॉबर्ट वाड्रा का बयान पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज किया था। इस दौरान उनसे संजय भंडारी,विदेशी संपत्तियों और विभिन्न वित्तीय लेन-देन को लेकर लंबी पूछताछ की गई थी। वहीं,संजय भंडारी खुद भी इस मामले में मुख्य आरोपी है और उस पर विदेशों में अघोषित संपत्तियाँ रखने और अवैध वित्तीय लेन-देन करने के गंभीर आरोप हैं। भंडारी फिलहाल विदेश में है और भारतीय एजेंसियां उसके प्रत्यर्पण की कोशिशों में जुटी हुई हैं।

इस पूरे मामले पर राजनीतिक और कानूनी हलकों में भी नजरें टिकी हुई हैं,क्योंकि रॉबर्ट वाड्रा का नाम लंबे समय से विभिन्न जाँच एजेंसियों की जाँच में आता रहा है। हालाँकि,वाड्रा की ओर से इन आरोपों को पहले भी निराधार और राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित बताया जाता रहा है। अब अदालत में सुनवाई आगे बढ़ने के साथ ही यह साफ होगा कि ईडी द्वारा लगाए गए आरोप किस हद तक कानूनी कसौटी पर टिकते हैं।

फिलहाल राऊज एवेन्यू कोर्ट ने ईडी को आवश्यक दस्तावेज दाखिल करने का अंतिम अवसर देते हुए अगली सुनवाई की तारीख 26 फरवरी तय कर दी है। ऐसे में अब सबकी निगाहें इसी तारीख पर टिकी हैं,जब यह तय होगा कि अदालत चार्जशीट पर संज्ञान लेती है या नहीं और इस बहुचर्चित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।