नई दिल्ली,27 जनवरी (युआईटीवी)- भारत ने अपना 77वां गणतंत्र दिवस भव्यता और देशभक्ति की भावना के साथ मनाया। राष्ट्र ने एकजुट होकर अपनी लोकतांत्रिक भावना,सैन्य शक्ति और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का सम्मान किया। नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित प्रतिष्ठित परेड भारत की विविधता में एकता का सशक्त प्रतीक थी,जिसमें परंपरा,आधुनिकता और राष्ट्रीय गौरव का अद्भुत संगम देखने को मिला।
इस वर्ष के समारोहों में ‘सिंदूर’ के प्रतीक को प्रमुखता से दर्शाया गया,जो भारतीय महिलाओं और सशस्त्र बलों के साहस,बलिदान और अदम्य भावना का प्रतीक है। भारतीय संस्कृति में गहराई से समाया हुआ सिंदूर रंग,शक्ति,दृढ़ता और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक बना। विशेष कार्यक्रमों में महिला अधिकारियों,अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं और रक्षा,विज्ञान,शासन और सामाजिक परिवर्तन में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय सेना,नौसेना और वायु सेना की प्रभावशाली टुकड़ियों ने अनुशासन,सटीकता और तकनीकी प्रगति का प्रदर्शन किया। स्वदेशी रक्षा उपकरण और आधुनिक हथियार आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के तहत भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता को दर्शाते हैं। भारतीय वायु सेना की पूर्णतया समन्वित उड़ान ने कर्तव्य पथ पर खड़े दर्शकों से जोरदार तालियाँ बटोरीं।
विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की जीवंत झांकियों के माध्यम से सांस्कृतिक विविधता का प्रदर्शन किया गया। प्रत्येक झांकी ने एक अनूठी कहानी बयां की – प्राचीन परंपराओं और लोक कलाओं से लेकर आधुनिक विकास पहलों तक – जो भारत की सभ्यता की गहराई का जीवंत चित्रण प्रस्तुत करती है। पारंपरिक नृत्यों, रंगीन वेशभूषाओं और क्षेत्रीय संगीत ने उत्सव में जान फूँक दी और विविधता में एकता के संदेश को सुदृढ़ किया।
देश भर के स्कूली बच्चों,कलाकारों और प्रस्तुतिकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पर्यावरण जागरूकता,सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय प्रगति को उजागर करने वाली विषयगत प्रस्तुतियाँ दीं। उनकी भागीदारी सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़े रहते हुए भारत के भविष्य को आकार देने में युवाओं की भूमिका का प्रतीक थी।
जैसे ही तिरंगा शान से लहराया और राजधानी में देशभक्ति के गीत गूँजे,77वें गणतंत्र दिवस समारोह ने भारत की अपने संविधान,लोकतांत्रिक आदर्शों और सामूहिक प्रगति के प्रति प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित किया। सिंदूर की चमक और सांस्कृतिक रंगों के सहज मिश्रण ने इस वर्ष के गणतंत्र दिवस को केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं,बल्कि एक राष्ट्र के रूप में भारत की शक्ति,भावना और साझा पहचान का एक सशक्त स्मरणकर्ता बना दिया।
